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CG Chunav 2023: पहले फेज की 20 सीटों पर हुई रिकॉर्ड वोटिंग, नक्सलियों के डर को हराकर जीता लोकतंत्र
Tue, 07 Nov 2023 08:33 PM IST
रोहित मिश्र
अमर उजाला टीम डिजिटल, रायपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल, रायपुर
Published by: रोहित मिश्र
Updated Tue, 07 Nov 2023 08:33 PM IST
सार
Chhattisgarh Election 2023: छत्तीसगढ़ में पहले फेज के चुनाव में रिकॉर्ड वोटिंग हुई। आज जहां पर वोट पड़े वह नक्सल प्रभावित इलाके माने जाते हैं।
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राज्य की 20 सीटों पर मंगलवार को वोटिंग हुई।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
छत्तीसगढ़ में पहले फेज के लिए हुए चुनाव में लोकतंत्र की जीत हुई। 20 सीटों के लिए हुए मतदान में लोगों ने रिकॉर्ड वोटिंग की। कथित तौर पर नक्सलियों के गढ़ कहे जाने वाले इलाकों में जमकर मतदान हुआ। हिंसा की कुछ छिटपुट घटनाएं जरूर हुईं, पर उसका असर वोटिंग पैटर्न पर नहीं पड़ा। पांच बजे तक कांकेर में 76 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया। मतदान की अंतिम रिपोर्ट मिलने के बाद यह मत प्रतिशत और बढ़ सकता है। इन इलाकों में हुई रिकॉर्ड वोटिंग से यह बात साफ हो गई कि नक्सलियों का डर वोट प्रतिशत नहीं घटा सका। मतदाताओं ने लोकतंत्र पर भरोसा जताया।
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5 बजे तक मतदान का प्रतिशत
अंतागढ़ - 70.72 प्रतिशत
बस्तर - 71.39 प्रतिशत
भानुप्रतापपुर - 79.10 प्रतिशत
बीजापुर - 40.98 प्रतिशत
चित्रकोट - 70.36 प्रतिशत
दंतेवाड़ा - 62.55 प्रतिशत
डोंगरगांव - 76.80 प्रतिशत
डोंगरगढ़ - 77.40 प्रतिशत
जगदलपुर - 75 प्रतिशत
कांकेर - 76.13 प्रतिशत
कवर्धा - 72.89 प्रतिशत
केशकाल - 74.49 प्रतिशत
खैरागढ़ - 76.31 प्रतिशत
खुज्जी - 72.01 प्रतिशत
कोंडागांव - 76.29 प्रतिशत
कोंटा - 50.12 प्रतिशत
मोहला-मानपुर - 76 प्रतिशत
नारायणपुर - 63.88 प्रतिशत
राजनांदगांव - 74 प्रतिशत
पंडरिया - 71.06 प्रतिशत
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मतदान किया पर स्याही नहीं लगवाई
सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़
- फोटो : अमर उजाला
बीजापुर में नक्सली दहशत के बीच बस्तर के ग्रामीण मतदान केद्रों में जमकर मतदान किया। लोकतंत्र के त्योहार के बीच चर्चा है कि जिले के भैरमगढ़ ब्लॉक के संवेदनशील गांव चिहका पोलिंग बूथ पर मतदान करने आये ग्रामीणों ने बिना स्याही लगवाए ही मतदान किया। नक्सली फरमान और भय की वजह से ग्रामीणों ने वोटिंग के बाद उंगलियों पर अमिट स्याही नहीं लगवाई पर उन्होंने वोटिंग में भाग लिया। नक्सली बॉयकाट के बाद भी नक्सल प्रभावित इलाकों में ग्रामीण अपने अपने साधनों से पहुंचे। कई लोग सात-आठ किलोमीटर चलकर वोट डालने आए।
इन मुद्दों पर हुई वोटिंग
पहले फेज के इस चुनाव में स्थानीय मुद्दे हावी रहे। नक्सलवाद, बेरोजगारी, वनोपज, स्टील प्लांट की स्थापना, उसके निजीकरण का विरोध, तेंदूपत्ता संग्रहण, चरण पादुका का वितरण जैसे मुद्दों पर वोटिंग होती दिखी। बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने ही अपने चुनावी घोषणा पत्रों में इन मुद्दों को प्रमुखता से शामिल किया है।
इन क्षेत्रों के वोटिंग पैटर्न पर नजर रखने वाले वरिष्ठ टीवी पत्रकार बरुण सखाजी बताते हैं कि इन इलाकों के मुद्दे, छत्तीसगढ़ के बाकी मुद्दों से अलग हैं। इस बात को भांप पाना कठिन है कि किसके पक्ष में मतदान हुआ है। लेकिन जैसा कि ट्रेंड देखकर समझ में आया कि चुनाव किसी एक के पक्ष में एकतरफा नहीं है।
इन मुद्दों पर हुई वोटिंग
पहले फेज के इस चुनाव में स्थानीय मुद्दे हावी रहे। नक्सलवाद, बेरोजगारी, वनोपज, स्टील प्लांट की स्थापना, उसके निजीकरण का विरोध, तेंदूपत्ता संग्रहण, चरण पादुका का वितरण जैसे मुद्दों पर वोटिंग होती दिखी। बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने ही अपने चुनावी घोषणा पत्रों में इन मुद्दों को प्रमुखता से शामिल किया है।
इन क्षेत्रों के वोटिंग पैटर्न पर नजर रखने वाले वरिष्ठ टीवी पत्रकार बरुण सखाजी बताते हैं कि इन इलाकों के मुद्दे, छत्तीसगढ़ के बाकी मुद्दों से अलग हैं। इस बात को भांप पाना कठिन है कि किसके पक्ष में मतदान हुआ है। लेकिन जैसा कि ट्रेंड देखकर समझ में आया कि चुनाव किसी एक के पक्ष में एकतरफा नहीं है।
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बढ़ा वोट प्रतिशत, बीजेपी-कांग्रेस दोनों खुश
रमन सिंह-भूपेश बघेल
- फोटो : Facebook
पहले फेज के चुनावों में वोट प्रतिशत बढ़ने से दोनों पार्टियां खुश नजर आईं। बीजेपी को यह बढ़ा वोट प्रतिशत सत्ता की लहर जैसा लगा तो कांग्रेस ने इसे अपनी जीत की तरह देखा। दोनों ही पार्टियां इन बीस सीटों में अधिक से अधिक सीटें जीतने की बात कहती दिखीं।
अभी कांग्रेस का है दबदबा
20 सीटों में सबसे महत्वपूर्ण सीटें बस्तर संभाग की है, जहां से कुल 90 सीटों में से 12 सीटें आती हैं। आदिवासी बाहुल्य बस्तर संभाग में कुल सात जिले आते हैं। सात जिलों के संभाग में यहां छत्तीसगढ़ की 12 विधानसभा और एक लोकसभा सीट है। बस्तर संभाग की 12 विधानसभा सीटों में 11 विधानसभा सीटें अनुसूचित जनजाति (एसटी) और एक सीट सामान्य है। इनमें बस्तर, कांकेर, चित्रकोट, दंतेवाड़ा, बीजापुर, कोंटा, केशकाल, कोंडागांव, नारायणपुर, अंतागढ़, भानुप्रतापपुर की सीटें एसटी के लिए आरक्षित हैं। वहीं जगदलपुर विधानसभा सीट सामान्य है। वर्तमान में 12 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है। आज जिन 20 सीटों पर वोटिंग हुई है 2018 के चुनाव में कांग्रेस के पास 17 सीटें आईं थीं। दो सीटें बीजेपी और एक सीट अजीत जोगी की पार्टी ने जीती थी।
सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़
छत्तीसगढ़ में पहले चरण के लिए हुए मतदन के बीच प्रदेश के कई जगहों में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई है। सुकमा में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ में सीआरपीएफ के कई जवानों के घायल होने की खबर है।वहीं बीजापुर में तीन नक्सलिययों के मारे जाने की खबर है। पहले चरण के लिए हुए मतदन के बीच सुकमा के ताड़मेटला और दुलेड में सीआरपीएफ और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई। कोबरा 206 के जवानों के साथ नक्सलियों की मुठभेड़ हुई। मीनपा में पोलिंग पार्टी को सुरक्षा देने के लिए जंगलों में जवान तैनात थे।
अभी कांग्रेस का है दबदबा
20 सीटों में सबसे महत्वपूर्ण सीटें बस्तर संभाग की है, जहां से कुल 90 सीटों में से 12 सीटें आती हैं। आदिवासी बाहुल्य बस्तर संभाग में कुल सात जिले आते हैं। सात जिलों के संभाग में यहां छत्तीसगढ़ की 12 विधानसभा और एक लोकसभा सीट है। बस्तर संभाग की 12 विधानसभा सीटों में 11 विधानसभा सीटें अनुसूचित जनजाति (एसटी) और एक सीट सामान्य है। इनमें बस्तर, कांकेर, चित्रकोट, दंतेवाड़ा, बीजापुर, कोंटा, केशकाल, कोंडागांव, नारायणपुर, अंतागढ़, भानुप्रतापपुर की सीटें एसटी के लिए आरक्षित हैं। वहीं जगदलपुर विधानसभा सीट सामान्य है। वर्तमान में 12 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है। आज जिन 20 सीटों पर वोटिंग हुई है 2018 के चुनाव में कांग्रेस के पास 17 सीटें आईं थीं। दो सीटें बीजेपी और एक सीट अजीत जोगी की पार्टी ने जीती थी।
सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़
छत्तीसगढ़ में पहले चरण के लिए हुए मतदन के बीच प्रदेश के कई जगहों में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई है। सुकमा में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ में सीआरपीएफ के कई जवानों के घायल होने की खबर है।वहीं बीजापुर में तीन नक्सलिययों के मारे जाने की खबर है। पहले चरण के लिए हुए मतदन के बीच सुकमा के ताड़मेटला और दुलेड में सीआरपीएफ और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई। कोबरा 206 के जवानों के साथ नक्सलियों की मुठभेड़ हुई। मीनपा में पोलिंग पार्टी को सुरक्षा देने के लिए जंगलों में जवान तैनात थे।