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मनरेगा कार्यस्थल पर हादसा: आकाशीय बिजली ने ली महिला मजदूर की जान, 5 घायल, जिम्मेदारों की लापरवाही पर उठे सवाल
Wed, 03 Jun 2026 10:35 AM IST
Vijay Singh Pundir
अमर उजाला नेटवर्क, भरतपुर
अमर उजाला नेटवर्क, भरतपुर
Published by: Vijay Singh Pundir
Updated Wed, 03 Jun 2026 10:35 AM IST
सार
ग्रामवासी सुभान सिंह ने बताया कि पंचायत के माध्यम से मनरेगा का कार्य चल रहा था और बड़ी संख्या में महिलाएं बोल्डर चेक डैम निर्माण में लगी हुई थीं। अचानक बिजली गिरने से एक महिला की मौत हो गई और पांच अन्य घायल हो गईं।
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मनरेगा कार्यस्थल पर हादसा
- फोटो : IANS
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विस्तार
मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के भरतपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम चरखर में मंगलवार को एक दर्दनाक हादसा हुआ। मनरेगा के तहत चल रहे बोल्डर चेक डैम निर्माण कार्य के दौरान आकाशीय बिजली गिरने से एक महिला मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पांच अन्य महिलाएं गंभीर रूप से झुलस गईं। घायलों का उपचार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जनकपुर में जारी है, जहां दो महिलाओं की हालत चिंताजनक बताई जा रही है।
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प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार्यस्थल पर लगभग 58 मजदूर मौजूद थे। अचानक मौसम बिगड़ा, आसमान में तेज गर्जना होने लगी और हल्की बारिश शुरू हो गई। मजदूर सुरक्षित स्थान की ओर जाने की तैयारी कर ही रहे थे कि तभी तेज चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरी और छह महिलाएं उसकी चपेट में आ गईं। जिनमें से एक की मौत हो गई। हादसे के बाद पूरे गांव में मातम का माहौल है।
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ग्रामवासी सुभान सिंह ने बताया कि पंचायत के माध्यम से मनरेगा का कार्य चल रहा था और बड़ी संख्या में महिलाएं बोल्डर चेक डैम निर्माण में लगी हुई थीं। अचानक बिजली गिरने से एक महिला की मौत हो गई और पांच अन्य घायल हो गईं। स्थानीय निवासी अमित केवट ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि हादसे की सूचना पूरे क्षेत्र में फैल चुकी थी, लेकिन काफी देर तक जनपद या प्रशासन का कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। इससे लोगों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा संबंधी निर्देश दिए गए होते तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था।
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घायल मजदूर रामकली ने बताया कि बारिश की बूंदाबांदी हो रही थी और मजदूर कार्यस्थल पर मौजूद थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि अचानक इतनी बड़ी घटना हो जाएगी। एक तेज चमक हुई और कई महिलाएं जमीन पर गिर पड़ीं। ग्राम चरखर के मेट विवेक कुमार सिंह ने भी पुष्टि की कि मौसम खराब था, आंधी चल रही थी और मजदूर कार्यस्थल पर बैठे हुए थे। इसी दौरान अचानक बिजली गिरने से छह महिलाएं इसकी चपेट में आ गईं।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जनकपुर के चिकित्सक डॉ. पवन गुप्ता ने बताया कि छह महिलाओं को अस्पताल लाया गया था, जिनमें से एक महिला को मृत घोषित कर दिया गया। पांच महिलाओं का उपचार जारी है और दो की हालत गंभीर बनी हुई है।
सवाल यह है कि जब मौसम लगातार खराब हो रहा था, तेज आंधी चल रही थी और बारिश शुरू हो चुकी थी, तब भी मजदूरों को कार्यस्थल पर क्यों रोका गया? क्या पंचायत और मनरेगा से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों ने मौसम को लेकर कोई सतर्कता बरती थी? क्या मजदूरों की सुरक्षा के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था मौजूद थी?
अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आखिर मजदूरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? मौसम विभाग लगातार आकाशीय बिजली और खराब मौसम को लेकर चेतावनी जारी करता है, इसके बावजूद क्या स्थानीय स्तर पर इन चेतावनियों को गंभीरता से नहीं लिया गया?
एक गरीब परिवार की महिला की मौत हो चुकी है, पांच अन्य महिलाएं अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रही हैं, लेकिन जिम्मेदारों की जवाबदेही अब भी तय नहीं हो सकी है। ग्रामीणों की मांग है कि मृतक परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए, घायलों का बेहतर उपचार कराया जाए और पूरे मामले की जांच कर दोषी अधिकारियों एवं जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए।