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Bijapur: डीएमएफ फंड रुकने से वेतन के पड़े लाले, दो डॉक्टरों ने छोड़ी नौकरी, विकास कार्यों की रफ्तार धीमी

Fri, 27 Dec 2024 01:42 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर
अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर Published by: Digvijay Singh Updated Fri, 27 Dec 2024 01:42 PM IST
सार

बीजापुर जिले में डीएमएफ फंड रुक गया है जिसके चलते कई कामकाज में रोड़ा आ गया है। फंड के आभाव में निर्माण सहित कई कार्यों कि रफ्तार थम गई है।

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Due to stoppage of DMF funds there is a shortage of salary two doctors left their jobs in Bijapur
डीएमएफ फंड रुकने से वेतन के पड़े लाले - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बीजापुर जिले में डीएमएफ फंड रुक गया है जिसके चलते कई कामकाज में रोड़ा आ गया है। फंड के आभाव में निर्माण सहित कई कार्यों कि रफ्तार थम गई है। राज्य में डीएमएफ फंड में घोटालो कि खबरे सामने आने के बाद इस वक्त वर्तमान सरकार इस पर शख्ती से काम कर रही हैं। छत्तीसगढ़ के कई जिलों में फंड देना बंद कर दिया हैं। बीजापुर जिले कि हालत बहुत ही बुरी है। 

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डीएमएफ से चलने वाले कार्य थम गए हैं। इस मद से सैंकड़ो कर्मचारी शासकीय विभागों में कार्यरत हैं। उनके वेतन के लाले पड़े हुए हैं। पिछले कुछ महीनों से राज्य में चल रही खींचतान के बाद फंड का रोड़ा बना हुआ हैं। बता दे कि केंद्र सरकार ने 2015 में प्रधानमंत्री खदान क्षेत्र कल्याण योजना के कानूनी प्रावधानों के तहत जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) का कानून बनाया था। इसके तहत प्रदेश से निकलने वाले गौण खनिज की रॉयल्टी के अनुपात में एक निश्चित रकम डीएमएफ में जमा होती है। इसका ख़र्च जिले में जरुरत के हिसाब से किया जाता हैं। कलेक्टरों की अध्यक्षता में कमेटियों का गठन किया था। साल 2018 में कांग्रेस सरकार आने के बाद इस व्यवस्था को बदल दिया गया था कुछ महीनों से खबरे यहाँ आ रही थी कि डीएमएफ फंड में बड़ा घोटाला हुआ हैं इस मद का दुरूपयोग करते हुए कई करोड़ अन्दर किए हैं इसकी उच्च स्तरीय जाँच चल रही हैं।
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स्वास्थ्य विभाग का महाना 48 लाख का होता हैं भुगतान
डीएमएफ मद से स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों का महाना मोटा रकम देना पड़ता हैं स्वास्थ्य विभाग के 155 कर्मचारियों का 48 लाख रुपए का भुगतान हर महा किया जाता हैं बीजापुर में 90 भोपालपटनम में 17 भैरमगढ़ में 25 उसूर में 23 कर्मचारी कार्यरत हैं ।आलम यह हैं कि नक्सल प्रभावित जिले में डीएमएफ मद से नियुक्त कर्मचारियों को चार माह से वेतन नहीं मिल रहा हैं क्युकी जिले में फंड कि कमी हैं इसमें सबसे ज्यादा स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी हैं डॉक्टर सहित स्टॉफ नर्स तृतीय, चतुर्थ वर्ग कर कर्मचारी शामिल हैं ।इसके साथ ही अन्य विभागों में कार्य कर रहे कर्मचारियों को वेतन नहीं दिया जा रहा हैं।
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निर्माण सहित कई कार्यों पर थम गई रफ्तार
सत्ता परिवर्तन के बाद जिले में डीएमएफ फंड नहीं होने से सम्पूर्ण जिले में चल रहे निर्माण सहित अन्य कार्य थम गए हैं विकास कि गति थम सी गई हैं। ऐसा ही रहा तो जिले कि आर्थिक स्तिथि ख़राब होंगी इससे जुड़े कई लोगो पर इसका प्रभाव पड़ेगा।

बारह हजार कि सैलरी वाले शिक्षदूतों की मुस्किलें बड़ीं
जिले के दूर नक्सल प्रभावित इलाकों में यहां आज भी कई स्कूल झोपड़ीयों में संचालित हो रहे हैं तो कई स्कूलों में झोपडी भी नहीं है। आधे से अधिक स्कूलों में नियमित शिक्षकों की पोस्टिंग तक नहीं की गई है। गांव के बारहवी पास युवाओं को शिक्षा दूतों के भरोसे कई कक्षाएं संचालित की जा रही है। लेकिन उन्हें समय पर वेतन नहीं दिया जा रहा हैं। कई महीनों से इनकी सैलरी लड़की हुई हैं। डीएमएफ फंड कि कमी के चलाते शिक्षादूत भी परेशान है।

दो डॉक्टरो नें छोड़ी नौकरी
वेतन नहीं मिलने से परेशान जिला अस्पताल के अब तक दो डॉक्टरो नें नौकरी छोड डी हैं इसमें सचिन पापडे स्त्री रोग विशेषज्ञ, आरुषि शर्मा जनरल मेडिसीन शामिल हैं। और डॉक्टरों ने वेतन नही मिलने से नाराज कलेक्टर ज्ञापन दिया एक माह के अंदर वेतन नही मिलने से नौकरी से रिजाइन देने की बात कह रहे है। दो डॉक्टर हर माह में बराबर सौलरी नहीं मिलने से अपना रिजाइन लेटर थमाकार चले गए हैं।


प्रेम कुमार आईल जिला अध्यक्ष डीएमएफ संघ
ने बताया कि पिछले कई महीने से वेतन बराबर नही मिल रहा है, इसकी शिकायत हमने स्वास्थ्य मंत्री को भी की है, उस समय एक महा का वेतन डाला था। लेकिन पिछले चार माह से वेतन नही मिल रहा है। कलेक्टर और सीएमएचओ को भी आवेदन दिया गया। लेकिन वे फंड नही होने की बात कह रहे है।

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