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भूपेश बघेल ने कहा- बंदूक से नहीं बातचीत से निकलेगा माओवाद का समाधान
Thu, 20 Dec 2018 10:57 AM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
Published by: Sneha Baluni
Updated Thu, 20 Dec 2018 10:57 AM IST
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भूपेश बघेल
- फोटो : Facebook
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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का कहना है कि उनकी सरकार एनकाउंटर की संख्या और नक्सलियों के शवों को गिनने में कोई रुचि नहीं रखती है। बल्कि वह सभी हितधारकों के साथ बातचीत की शुरुआत करना चाहती है, जिसमें प्रभावित आदिवासी जनसंख्या भी शामिल है। इसके जरिए पिछले तीन दशकों से जारी माओवादी विद्रोह का एक समाधान निकाला जा सके।
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बघेल ने कहा, 'कांग्रेस ने 2013 में हुए माओवादी हमले में अपने अग्रपंक्ति के नेताओं को खो दिया था। बहुत से निर्दोष जवान, स्थानीय आदिवासी और पत्रकारों ने सालों से चले आ रहे माओवादी विद्रोह के कारण अपनी जान गंवाई है। यदि यह समस्या बंदूक चमकाने से सुलझ जाती तो इसका समाधान 15 सालों के रमन सिंह सरकार के शासन के दौरान निकल जाता। बंदूक के बदले बंदूक की नीति बुरी तरह विफल हुई है और यह समय इस मुद्दे को एक नया विचार देने का है।'
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मुठभेड़ की गति और मानवाधिकार के उल्लंघन की शिकायतों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मानना एक गलती हो सकती है कि ज्यादा से ज्यादा जवानों की तैनाती, मुठभेड़ को तेज करना और शवों की गिनती करना विद्रोही समस्या के सफलतापूर्वक संकेत हैं। उन्होंने कहा, 'इसके बजाए मैं उन लोगों के साथ मिलकर समाधान ढूंढने की कोशिश करुंगा जो प्रभावित हैं। मैं शवों की गिनती का रिकॉर्ड नहीं करना चाहती हूं।'
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भूपेश बघेल का मानना है कि नक्सली एक सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक मामला है। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि प्रभावित लोगों से बातचीत शुरू करने की जरुरत है। खासतौर से बस्तर और दूसरे हितधारकों से ताकि क्षेत्र में फैली हिंसा का खात्मा किया जा सके। समाज के हर वर्ग, आदिवासी, बुद्धिजीवियों, स्थानीय व्यवसायी, अधिकार कार्यकर्ताओं और प्रभावित क्षेत्रों में तैनात जवानों से बात करनी होगी।' उन्होंने आगे कहा कि उनका विचार जानने की बहुत जरूरत है क्योंकि वह सीधे तौर पर पीड़ित हैं और परिस्थिति में फंसे हुए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा, 'बस्तर का असल चरित्र संवतंत्रतापूर्क रहना है और उसके लोग उसके लोग प्रकृति की गोद में बिना किसी परेशानी के रहना चाहते हैं। लेकिन यहां अब परिस्थिति पूरी तरह से बदल गई है और स्थानीय लोगों के दिमाग में डर पैदा हो गया है।' उन्होंने कहा, 'सरकार की कोशिश होगी कि वह लोगों की मूलभूत आवश्यकताओं का समाधान निकाले और सरकार के प्रति उनमें विश्वास को दोबारा पैदा करे।'