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Balod: बुझ पाए वन्य प्राणियों की प्यास, वन विभाग की पहल, जंगल में बनाए जा रहे झिरिया

Sun, 26 May 2024 05:21 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, बालोद
अमर उजाला नेटवर्क, बालोद Published by: Digvijay Singh Updated Sun, 26 May 2024 05:21 PM IST
सार

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में वन मंडल अंतर्गत वन्य प्राणियों को भीषण गर्मी में पानी के लिए भटकना न पड़े और वह भटक कर गांव की ओर प्रवेश न करें इसके लिए जंगलों के बीच में छोटे-छोटे गड्ढे जिसे झिरिया कहा जाता है वह बनाया जा रहा है।  

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thirst of wild animals can be quenched initiative of Forest Department in Balod
जंगल में बनाए जा रहे झिरिया - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छत्तीसगढ़ के बदले जिले में जिले के वन मंडल अंतर्गत वन्य प्राणियों को भीषण गर्मी में पानी के लिए भटकना न पड़े और वह भटक कर गांव की ओर प्रवेश न करें इसके लिए जंगलों के बीच में छोटे-छोटे गड्ढे जिसे झिरिया कहा जाता है वह बनाया जा रहा है यहां पर टैंकर के माध्यम से वहां पर पानी भी भरे जा रहे हैं उपवन मंडल अधिकारी डिंपी बहस नहीं जानकारी देते हुए बताया कि वन्य प्राणियों की सुरक्षा एवं संरक्षण भीषण गर्मी को देखते हुए यह प्रयास किया जा रहा है।

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जानिए कितने झिरिया बनाए गए

उप वन मंडल अधिकारी डिंपी बैस ने बताया कि बिगड़े वनों के सुधार के अंतर्गत वन्यप्राणियो के लिए झिरिया बनाया गया जिसमे बालोद परिक्षेत्र में बालोद सर्कल बरही, कन्नेवाडा क्षेत्र में कुल 21 झिरिया गुरूर परिक्षेत्र में पुरूर, गुरूर, बढ़भूम सर्कल (ओनाकोना, सोहतरा, मंगचुवा, बढ़भूम) में कुल झिरिया 24 का निर्माण किया गया यह वो जगह हैं जहां पर पानी की सबसे ज्यादा किल्लत है अब जानवरों को राहत मिलने लगी है।

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प्लास्टिक शीट बिछाकर बना रहे झिरिया

वन विभाग की माने तो वन्यप्राणि हेतु बनाए गए इस झिरिया में वृत्ताकार/चौकोर/आयताकार में मिट्टी हटाकर प्लास्टिक की शीट बिछाई जाती है, और उसके बाहरी क्षेत्र को मिट्टी से ढक दिया जाता है। उसमे साफ पानी टैंकर से डाला गया है ताकि पानी भूमि में रिस मत जाए वहीं बराबर रोजाना इन गड्ढों में ट्रैक्टर टैंकर के माध्यम से पानी डाला जा रहा है।

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जानवरों को मिलने लगा पानी

आपको बता दें कि बालोद वन परिक्षेत्र में नीलगाय, खरगोश, सियार, चीतल, जंगली सुवर, लकड़बग्घा, भालू और पक्षी आदि पाए जाते हैं वन  विभाग के इस प्रयास से इन जानवरों को अब राहत मिलने लगी है रिपोर्ट के अनुसार भीषण गर्मी में जानवरों को भटकना पड़ता था जिससे अब राहत मिलने लगी है ग्रामीण क्षेत्रों में भी पानी की आवश्यकता के लिए आने लगते हैं।


 
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