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बिलासपुर: पूर्व सलवा जुडूम कर्मियों की सेवा शर्तों की अनदेखी पर हाईकोर्ट सख्त, राज्य सरकार को नोटिस जारी

Tue, 20 Oct 2026 11:34 AM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिलासपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिलासपुर Published by: प्रिया वर्मा Updated Tue, 20 Oct 2026 11:34 AM IST
सार

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने आर्म्ड पुलिस फोर्स में शामिल पूर्व सलवा जुडूम कर्मियों की सेवा शर्तों और कथित भेदभाव से जुड़ी याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने सरकार से जवाब मांगा है, मामले में अंतिम निर्णय होना बाकी है।

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Bilaspur: High Court Seeks State Reply on Service Rights and Alleged Discrimination Against Former Salwa Judum
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने पूर्व सलवा जुडूम पुलिसकर्मियों की सेवा शर्तों की अनदेखी और उनके साथ हो रहे कथित भेदभाव के मामले में सख्त रुख अपनाया है। उच्च न्यायालय ने इस संबंध में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने सरकार को छह सप्ताह के भीतर अपना स्पष्ट जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। याचिका में छत्तीसगढ़ आर्म्ड पुलिस फोर्स में शामिल किए गए जवानों ने अपने सेवा संबंधी अधिकारों, पात्रताओं और समानता के अधिकार की लंबे समय से हो रही उपेक्षा का गंभीर आरोप लगाया है।

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समानता के अधिकार का उल्लंघन
याचिकाकर्ता जवानों की ओर से अधिवक्ता फतेश कुमार साहू और अधिवक्ता विद्याभूषण सोनी ने संयुक्त रूप से उच्च न्यायालय में पैरवी की। उन्होंने अदालत के समक्ष भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 16 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का विषय प्रमुखता से उठाया। वकीलों ने तर्क दिया कि सार्वजनिक रोजगार में अवसर की समानता और कानून के समक्ष समानता के सांविधानिक अधिकारों से जवानों को वंचित रखा जा रहा है। लंबी सेवा अवधि के बावजूद इन जवानों के साथ लगातार भेदभाव किया जा रहा है, जिससे उनके न्यायसंगत सेवा हित बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।
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सेवा अधिकारों पर न्यायसंगत विचार
जवानों ने अपनी याचिका के माध्यम से उच्च न्यायालय से गुहार लगाई है कि उनकी सेवा शर्तों और पात्रताओं पर न्यायसंगत तरीके से विचार किया जाए। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि लंबे समय से चले आ रहे इस कथित भेदभाव का उचित समाधान निकालना अत्यंत आवश्यक है। छत्तीसगढ़ आर्म्ड पुलिस फोर्स में शामिल किए गए इन कर्मियों ने अपने सेवा संबंधी अधिकारों और पात्रताओं को सुरक्षित करने का आग्रह किया है। उच्च न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के उपरांत राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। सरकार की ओर से जवाब प्रस्तुत किए जाने के बाद इस मामले में अगली सुनवाई की जाएगी।


जानिए सलवा जुडूम अभियान की पृष्ठभूमि
सलवा जुडूम वर्ष 2005 के आसपास बस्तर क्षेत्र में शुरू हुआ प्रमुख नक्सल विरोधी अभियान था। इस अभियान से जुड़े कई स्थानीय युवाओं को शुरुआत में विशेष पुलिस अधिकारी यानी एसपीओ के रूप में नियुक्त किया गया था। वर्ष 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने एसपीओ के सशस्त्र नक्सल विरोधी अभियानों में इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। 

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद सलवा जुडूम से जुड़े कुछ कर्मियों को छत्तीसगढ़ आर्म्ड पुलिस फोर्स में शामिल किया गया था। इस प्रकार इन जवानों की लंबे समय से जारी सेवाओं को देखते हुए अब उच्च न्यायालय इस पूरे विषय की समीक्षा कर रहा है।

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