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KBC में छाया छत्तीसगढ़ का होनहार बेटा योगेश साहू: 50 लाख जीतकर लौटे; IAS बनने के लिए छोड़ी 1.5 लाख की नौकरी
Thu, 20 Aug 2026 05:29 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Thu, 20 Aug 2026 05:29 PM IST
सार
बलौदाबाजार जिले के छोटे से गांव टेहका से निकलकर योगेश साहू ने देशभर में अपनी पहचान बनाई है। 'कौन बनेगा करोड़पति-18' में हॉट सीट पर पहुंचे 23 वर्षीय योगेश ने अपनी समझ और तर्कशक्ति के दम पर 50 लाख रुपये की राशि जीत ली।
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KBC में छाया छत्तीसगढ़ का होनहार बेटा योगेश साहू
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के छोटे से गांव टेहका से निकलकर योगेश साहू ने देशभर में अपनी पहचान बनाई है। 'कौन बनेगा करोड़पति-18' में हॉट सीट पर पहुंचे 23 वर्षीय योगेश ने अपनी समझ और तर्कशक्ति के दम पर 50 लाख रुपये की राशि जीत ली। एक करोड़ रुपये के सवाल तक पहुंचने के बाद उन्होंने जोखिम नहीं लिया और गेम क्विट कर दिया।
मुंबई से लौटने के बाद योगेश का भाटापारा रेलवे स्टेशन पर ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया। उनकी सफलता से परिवार के साथ-साथ पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है।
योगेश साहू की उपलब्धियों की कहानी भी बेहद प्रेरणादायक है। उन्होंने आईआईटी बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और संस्थान में टॉपर रहे। कैंपस प्लेसमेंट में उन्हें करीब 1.5 लाख रुपये प्रतिमाह की नौकरी मिली थी, लेकिन उन्होंने नौकरी करने के बजाय अपना लक्ष्य आईएएस बनना तय किया और नौकरी छोड़ दी।
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योगेश के पिता गयाराम साहू महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल रमेश बैस के ड्राइवर हैं। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद योगेश ने पढ़ाई में लगातार बेहतर प्रदर्शन किया। उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की प्रारंभिक परीक्षा भी पहले प्रयास में पास की है और फिलहाल मुख्य परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं।
केबीसी में 50 लाख रुपये के सवाल में योगेश के सामने कुछ शहरों और वर्षों की एक सूची रखी गई थी। उन्हें गायब शहर का नाम पहचानना था। विकल्पों में त्रिशूर, मैसूर, अल्मोड़ा और तिरुचिरापल्ली शामिल थे। योगेश ने अपनी आखिरी लाइफलाइन ‘संकेत सूचक’ का इस्तेमाल किया। मिले संकेत से उन्होंने सवाल की कड़ी को नोबेल पुरस्कार विजेताओं से जोड़ा और सही जवाब तिरुचिरापल्ली चुना। जवाब सही होने के साथ ही उन्होंने 50 लाख रुपये जीत लिए। इसके बाद जब उनके सामने एक करोड़ रुपये का सवाल आया तो योगेश ने जोखिम लेने के बजाय 50 लाख रुपये लेकर खेल छोड़ने का फैसला किया।
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मुंबई से लौटने के बाद योगेश का भाटापारा रेलवे स्टेशन पर ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया। उनकी सफलता से परिवार के साथ-साथ पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है।
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योगेश साहू की उपलब्धियों की कहानी भी बेहद प्रेरणादायक है। उन्होंने आईआईटी बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और संस्थान में टॉपर रहे। कैंपस प्लेसमेंट में उन्हें करीब 1.5 लाख रुपये प्रतिमाह की नौकरी मिली थी, लेकिन उन्होंने नौकरी करने के बजाय अपना लक्ष्य आईएएस बनना तय किया और नौकरी छोड़ दी।
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योगेश के पिता गयाराम साहू महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल रमेश बैस के ड्राइवर हैं। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद योगेश ने पढ़ाई में लगातार बेहतर प्रदर्शन किया। उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की प्रारंभिक परीक्षा भी पहले प्रयास में पास की है और फिलहाल मुख्य परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं।
केबीसी में 50 लाख रुपये के सवाल में योगेश के सामने कुछ शहरों और वर्षों की एक सूची रखी गई थी। उन्हें गायब शहर का नाम पहचानना था। विकल्पों में त्रिशूर, मैसूर, अल्मोड़ा और तिरुचिरापल्ली शामिल थे। योगेश ने अपनी आखिरी लाइफलाइन ‘संकेत सूचक’ का इस्तेमाल किया। मिले संकेत से उन्होंने सवाल की कड़ी को नोबेल पुरस्कार विजेताओं से जोड़ा और सही जवाब तिरुचिरापल्ली चुना। जवाब सही होने के साथ ही उन्होंने 50 लाख रुपये जीत लिए। इसके बाद जब उनके सामने एक करोड़ रुपये का सवाल आया तो योगेश ने जोखिम लेने के बजाय 50 लाख रुपये लेकर खेल छोड़ने का फैसला किया।