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‘ए सिटी विदाउट लव’, एक देश जहां न प्यार और न हमदर्दी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 07 Mar 2016 11:04 AM IST
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थियेटर, प्ले, ड्रामा
- फोटो : अमर उजाला
एक ऐसा देश जहां लोगों के हंसने पर पाबंदी है, कोई किसी से प्यार नहीं कर सकता और कोई किसी के प्रति हमदर्दी नहीं रख सकता। वहीं अगर इस नियम को किसी ने तोड़ा तो उसे सख्त से सख्त सजा दी जाती है।
ये कहानी दिखाई गई पंजाब कला भवन में हुए नाटक ‘ए सिटी विदाउट लव’ के मंचन में। पंजाब कला परिषद की ओर से चल रहे कार्यक्रम के तहत रविवार को रूपक कला केंद्र और वेलफेयर सोसायटी के कलाकारों ने नाटक का मंचन किया।
नाटक एक रूसी लेखक द्वारा लिखित कहानी पर आधारित है। नाटक को लेखक ने उस सदी में लिखा था जब रूस में तानाशाही थी। नाटक का निर्देशन विनोद कुमार शर्मा ने और इसका हिंदी अनुवाद किरण शर्मा ने किया।
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नाटक की कहानी रूस के एक ऐसे शहर की है, जहां सड़क, घर, दरवाजे, खिड़की, कपड़े, वाहन सब कुछ स्लेटी (ग्रे) रंग के हैं। साथ ही इस शहर के लोगों पर कई तरह की पाबंदियां हैं। जैसे कि वे किसी से प्यार नहीं कर सकते, दया या किसी से हमदर्दी जताने की मनाही है।
इसके अलावा यहां फूलों का खिलना, लोगों के हंसने और हंसाने पर सख्त पाबंदी है। यहां तक की अगर शहर के किसी कोने में कोई फूल खिल भी जाए तो उसका एक विचित्र तरीके से अंतिम संस्कार कर दिया जाता है। शहर में यह सब होता है वहां के मेयर की हुकूमत की वजह से। वह शहर के लोगों को खुद के हिसाब से ढालना चाहता है।
मेयर ने सभी शहरवासियों के दिल पर एक ऐसी मशीन लगाई है जो इंसान के भावुक होने पर बज उठती है। मशीन के बजने पर व्यक्ति को फांसी दी जाती है। वहीं मेयर की बेटी सबसे छिप-छिपकर चिड़िया से खेलती है और कई ऐसे काम करती है जिनकी मनाही है। हालांकि हंसना वह भी नहीं जानती, क्योंकि उसके पिता की पाबंदी के कारण कोई नहीं हंसता। शहर में एक जोकर आता है जो अपने करतब से किसी भी चीज को दोगुना कर देता है।
मेयर उससे अपने धन को दोगुना करवाने के लालच में शहर में आने और रहने की इजाजत देता है। वह जोकर धीरे-धीरे शहर के लोगों से घुल-मिल जाता है और उनमें बदलाव की बयार लाता है। इसी दौरान जोकर की मुलाकात मेयर की बेटी ‘आना’ से होती है और दोनों एक-दूसरे से प्यार करने लगते हैं।
इसकी जानकारी मेयर को लगती है और वह दोनों को बंदी बना लेता है। इस पर वह चिड़िया जिससे मेयर की बेटी खेलती थी, वह दोनों को कैद से भागने में मदद करती है। इसके बाद वह जोकर अपनी बातों से पूरे शहर के लोगों को बदलने में कामयाब होता है और शहर ‘ए सिटी विद लव’ बन जाता है।
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ये कहानी दिखाई गई पंजाब कला भवन में हुए नाटक ‘ए सिटी विदाउट लव’ के मंचन में। पंजाब कला परिषद की ओर से चल रहे कार्यक्रम के तहत रविवार को रूपक कला केंद्र और वेलफेयर सोसायटी के कलाकारों ने नाटक का मंचन किया।
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नाटक एक रूसी लेखक द्वारा लिखित कहानी पर आधारित है। नाटक को लेखक ने उस सदी में लिखा था जब रूस में तानाशाही थी। नाटक का निर्देशन विनोद कुमार शर्मा ने और इसका हिंदी अनुवाद किरण शर्मा ने किया।
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नाटक की कहानी रूस के एक ऐसे शहर की है, जहां सड़क, घर, दरवाजे, खिड़की, कपड़े, वाहन सब कुछ स्लेटी (ग्रे) रंग के हैं। साथ ही इस शहर के लोगों पर कई तरह की पाबंदियां हैं। जैसे कि वे किसी से प्यार नहीं कर सकते, दया या किसी से हमदर्दी जताने की मनाही है।
इसके अलावा यहां फूलों का खिलना, लोगों के हंसने और हंसाने पर सख्त पाबंदी है। यहां तक की अगर शहर के किसी कोने में कोई फूल खिल भी जाए तो उसका एक विचित्र तरीके से अंतिम संस्कार कर दिया जाता है। शहर में यह सब होता है वहां के मेयर की हुकूमत की वजह से। वह शहर के लोगों को खुद के हिसाब से ढालना चाहता है।
मेयर ने सभी शहरवासियों के दिल पर एक ऐसी मशीन लगाई है जो इंसान के भावुक होने पर बज उठती है। मशीन के बजने पर व्यक्ति को फांसी दी जाती है। वहीं मेयर की बेटी सबसे छिप-छिपकर चिड़िया से खेलती है और कई ऐसे काम करती है जिनकी मनाही है। हालांकि हंसना वह भी नहीं जानती, क्योंकि उसके पिता की पाबंदी के कारण कोई नहीं हंसता। शहर में एक जोकर आता है जो अपने करतब से किसी भी चीज को दोगुना कर देता है।
मेयर उससे अपने धन को दोगुना करवाने के लालच में शहर में आने और रहने की इजाजत देता है। वह जोकर धीरे-धीरे शहर के लोगों से घुल-मिल जाता है और उनमें बदलाव की बयार लाता है। इसी दौरान जोकर की मुलाकात मेयर की बेटी ‘आना’ से होती है और दोनों एक-दूसरे से प्यार करने लगते हैं।
इसकी जानकारी मेयर को लगती है और वह दोनों को बंदी बना लेता है। इस पर वह चिड़िया जिससे मेयर की बेटी खेलती थी, वह दोनों को कैद से भागने में मदद करती है। इसके बाद वह जोकर अपनी बातों से पूरे शहर के लोगों को बदलने में कामयाब होता है और शहर ‘ए सिटी विद लव’ बन जाता है।