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बालोद का ‘मास्क वाला स्कूल’: बच्चे पढ़ाई के लिए झेल रहे धुआं, राख और बदबू, राइस मिल की राख से जूझ रहे छात्र

Mon, 01 Dec 2025 03:40 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, बालोद
अमर उजाला नेटवर्क, बालोद Published by: Digvijay Singh Updated Mon, 01 Dec 2025 03:40 PM IST
सार

शिक्षा जीवन की नींव होती है, लेकिन जब यही शिक्षा बच्चों की सेहत के लिए खतरा बन जाए, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। बालोद जिले के नगर पंचायत पलारी में संचालित एक शासकीय विद्यालय के बच्चों के सामने ऐसी ही स्थिति पैदा हो गई है।

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Balod Mask School Students face smoke ash and stench to study battling rice mill ash
बालोद का ‘मास्क वाला स्कूल’ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शिक्षा जीवन की नींव होती है, लेकिन जब यही शिक्षा बच्चों की सेहत के लिए खतरा बन जाए, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। बालोद जिले के नगर पंचायत पलारी में संचालित एक शासकीय विद्यालय के बच्चों के सामने ऐसी ही स्थिति पैदा हो गई है। यहां बच्चों के लिए अब मास्क पहनना अनिवार्य नहीं, बल्कि मजबूरी बन गया है।विद्यालय के ठीक बगल में संचालित एक राइस मिल से निकलने वाला धुआं और राख बच्चों की सांसों में जहर घोल रहा है। कई बार शिकायतें किए जाने के बावजूद समाधान अभी तक नहीं निकला है। जिला प्रशासन के पास मामला बार-बार पहुंचा, लेकिन कार्रवाई के नाम पर जांच और चेतावनी तक ही बात सिमटकर रह गई है।

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बच्चों के फेफड़े जल रहे, पढ़ाई पर असर
स्कूल के छात्र-छात्राओं का कहना है कि बिना मास्क के कक्षा में बैठना लगभग असंभव हो गया है। राख और धुंए के कारण आंखों में जलन, उल्टियां और गले में दर्द आम बात हो गई है।छात्रा करीना बघेल बताती हैं कि राइस मिल से उड़ने वाला काला राखड़ आंखों में जम जाता है, खुजली होती है, गले में जकड़न रहती है। कई बार उल्टियां भी हो जाती हैं। हम चाहते हैं कि स्कूल यहीं रहे लेकिन राइस मिल को हटाया जाए।
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वहीं छात्रा देविका साहू ने कहा, राख और बदबू के बीच पढ़ाई करना अब असंभव हो गया है। हम अपने स्वास्थ्य के साथ कब तक खिलवाड़ करें? सरकार हमारी सुध ले।

प्रधान पाठिका पुष्पलता साहू ने बताया कि राइस मिल की दिशा में बने कक्षों में बदबू और धुआं इतना बढ़ गया कि उन्हें बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए उन कमरों को बदलना पड़ा। उन्होंने कहा, हमने एहतियात के तौर पर सभी बच्चों को मास्क लगाकर आने के निर्देश दिए हैं, लेकिन यह भी पर्याप्त नहीं है। कई बार बच्चों और शिक्षकों को अस्पताल ले जाना पड़ा है। राइस मिल से फैल रही राख पूरे परिसर में जमा रहती है।
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शिकायतें हुईं, समाधान नहीं
स्कूल के आसपास के ग्रामीण भी पिछले दो साल से इस समस्या से जूझ रहे हैं। गांव के लोगों ने शिकायतें जिला प्रशासन, पर्यावरण विभाग और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाईं, लेकिन कार्रवाई अधूरी रह गई। यहां तक कि मामला विधानसभा तक पहुंचा, पर राइस मिल बंद नहीं हुई।मिली जानकारी के अनुसार, राइस मिल के निर्माण के समय से ही यह मामला विवादों में था। आसपास के लोगों का कहना है कि मिल का संचालन नियमों के विपरीत हो रहा है और प्रशासन इस पर आंखें मूंदे हुए है।


कलेक्टर दिव्या मिश्रा ने बताया कि मामले को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों की टीम को मौके पर जांच के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि  यदि राइस मिल के संचालन में नॉर्म्स का उल्लंघन पाया गया, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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