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कैसे हुई छत्तीसगढ़ में एक भालू की मौत?
आलोक प्रकाश पुतुल/रायपुर से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
Updated Sat, 08 Feb 2014 03:10 PM IST
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छत्तीसगढ़ के कांकेर ज़िले में सीमा सुरक्षा बल (बीएसफ) के जवानों ने एक मादा भालू को मार दिया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सीमा सुरक्षा बल के जवानों ने पहले भालू के बच्चे को मार कर फेंक दिया, उसके बाद उन्होंने मादा भालू को मार दिया है।
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दूसरी ओर ज़िले के पुलिस अधीक्षक राजेंद्र नारायण दास का कहना है कि आरंभिक जानकारी में बीएसफ के जवानों द्वारा अपने बचाव में गोली चलाकर एक भालू को मारने की बात सामने आई है।
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राजेंद्र दास के अनुसार, ''पुलिस बल भालू की मौत के मामले में पूरा सहयोग कर रहा है। हमने वन विभाग को इसकी जानकारी दे दी है। वह इस मामले को देखेगा ही, पुलिस भी इस पूरे मामले की जांच करेगी कि भालू किन परिस्थितियों में मारे गये।''
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इस मामले में वन विभाग के अधिकारी पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट आने के बाद ही कोई टिप्पणी करने की बात कह रहे हैं। हालांकि इलाके के वन संरक्षक अरुण पांडेय ने स्वीकार किया कि ''इस भालू के बच्चे की मौत को प्राकृतिक नहीं कहा जा सकता।''
भालू की प्रजाति को भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची एक में रखा गया है। इस अनुसूची में बाघ समेत ऐसे जानवरों को रखा गया है, जिनकी प्रजाति ख़तरे में है।
संकट
इसी साल 2 जनवरी को राज्य के बिलासपुर ज़िले में भी एक भालू को पुलिस के जवानों ने मार दिया था। इलाके के एसडीएम ने जंगल के भीतर जाकर बिना किसी अनुमति के खुद ही भालू को मारने का आदेश दे दिया था।
पुलिस द्वारा भालू को मारने पर जब आलोचना हुई तो राज्य सरकार ने इस मामले की जांच की बात कह कर मामले को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
पखवाड़े भर बाद इसी ज़िले के एक चिड़ियाघर में 22 चीतलों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। पहले तो एंथ्रेक्स से चीतलों की मौत बताकर उनके शवों का पोस्टमार्टम नहीं किया गया और इन चीतलों को इस तरह रासायनिक पदार्थ डाल कर दफना दिया गया कि उनकी मौत के सारे सबूत नष्ट हो गये।
इसके बाद वन विभाग ने इन चीतलों की मौत की ज़िम्मेदारी तय करने के बजाये पूरे मामले से पल्ला झाड़ लिया।
इस सप्ताह शुरू हुये राज्य विधानसभा सत्र में दो दिन इन चीतलों की मौत को लेकर भारी हंगामा हुआ। यहां तक कि विपक्ष ने सदन का बहिष्कार भी कर दिया।
अब कांकेर में दो भालु्यों की मौत का ताज़ा मामला सामने आने के बाद एक बार फिर से राज्य में वन्यजीवों की स्थितियों को लेकर बहस शुरू हो सकती है।
सवाल
इस बारे में कांकेर के वन संरक्षक अरुण पांडे का कहना है कि शुक्रवार को कांकेर के कोरर इलाके में भालू के एक छोटे बच्चे की मौत की खबर मिली थी।
उसके आसपास मादा भालू मंडरा रही थी। इसके बाद वन विभाग का अमला भालू के बच्चे का शव पोस्टमार्टम के लिये लेकर आ गया।
अरुण पांडेय का दावा है, ''बीएसएफ के जवान जब सर्चिंग के लिये जा रहे थे, उसी समय मादा भालू ने उन पर हमला कर दिया, जिसके बाद साथी जवान ने गोली मार कर मादा भालू की हत्या कर दी।''
भालू के बच्चे की मौत कैसे हुई, इस सवाल के जवाब में वन संरक्षक का कहना था कि इस बारे में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
अरुण पांडेय के अनुसार, ''भालू का बच्चा छोटा है और इस भालू के बच्चे की मौत को प्राकृतिक नहीं कहा जा सकता। लेकिन जब तक पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक इस बारे में कुछ भी कहना उचित नहीं होगा।''
मध्य-भारत में वन्यजीव संरक्षण को लेकर काम करने वाली 'कंजर्वेशन कोर सोसायटी' की सचिव मीतू गुप्ता का कहना है कि राज्य में वन्य जीवों की मौत को गंभीरता से लेने की ज़रूरत है।
मीतू कहती हैं, ''वन विभाग को इस तरह के मामलों की स्वतंत्र तौर से जांच करानी चाहिये। इन मामलों में जब तक ज़िम्मेदारी तय नहीं होगी, इन पर क़ाबू पाना संभव नहीं है।''