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Chhattisgarh: सीएम बघेल ने लोगों को दी बिजली बचाने की सलाह, भाजपा ने पूछा- क्या अपने घर में पावर कट किया?
Sat, 04 Jun 2022 08:33 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Sat, 04 Jun 2022 08:33 PM IST
सार
सीएम बघेल ने कहा कि जो लोग खनन के खिलाफ लड़ रहे हैं, उन्हें पहले अपने घरों में एयर कंडीशनर, पंखे और कूलर का इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए, उसके बाद ही उनकी लड़ाई को वास्तविक रूप में देखा जाएगा।
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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने सरगुजा संभाग में हसदेव-अरंद वन में कोयला खनन के खिलाफ चल रहे विरोध की निंदा की। उन्होंने शनिवार को ताप विद्युत संयंत्रों के लिए कोयले की आवश्यकता को रेखांकित किया और कहा कि जो लोग कोयला खनन का विरोध कर रहे हैं, उन्हें पहले अपने घरों में बिजली को बंद कर देना चाहिए।
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सीएम बघेल ने दिया ये जवाब
सरगुजा में राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (RRVUNL) को आवंटित दो कोयला खदानों में खनन की अनुमति के खिलाफ कार्यकर्ताओं और ग्रामीण लगातार विरोध कर रहे हैं। इस विरोध को लेकर पूछे गए सवाल पर सीएम बघेल ने कहा कि राजस्थान सरकार को आवंटित खदान चालू है, फिर एक चालू खदान को कैसे बंद किया जा सकता है? जो लोग विरोध कर रहे हैं उन्हें पहले अपने घरों में बिजली बंद कर देनी चाहिए।
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उन्होंने कहा कि देश में कितनी जलविद्युत परियोजनाएं हैं? हवाओं के माध्यम से भी बिजली उत्पादन सीमित है। हमारे पास विकल्प के रूप में सौर ऊर्जा है लेकिन इसकी भी सीमाएं हैं। जिस दिन बिजली उत्पादन की कोई वैकल्पिक व्यवस्था होगी, उस दिन ताप विद्युत संयंत्रों पर निर्भरता कम हो जाएगी, लेकिन वर्तमान में हम उन ताप संयंत्रों पर निर्भर हैं जिनके लिए कोयले की जरूरत है।
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कोयला ब्लॉकों के आवंटन में राज्य की भूमिका नहीं
उन्होंने आगे कहा कि कोयला ब्लॉकों का आवंटन केंद्र सरकार द्वारा किया गया था। इसमें राज्य सरकारों की कोई भूमिका नहीं थी। सीएम भूपेश ने कहा कि हमारे राज्य से कोयले की आपूर्ति एसईसीएल (सेंट्रल पीएसयू साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) के माध्यम से पूरे देश में की जा रही है। एसईसीएल के पास अधिकतम 52 खदानें हैं। राजस्थान सरकार को दो से तीन खदानें हसदेव अरंड क्षेत्र में दी गई हैं। उन्होंने परसा पूर्व केंटे बसन चरण-II का जिक्र करते हुए कहा कि खदान विस्तार की आवश्यकता है।
इसके लिए ग्रामीणों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं द्वारा लगातार विरोध किया जा रहा है। इसको लेकर सीएम भूपेश ने कहा कि जब खदान का विस्तार होगा तो पेड़ काट दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि 30 साल में, 8,000 पेड़ काटे जाने हैं।
पहले अपने घरों की बंद करें बिजली
उन्होंने आगे कहा कि जो लोग खनन के खिलाफ लड़ रहे हैं, उन्हें पहले अपने घरों में एयर कंडीशनर, पंखे और कूलर का इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए, उसके बाद ही उनकी लड़ाई को वास्तविक रूप में देखा जाएगा। वे अपने परिवारों को एसी कमरों में रख रहे हैं और दूसरों को अंधेरे में रहने के लिए कह रहे हैं। मेरी सरकार ऐसा नहीं करेगी। वनों और आदिवासियों के हितों के साथ समझौता करना होगा, लेकिन लौह अयस्क कोयला, बॉक्साइट, डोलोमाइट जैसे प्राकृतिक संसाधनों का खनन करना होगा, जो पौधों को चलाने में मदद करते हैं।
भाजपा ने पूछा बड़ा सवाल
वहीं राज्य भाजपा प्रमुख विष्णु देव साई ने सीएम बघेल के बयान को हास्यास्पद बताया है। उन्होंने कहा कि 2018 विधानसभा चुनाव से पहले जब बघेल राज्य कांग्रेस अध्यक्ष थे, तो उन्होंने इस मुद्दे पर राजनीति की। तब वे इन खदानों के विरोध में थे। भाजपा नेता ने सवाल किया कि क्या उन्होंने और उनकी पार्टी के नेताओं ने तब अपने घरों में बिजली बंद कर दी थी।