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Agneepath Scheme: सीएम बघेल ने साधा निशाना, बोले- चार साल बाद जब युवा बेरोजगार होकर लौटेंगे, तो क्या होगा?
Fri, 17 Jun 2022 07:24 PM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Fri, 17 Jun 2022 07:24 PM IST
सार
उन्होंने कहा कि 4 साल बाद जब 22-23 साल का लड़का वापस अपने घर लौटेगा और बेरोजगार होगा तो क्या होगा? क्या इतने लोगों को पुलिस में भर्ती करेंगे।
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भूपेश बघेल
- फोटो : Social media
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विस्तार
'अग्निपथ' योजना पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि 4 साल बाद जब 22-23 साल का लड़का वापस अपने घर लौटेगा और बेरोजगार होगा तो क्या होगा? क्या इतने लोगों को पुलिस में भर्ती करेंगे। जो भर्ती हो गया वो ठीक और जो नहीं हुआ वो, उनको तो बंदूक चलाना आ गया है। इस प्रकार आप उन्हें आधा अधूरा छोड़ देंगे तो वे गिरोह बनाकर आपराधिक घटनाओं में भी शामिल हो सकते हैं।
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दरअसल, केंद्र सरकार ने दशकों पुरानी रक्षा भर्ती प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए सेना के तीनों अंगों में सैनिकों की भर्ती संबंधी 'अग्निपथ' योजना का एलान किया था। इसके तहत सैनिकों की भर्ती चार साल की अवधि के लिए संविदा आधार पर की जाएगी।
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योजना के तहत चयन के लिए पहले पात्रता आयु साढ़े 17 वर्ष से 21 वर्ष के बीच तय की गई थी। इसके बाद सरकार ने ऊपरी आयु सीमा को केवल इस साल के लिए 21 से बढ़ाकर 23 साल करने का फैसला किया था। भर्ती के बाद सेना में शामिल युवाओं को 'अग्निवीर' नाम दिया जाएगा।
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इस पर बघेल ने कहा कि सशस्त्र बलों में पूर्णकालिक भर्ती क्यों नहीं की जा रही है? क्या आप यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि हमारे देश की रक्षा करने वाली सेना में भर्ती के लिए आपके पास पैसे नहीं हैं। देश की सेवा करने की भावना के साथ युवा सशस्त्र बलों में शामिल होते हैं। आप उनके भविष्य और देश की सीमाओं के साथ क्यों खिलवाड़ कर रहे हैं? एक तरफ आप देश की संपत्ति बेच रहे हैं और दूसरी तरफ आपके पास सेना में भर्ती के लिए पैसे नहीं हैं। आपको इस स्थिति पर एक श्वेत पत्र जारी करना चाहिए।
उन्होंने भाजपा शासित राज्यों की भी आलोचना की, जिन्होंने पुलिस भर्ती और संबंधित सेवाओं में 'अग्निवीर' को प्राथमिकता देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि सेना और पुलिस दो अलग-अलग पेशे हैं। पुलिस कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए है जबकि सेना रक्षा के लिए है। एक फौजी सिर्फ दो चीजें जानता है - दोस्त और दुश्मन। दुश्मन सामने दिखे तब उसे खत्म करना है। उसे दुश्मन से युध्द करना है, उससे लड़ाई करना है। पुलिस को मुख्य रूप से कानून और व्यवस्था बनाए रखने का काम सौंपा जाता है और इसे इससे नहीं जोड़ा जा सकता है। दोनों के प्रशिक्षण अलग-अलग हैं। फिर आप गुमराह करने की कोशिश क्यों कर रहे हैं।