‘छत्तीस’ घंटे सस्पेंस के बाद आखिर बघेल को ही मिला ‘गढ़’, आज लेंगे सीएम पद की शपथ
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कांग्रेस आलाकमान ने रविवार को आखिर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री पद का मसला सुलझा ही लिया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल राज्य के नए मुख्यमंत्री होंगे। वे सोमवार शाम पांच बजे अकेले ही पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे। इसके बाद उप मुख्यमंत्री और मंत्रियों के नामों पर चर्चा होगी।
विधानसभा चुनावों में पार्टी को 90 में से 68 सीटें मिलने के बाद से सीएम पद को लेकर चार बड़े नेताओं में घमासान चल रहा था। भूपेश बघेल के अलावा पिछली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे टीएस सिंहदेव, सांसद रहते विधायक बने ताम्रध्वज साहू और पूर्व केंद्रीय मंत्री व इस बार विधायक चुने गए चरणदास महंत भी सीएम पद पर दावेदारी जता रहे थे।
शुक्रवार रात तक मध्य प्रदेश और राजस्थान में सीएम की घोषणा के बाद से कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के नई दिल्ली स्थित आवास पर छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री तय करने के लिए लगातार बैठकें चल रही थीं। करीब छत्तीस घंटे बाद रविवार को यहां पार्टी विधायक दल की बैठक में केंद्रीय पर्यवेक्षक मल्लिकार्जुन खड़गे ने भूपेश बघेल को राज्य की कमान सौंपने की घोषणा कर दी।
खड़गे ने कहा कि सीएम का नाम तय करने में इसलिए मुश्किल आई क्योंकि चारों ही नेताओं ने पार्टी को राज्य में दो तिहाई से अधिक बहुमत दिलाने में बराबर मेहनत की है। लेकिन चारों नेताओं के साथ बातचीत करने के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने भूपेश बघेल को सीएम बनाने का निर्णय किया। उनके इस प्रस्ताव को विधायक दल ने भी सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी।
कांग्रेस के लिए किया है लंबा संघर्ष , युवक कांग्रेस से मुख्यमंत्री पद तक
दुर्ग में जन्में 57 वर्षीय भूपेश बघेल कुर्मी क्षत्रिय (ओबीसी) और किसान परिवार से हैं। बघेल ने राज्य में कांग्रेस को सत्ता तक पहुंचाने में डेढ़ दशक तक लंबा सफर तय किया है। इस दौरान लगातार तीन चुनावों में भाजपा के हाथों शिकस्त झेलने, सुकमा में नक्सली हमले में प्रदेश कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के खत्म होने, राज्य की पहली कांग्रेस सरकार में सीएम रहे अजीत जोगी के पार्टी छोड़ने से कांग्रेस कार्यकर्ता लगातार हताशा से घिरे हुए थे लेकिन भूपेश बघेल नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव के साथ उनका मनोबल बढ़ाने में जुटे रहे। उनके नेतृत्व में कांग्रेस ने रिकॉर्ड सीटें हासिल की हैं।
युवक कांग्रेस से मुख्यमंत्री पद तक :
भूपेश बघेल ने 80 के दशक में कांग्रेस से ही राजनीतिक सफर शुरू किया था। वे मध्य प्रदेश के विभाजन से पहले दुर्ग युवक कांग्रेस (ग्रामीण) के अध्यक्ष और मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के निदेशक रहे। वे 1993 और 1998 में विधायक चुने गए थे। छत्तीसगढ़ बनने पर केबिनेट मंत्री बने और 2003 में पाटन सीट से चुनाव जीते। कांग्रेस के सत्ता से बाहर होने पर विपक्ष के उपनेता बने। वे 2008 में चुनाव हार गए थे लेकिन 2013 में फिर विजयी हुए। उसी वर्ष झीरम घाटी नक्सली हमले में शीर्ष कांग्रेसी नेताओं के खत्म होने पर 2014 में उन्हें प्रदेश संगठन की कमान सौंपी गई। तब से वे प्रदेश अध्यक्ष हैं।