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हर कदम पर हादसे का खतरा: नीचे नदी का तेज बहाव, ऊपर स्कूल बैग; अधूरे पुल की सीढ़ी से स्कूल जाते बच्चे

Thu, 03 Sep 2026 06:21 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, गरियाबंद/रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गरियाबंद/रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Thu, 03 Sep 2026 06:21 PM IST
सार

गरियाबंद के देहारगुड़ा-खामभाठा के बीच पैरी नदी पर 5 साल से अधूरा पुल बच्चों के लिए खतरा बना है। बारिश में स्कूली बच्चे 20 फीट ऊंची संकरी सीढ़ी से आवाजाही करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने जल्द पुल पूरा कराने और सुरक्षित वैकल्पिक रास्ते की मांग की है।

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a swift river below, school bags above; children trudge to school via the stairs of an unfinished bridge
अधूरे पुल की सीढ़ी से स्कूल जाते बच्चे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड के देहारगुड़ा और खामभाठा गांव के बीच पैरी नदी पर निर्माणाधीन पुल लंबे समय से पूरा नहीं होने के कारण स्थानीय ग्रामीणों की परेशानी बढ़ती जा रही है। बारिश के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद सबसे अधिक मुश्किल स्कूली बच्चों के सामने खड़ी हो जाती है। स्कूल जाने के लिए दर्जनों बच्चे अधूरे पुल के पिलर पर लगी संकरी लोहे की सीढ़ी के सहारे करीब 20 फीट की ऊंचाई से आवागमन कर रहे हैं।
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टूटे पुल पार कर स्कूल जाते स्कूली बच्चे - फोटो : अमर उजाला
मैनपुर तहसील मुख्यालय से करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित इस क्षेत्र में प्राथमिक, मिडिल और हाईस्कूल में पढ़ने वाले कई बच्चे नदी के दूसरी ओर से स्कूल आते-जाते हैं। बारिश के दौरान सामान्य रास्ते से नदी पार करना जोखिम भरा हो जाता है। ऐसे में अधूरे पुल के ढांचे को ही बच्चों ने आवाजाही का माध्यम बना लिया है।
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हर कदम पर हादसे का खतरा - फोटो : अमर उजाला
अधूरे पुल पर लगी लोहे की सीढ़ी बारिश में फिसलन भरी हो जाती है। छोटे बच्चों के कंधों पर स्कूल बैग और नीचे नदी का बहाव उनकी मुश्किल और बढ़ा देता है। कई जगह निर्माणाधीन पुल में लोहे के सरिए भी खुले हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जरा सी असावधानी बच्चों के लिए गंभीर हादसे का कारण बन सकती है। बच्चों को इस तरह पुल के पिलर पर चढ़ते-उतरते देखकर अभिभावक भी चिंतित हैं। उनका कहना है कि पढ़ाई के लिए बच्चों को स्कूल भेजना जरूरी है, लेकिन सुरक्षित आवागमन की सुविधा नहीं होने से हर दिन अनहोनी की आशंका बनी रहती है।

 
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स्कूल जाने के लिए पुल चढ़ते बच्चे - फोटो : अमर उजाला
ग्रामीणों के मुताबिक देहारगुड़ा-खामभाठा के बीच पैरी नदी पर पुल का निर्माण करीब पांच-छह साल से चल रहा है। पुल की लंबाई लगभग 300 मीटर बताई जा रही है। लंबे समय से काम चलने के बावजूद निर्माण पूरा नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि पुल निर्माण में देरी को लेकर कई बार विभाग और प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया गया। करीब एक वर्ष पहले क्षेत्रीय विधायक जनक ध्रुव और तत्कालीन कलेक्टर भगवान सिंह उईके ने भी निर्माण स्थल का निरीक्षण किया था। इस दौरान संबंधित विभाग, निर्माण एजेंसी और ठेकेदार को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए गए थे। ग्रामीणों के अनुसार उस समय बारिश से पहले पुल का काम पूरा करने की बात कही गई थी, लेकिन निर्धारित अवधि के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
 

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पुल पार कर स्कूल जाते बच्चे - फोटो : अमर उजाला
ग्रामीणों का आरोप है कि पुल निर्माण स्थल पर कई स्थानों पर लोहे के सरिए और अन्य निर्माण सामग्री खुले में पड़ी है। बारिश के दौरान जब नदी का पानी बढ़ता है तो इन परिस्थितियों में आवागमन और अधिक खतरनाक हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य की धीमी गति के कारण समस्या लगातार लंबी खिंच रही है।

ग्राम पंचायत के सरपंच महेश दीवान, जनपद सदस्य प्रताप सिंह मरकाम, पूर्व उपसरपंच पवन दीवान, लोकेश साण्डे, लीलाधर, रामप्रसाद, सोहन नागेश, बुधराम साण्डे, हितराम, देवन सिंह नेताम, पूर्व सरपंच डिकेश्वरी साण्डे सहित ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल वैकल्पिक सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि पुल का निर्माण शीघ्र पूरा किया जाए, ताकि बच्चों सहित आम लोगों को जान जोखिम में डालकर नदी पार करने की मजबूरी से निजात मिल सके। उनका आरोप है कि लगातार मांग और शिकायत के बाद भी निर्माण की गति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।

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बच्चों के लिए सुरक्षित रास्तों की व्यवस्था नहीं - फोटो : अमर उजाला
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पुल निर्माण में तेजी लाकर समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया और बच्चों के लिए सुरक्षित रास्ते की व्यवस्था नहीं हुई, तो वे छात्र-छात्राओं एवं ग्रामीणों के साथ राष्ट्रीय राजमार्ग 130C पर आंदोलन और चक्काजाम करने के लिए मजबूर होंगे। ग्रामीणों का कहना है कि मामला केवल निर्माण कार्य में देरी का नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा है। प्रशासन को किसी दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय समय रहते आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
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