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छत्तीसगढ़ : रायपुर कोर्ट ने चार लोगों को आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन का उपयोग करने पर 10-10 साल कारावास की सजा सुनाई

Thu, 25 Nov 2021 06:50 AM IST
Kuldeep Singh पीटीआई, रायपुर
पीटीआई, रायपुर Published by: Kuldeep Singh Updated Thu, 25 Nov 2021 06:50 AM IST
सार

रायपुर की एक अदालत ने कहा, मामले में अभियोजन पक्ष के साक्ष्य और घटना की पूरी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपी के कृत्य का उद्देश्य भारत की संप्रभुता और अखंडता को बाधित करना है, जो कि वैध नहीं है। लोक अभियोजक केके शुक्ला ने कहा कि न्यायाधीश ने दोषियों को यूएपीए की अलग-अलग धाराओं के तहत 10-10 साल की सजा सुनाई

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Chhattisgarh: Raipur court sentenced four people to 10 years imprisonment for using money for terrorist activities
जेल (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : istock

विस्तार

छत्तीसगढ़ के रायपुर की एक अदालत ने बुधवार को प्रतिबंधित समूहों सिमी और इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े चार लोगों को आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन का उपयोग करने के लिए 10 साल के कठोर कारावास (आरआई) की सजा सुनाई। उनके कृत्य भारत की संप्रभुता और अखंडता को बाधित करने के लिए था।

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अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत ने चार- धीरज साओ (21), पप्पू मंडल, जुबैर हुसैन (42) और उनकी पत्नी आयशा बानो (39) को गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया है। 
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अदालत ने कहा, मामले में अभियोजन पक्ष के साक्ष्य और घटना की पूरी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपी के कृत्य का उद्देश्य भारत की संप्रभुता और अखंडता को बाधित करना है, जो कि वैध नहीं है।
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लोक अभियोजक केके शुक्ला ने कहा कि न्यायाधीश ने दोषियों को यूएपीए की अलग-अलग धाराओं के तहत 10-10 साल की सजा सुनाई, जबकि धीरज साओ को आईपीसी की धारा 417 (धोखाधड़ी की सजा) के तहत एक साल की कठोर जेल की सजा सुनाई। उन्होंने कहा कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

केके शुक्ला ने कहा कि अदालत ने पश्चिम बंगाल के मूल निवासी एक अन्य आरोपी सुखेन हलदर (28) को बरी कर दिया और अन्य मामलों में उसकी आवश्यकता नहीं होने पर उसे रिहा करने का आदेश दिया।

उन्होंने कहा, दिसंबर 2013 में बिहार के जमुई निवासी धीरज साओ, जो रायपुर के खमतराई थाना क्षेत्र के ट्रांसपोर्ट नगर में सड़क किनारे भोजनालय चलाता था, को राज्य के आतंकवाद-रोधी दस्ते (एटीएस) की एक टीम ने उसके लिंक के बारे में विशिष्ट इनपुट के आधार पर पकड़ा था।

शुक्ला ने कहा कि धीरज साओ, खालिद नाम के एक पाकिस्तानी नागरिक से प्राप्त धन को इंडियन मुजाहिदीन व सिमी प्रतिबंधित समूहों से जुड़े लोगों को रायपुर और जमुई में एक बैंक के खाते के माध्यम से प्रसारित कर रहा था। उन्होंने कहा कि बाद में अन्य आरोपी सुखेन हलदर को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, धीरज साओ ने कर्नाटक के मंगलुरु में सिमी और आईएम के गुर्गों जुबैर हुसैन और आयशा बानो के बैंक खातों में अपने खाते के माध्यम से नकदी जमा की थी।  जुबैर हुसैन और उनकी पत्नी आयशा बानो को बाद में बिहार एटीएस की एक टीम ने आतंकी फंडिंग के आरोप में मंगलुरु से गिरफ्तार किया था।


गौरतलब है कि धीरज साओ की गिरफ्तारी से पहले छत्तीसगढ़ पुलिस ने नवंबर 2013 में सिमी के एक मॉड्यूल का भंडाफोड़ कर इस संगठन के कम से कम 16 गुर्गों को रायपुर से गिरफ्तार किया था।

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