फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chhattisgarh ›   Chhattisgarh tribes protest against mining continues for fourth day

पहाड़ पर विराजमान देवी को उत्खनन से बचाने के लिए लगातार चौथे दिन जारी रहा आदिवासियों का आंदोलन 

Tue, 11 Jun 2019 01:46 PM IST
Prachi Priyam न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Prachi Priyam Updated Tue, 11 Jun 2019 01:46 PM IST
विज्ञापन
Chhattisgarh tribes protest against mining continues for fourth day
दंतेवाड़ा निवासी - फोटो : Social Media

अपने इष्ट देवता की पत्नी के निवास स्थल को बचाने के लिए दंतेवाड़ा के आदिवासी समुदाय के लोग सोमवार को लगातार चौथे दिन डटे रहे। छत्तीसगढ़ का दंतेवाड़ा जिला नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की गिनती में आता है। यहां के बैलाडीला पहाड़ी के ‘डिपाजिट नंबर 13’ में 10 एमटीपीए क्षमता के लौह अयस्क का भंडार है। आदिवासियों का आरोप है कि राष्ट्रीय खनिज विकास निगम ने यह डिपॉजिट अडानी समूह को सौंप दिया है, मगर उनका मानना है इस पहाड़ी में उनके इष्ट देवता प्राकृतिक गुरु नन्दराज की धर्मपत्नी पिटोरमेटा देवी विराजमान हैं।

विज्ञापन


इसी उत्खनन का विरोध करते हुए बैलाडीला पहाड़ी के करीब दो सौ गांव के आदिवासी पिछले चार दिन से अपने पारंपारिक वाद्ययंत्रों और तीर कमान के साथ प्रदर्शन कर रहे हैं, और चौथे दिन भी उन्होंने अपना आंदोलन जारी रखा। बता दें कि डिपाजिट 13 को छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम लिमिटेड एनसीएल के नाम से संयुक्त उद्यम कंपनी के तहत विकसित किया जा रहा है। एनसीएल के अधिकारियों के मुताबिक खुदाई और खदान के विकास का ठेका पिछले साल अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड को दिया गया था। वर्तमान में साइट पर पहुंचने का मार्ग बनाने के लिए पेड़ काटने का काम चल रहा है।
विज्ञापन


क्षेत्र में ‘डिपाजिट 13’ में खनन गतिविधियों का विरोध कर रहे आदिवासी नेता मंगल कुंजाम ने कहा कि हम किसी भी कीमत पर हमारे पवित्र पहाड़ी पर खनन की अनुमति नहीं देंगे, जो हमारे देवता के रूप में पूजे जाते हैं। उन्होंने कहा कि खनन योजना के अनुसार, इस क्षेत्र में 25 हजार से अधिक पेड़ काट दिए जाएंगे और अब तक 10 हजार पेड़ काटे जा चुके हैं। इसका पर्यावरण पर भी बुरा असर पड़ेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


डिपाजिट 13 में दो बड़ी पहाड़ियाँ हैं, जिनमें से एक को नंदराज पर्वत के नाम से जाना जाता है। इस पर्वत का नाम आदिवासियों के प्रकृति देवता के नाम पर रखा गया है। वहीं दूसरी पहाड़ी में नंदराज की पत्नी का पिटोरमेटा देवी का मंदिर है। आदिवासी पिछले चार दिनों से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अभी तक अधिकारियों की तरफ से कोई आश्वासन नहीं मिला है।


आदिवासियों के इस आंदोलन को कांग्रेस के क्षेत्रीय नेताओं और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ (जे) के नेताओं का भी समर्थन मिल रहा है। इस बीच राज्य के वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने कहा है कि ‘डिपाजिट 13’ में पेड़ों की कटाई की अनुमति वर्तमान कांग्रेस की सरकार ने नहीं बल्कि पिछले वर्ष जनवरी माह में भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने दी थी। इस मामले में कार्रवाई के सवाल पर अकबर ने कहा कि पहले पूरे मामले की जानकारी ली जाएगी। इसके बाद ही आगे की कार्यवाही की जाएगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed