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Bijapur: 400 बच्चों के लिए तीन बाथरूम, चिन्नाकोडपाल पोटाकेबिन के बच्चे और स्टाफ नित्य कर्म के लिये जा रहे जंग
Wed, 25 Dec 2024 05:56 PM IST
Digvijay Singh
अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर
अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर
Published by: Digvijay Singh
Updated Wed, 25 Dec 2024 05:56 PM IST
सार
बीजापुर में जिला मुख्यालय से लगे चिन्नाकोडेपाल स्थित बालक रेसिडेंशियल स्कूल में बंद पड़े शौचालयों ने यहां पढ़ने वाले 400 से ज्यादा बच्चों की मुश्किलें बढ़ा दी है।
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400 बच्चों के लिए तीन बाथरूम
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बीजापुर में जिला मुख्यालय से लगे चिन्नाकोडेपाल स्थित बालक रेसिडेंशियल स्कूल में बंद पड़े शौचालयों ने यहां पढ़ने वाले 400 से ज्यादा बच्चों की मुश्किलें बढ़ा दी है। बच्चो की दर्ज संख्या के अनुपात में शौचालयों की संख्या पहले से कम थी, अब इसमें भी 80 फीसदी से ज्यादा टायलेट उपयोग हीन हो जाने से बच्चों के साथ रह रहे स्टाफ भी परेशान है। संस्था में 400 से ज्यादा बच्चे दर्ज है और इनके लिए 24 टायलेट ही बने हुए थे और इसमें भी केवल 3 टायलेट चालू है।
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ऐसे में बच्चो के साथ उनकी देखभाल के लिए नियुक्त अनुदेशक, चपरासी तक नित्य कर्म के लिए जंगल जा रहे है। चूंकि विद्यालय में कक्षा पहली से लेकर आठवी तक बच्चे पढ़ रहे है। ऐसे में नित्य कर्म के लिए जंगल आना जाना छोटे छोटे बच्चों के लिए जोखिम से कम नहीं है। इतना ही नहीं संस्था में बच्चो के स्नानागार से लेकर स्मार्ट क्लास की भी दुर्गति हो चली है। सभा कक्ष में लगा प्रोजेक्टर काफी समय से बंद पड़ा है। बच्चे खुले में नहाते और कपड़े धोते है, तो वही बच्चों के शयन कक्ष में लगे अग्निशमक यंत्र भी एक्सपायर हो चुके है। जबकि डेढ़ साल पहले आगजनी की एक घटना में एक बच्ची की मौत हो गई थी और पूरा स्कूल जलकर खाक हो गया था।
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बता दे कि यह रेसिडेंशियल स्कूल राजीव गांधी शिक्षा मिशन अंतर्गत संचालित है। साल 2005 में सलवा जुडूम के दौरान नक्सलियों द्वारा जब स्कूल आश्रमों को निशाना बनाया गया था तब से अंदरूनी इलाको के बच्चों को आवासीय व्यवस्था में शिक्षा के उद्देश्य से इन स्कूलों की नींव रखी गई थी। फिलहाल ये स्कूल कही बांस तो कही पक्के स्ट्रक्चर पर तैयार है। ऐसे 28 आवासीय विद्यालय बीजापुर जिले में संचालित है।
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