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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दिए गर्भपात के निर्देश, नाबालिग गैंगरेप पीड़िता की डिलीवरी हुई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
Updated Wed, 07 Feb 2018 06:56 PM IST
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
- फोटो : highcourt.cg.gov.in
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बस्तर में एक 13 वर्षीय गैंगरेप पीड़िता की सी-सेक्शन ऑपरेशन कर डिलीवरी कराई गई। हालांकि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस छह महीने की गर्भवती लड़की का गर्भपात कराने के निर्देश दिए थे। लेकिन उसकी उम्र और उसके स्वास्थ्य के खतरों को देखते हुए डॉक्टरों ने लड़की की डिलीवरी करने का फैसला किया।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दो फरवरी को पांच डॉक्टरों की एक टीम का गठन किया था और उन्हें गैंगरेप पीड़ित लड़की का डॉ बीआर अंबेडकर अस्पताल में गर्भपात कराने का निर्देश दिया था।
लेकिन चूंकि लड़की को गर्भवती हुए 24 हफ्तों का समय बीत चुका था इसलिए डॉक्टरों को गर्भपात कराना खतरों से खाली नहीं लगा इसलिए उन्होंने लड़की की डिलीवरी कराई। अंबेडकर अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक इस नाबालिग लड़की ने एक बच्ची को जन्म दिया, जो बमुश्किल चार घंटों तक ही जीवित रह पाई क्योंकि वह समय से पहले पैदा हुई थी।
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मामले का गंभीरता से संज्ञान लेते हुए राज्य के बाल अधिकार सुरक्षा की नवनियुक्त अध्यक्ष प्रभा दुबे ने डॉक्टरों की टीम से बात की है और लड़की का बेहतर तरीके से ध्यान रखने को कहा है। दुबे ने लड़की के परिजनों से भी बात की और उसके पुनर्वास के बारे में आश्वस्त किया।
जानकारी के मुताबिक ऐसा पहली बार हुआ था कि हाईकोर्ट ने एक नाबालिग गैंगरेप पीड़िता के गर्भपात का आदेश दिया था।
अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक लड़की की स्थिति स्थिर है लेकिन वास्तविक स्थिति का पता 24 घंटों बाद ही चलेगा।
बस्तर के नारायणपुर जिले की रहनेवाली इस आदिवासी लड़की के साथ साल 2017 में चार लोगों ने बलात्कार किया था। लेकिन मामला प्रकाश में तब आया जब लड़की के परिजनों को उसके गर्भवती होने का पता चला।
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दो फरवरी को पांच डॉक्टरों की एक टीम का गठन किया था और उन्हें गैंगरेप पीड़ित लड़की का डॉ बीआर अंबेडकर अस्पताल में गर्भपात कराने का निर्देश दिया था।
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लेकिन चूंकि लड़की को गर्भवती हुए 24 हफ्तों का समय बीत चुका था इसलिए डॉक्टरों को गर्भपात कराना खतरों से खाली नहीं लगा इसलिए उन्होंने लड़की की डिलीवरी कराई। अंबेडकर अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक इस नाबालिग लड़की ने एक बच्ची को जन्म दिया, जो बमुश्किल चार घंटों तक ही जीवित रह पाई क्योंकि वह समय से पहले पैदा हुई थी।
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मामले का गंभीरता से संज्ञान लेते हुए राज्य के बाल अधिकार सुरक्षा की नवनियुक्त अध्यक्ष प्रभा दुबे ने डॉक्टरों की टीम से बात की है और लड़की का बेहतर तरीके से ध्यान रखने को कहा है। दुबे ने लड़की के परिजनों से भी बात की और उसके पुनर्वास के बारे में आश्वस्त किया।
जानकारी के मुताबिक ऐसा पहली बार हुआ था कि हाईकोर्ट ने एक नाबालिग गैंगरेप पीड़िता के गर्भपात का आदेश दिया था।
अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक लड़की की स्थिति स्थिर है लेकिन वास्तविक स्थिति का पता 24 घंटों बाद ही चलेगा।
बस्तर के नारायणपुर जिले की रहनेवाली इस आदिवासी लड़की के साथ साल 2017 में चार लोगों ने बलात्कार किया था। लेकिन मामला प्रकाश में तब आया जब लड़की के परिजनों को उसके गर्भवती होने का पता चला।