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CG News: स्वीकृत नक्शे से हटकर निर्माण करना पड़ा भारी, रेरा ने प्रमोटर पर लगाया 10 लाख रुपये का जुर्माना
Sat, 03 Jan 2026 12:30 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Sat, 03 Jan 2026 12:30 PM IST
सार
रायपुर की आवासीय परियोजना ‘वॉलफोर्ट एलेन्सिया’ के प्रमोटर के खिलाफ छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (रेरा) ने सख्त कार्रवाई की है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
रायपुर की आवासीय परियोजना ‘वॉलफोर्ट एलेन्सिया’ के प्रमोटर के खिलाफ छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (रेरा) ने सख्त कार्रवाई की है। प्राधिकरण ने रियल एस्टेट अधिनियम, 2016 के प्रावधानों के उल्लंघन को गंभीर मानते हुए प्रमोटर पर 10 लाख रुपए का आर्थिक दंड लगाया है।
रेरा में हुई सुनवाई के दौरान सामने आया कि परियोजना का विकास नगर और ग्राम निवेश विभाग की ओर स्वीकृत ले-आउट के अनुसार नहीं किया गया। जांच में यह पाया गया कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण तय नक्शे से हटकर किया गया है, जो अधिनियम की धारा 14(1) का उल्लंघन है। इस धारा के तहत किसी भी परियोजना में निर्माण कार्य केवल अनुमोदित योजना और निर्देशों के अनुसार करना अनिवार्य होता है।
प्राधिकरण ने यह भी ध्यान में रखा कि वर्तमान में उक्त एसटीपी का उपयोग परियोजना के आवंटित लोग कर रहे हैं। आवंटितियों के हितों और रोजमर्रा की सुविधाओं को प्रभावित न करने के उद्देश्य से फिलहाल एसटीपी को तोड़ने या दोबारा निर्माण करने का निर्देश नहीं दिया गया। इसके बावजूद, बिना अनुमति ले-आउट में बदलाव को गंभीर चूक मानते हुए प्रमोटर को दोषी ठहराया गया है।
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रेरा ने स्पष्ट किया है कि स्वीकृत ले-आउट या योजनाओं में सक्षम प्राधिकरण की पूर्व अनुमति के बिना किया गया कोई भी परिवर्तन कानूनन अपराध है और ऐसे मामलों में आगे भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह फैसला रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और नियमों के सख्त पालन का संदेश देता है।
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रेरा में हुई सुनवाई के दौरान सामने आया कि परियोजना का विकास नगर और ग्राम निवेश विभाग की ओर स्वीकृत ले-आउट के अनुसार नहीं किया गया। जांच में यह पाया गया कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण तय नक्शे से हटकर किया गया है, जो अधिनियम की धारा 14(1) का उल्लंघन है। इस धारा के तहत किसी भी परियोजना में निर्माण कार्य केवल अनुमोदित योजना और निर्देशों के अनुसार करना अनिवार्य होता है।
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प्राधिकरण ने यह भी ध्यान में रखा कि वर्तमान में उक्त एसटीपी का उपयोग परियोजना के आवंटित लोग कर रहे हैं। आवंटितियों के हितों और रोजमर्रा की सुविधाओं को प्रभावित न करने के उद्देश्य से फिलहाल एसटीपी को तोड़ने या दोबारा निर्माण करने का निर्देश नहीं दिया गया। इसके बावजूद, बिना अनुमति ले-आउट में बदलाव को गंभीर चूक मानते हुए प्रमोटर को दोषी ठहराया गया है।
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रेरा ने स्पष्ट किया है कि स्वीकृत ले-आउट या योजनाओं में सक्षम प्राधिकरण की पूर्व अनुमति के बिना किया गया कोई भी परिवर्तन कानूनन अपराध है और ऐसे मामलों में आगे भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह फैसला रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और नियमों के सख्त पालन का संदेश देता है।