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CG: पीसीसी चीफ बैज ने बैगा जनजाति के 3 लोगों की संदिग्ध मौत की न्यायिक जांच कराने के लिए सीएम साय को लिखा पत्र
Tue, 30 Jan 2024 05:50 PM IST
ललित कुमार सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर
अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर
Published by: ललित कुमार सिंह
Updated Tue, 30 Jan 2024 05:50 PM IST
सार
राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र बैगा जनजाति के परिवार की संदिग्ध मौत की न्यायिक जांच के लिये पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखा है।
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पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र बैगा जनजाति के परिवार की संदिग्ध मौत की न्यायिक जांच के लिये पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया है कि पंडरिया विधानसभा के कुकदुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम नागडबरा में राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र, बैगा परिवार के एक ही परिवार के तीन लोगों के मृत्यु संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है।
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उन्होंने पत्र में लिखा कि मृतक के परिजनों का स्पष्ट आरोप है कि पुलिस प्रशासन ने साक्ष्यों को छुपाकर हत्या को आगजनी से मृत्यु के रूप में बदलने का प्रयास किया जा रहा है। घटनास्थल पर परिजनों ने खून का छींटा लकड़ी के खंभे में, दीवार पर और जमीन पर भी देखा है। परिजनों का यह भी आरोप है कि पुलिस और प्रशासन ने मृतकों के शव के सभी अंगों को दिखाएं बगैर पंचनामा बनाया गया। जानकारी दिए बगैर ही घटनास्थल के बगल वाले खेत में पोस्टमार्टम किया है। बगैर परिजनों को जानकारी दिए आनन-फानन खेत में ही पोस्टमार्टम करना संदेह के दायरे में है। मृतक के परिजनों का यह भी आरोप है कि पुलिस एवं प्रशासन ने दबाव बनाकर बैगा परिवार के तय रीति-नीति के विरुद्ध जबरिया दाह संस्कार कराया गया।
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परिजनों का यह भी आरोप है कि मृतक बैगा परिवार के घर के बगल में बने कवेलू के खुली झोपड़ी में जली हुई हालत में तीनों शव पड़े थे। शवों के ऊपर झोपड़ी के तीन-तीन फीट के तीन बल्ली जले हुए स्पष्ट रूप से दिख रहा था। परिजनों का सवाल है कि तीन-तीन फुट के केवल तीन बल्ली के जलने से तीन लोग जिंदा जलकर कैसे मृत हो सकते हैं? घटनास्थल को देखने से संदेह होता है कि इस घटना के पीछे कोई षड़यंत्र है। परिजनों के अनुसार पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर का कथन था कि शव जल चुका था, पोस्टमार्टम से मृत्यु के कारण का पता नहीं चला, मृत्यु के कारण का पता पुलिस इन्वेस्टिगेशन या फोरेंसिक रिपोर्ट से पता चलेगा, पोस्टमार्टम में मृत्यु का कारण स्पष्ट नहीं हुआ है।
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एक ही परिवार के तीन सदस्यों की संदेहास्पद मौत को लेकर बैगा समाज ने भी सवाल उठाया है बैगा जनजाति में दाह संस्कार की परंपरा नहीं है। इसके बावजूद प्रशासन ने दबावपूर्वक शव का दाह संस्कार करवाना, प्रशासन का यह कृत्य षडयंत्र और छुपाने के संदेह का आधार है।