चंडीगढ़: ऑनलाइन एजुकेशन को स्कूल तो हुए तैयार, मगर माता-पिता और बच्चे अभी नहीं

संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़ Updated Sun, 28 Jun 2020 05:19 PM IST
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ऑनलाइन एजुकेशन के लिए न तो स्कूल पूरी तरह से तैयार हैं और न ही अभिभावक व विद्यार्थी। विद्यार्थी क्लास अटेंड करने पर फोकस तो कर रहे हैं, मगर उनके सामने भी कई चुनौतियां हैं। जिन पर काबू पाने में अभी समय लगेगा। महामारी के दौर में कोई विकल्प न होने की वजह से ऑनलाइन एजुकेशन स्कूल प्रशासन व अभिभावकों की मजबूरी बन गई है। दोनों का मानना है कि विद्यार्थियों की पढ़ाई जारी रहे, ताकि साल बर्बाद न हो और जब भी क्लासरूम शुरू किए जाएं तो पढ़ाई का बोझ न पड़े। 
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स्कूलों की ओर से पूरी कोशिश की गई कि ऑनलाइन पढ़ाई के प्रति विद्यार्थी अभ्यस्त हो जाएं। इसके लिए सॉफ्टवेयर, एप और ट्रेनिंग की मदद ली गई है। किसी तरह से विद्यार्थियों को विषय समझ में आ जाएं, इसके लिए अध्यापक दोगुनी मेहनत कर रहे हैं। पढ़ाने के लिए बाद विद्यार्थियों का फीडबैक लिया जाता है, ताकि पता चल सके कि ऑनलाइन पढ़ाई कितनी कारगर साबित हो रही है।
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ 
विशेषज्ञों का मानना है कि यह तो अभी शुरुआत है। यह भी तय है कि इतनी जल्दी स्कूल और विद्यार्थी ऑनलाइन एजुकेशन के आदी नहीं हो पाएंगे। हर नए काम में चुनौतियां सामने आती हैं। समय लगेगा, मगर इस समय को बर्बाद नहीं करना है। कुछ नया सीखना है। सीखने की कोशिश करेंगे तो बहुत कुछ पाएंगे।

विद्यार्थी तनाव में न आएं, इसलिए आर्ट एंड क्राफ्ट की भी क्लासेज लग रही
सेक्टर-26 स्थित सेंट जोंस हाईस्कूल की प्रिंसिपल कविता दास ने बताया कि ऑनलाइन एजुकेशन शुरू करने से पहले अपने शिक्षकों को प्रशिक्षण दिलाया। ई-लर्निंग के लिए शिक्षकों को तीन दिन की ट्रेनिंग क्लास दी गई। शिक्षक घर से जूम एप व गूगल क्लासरूम की मदद से स्टूडेंट्स को लाइव लेक्चर देते हैं।

विद्यार्थियों की प्रैक्टिस के लिए गूगल फॉर्म की मदद से वर्कशीट दी जा रही है। महामारी में विद्यार्थी पर तनाव न आए इसके लिए आर्ट एंड क्राफ्ट की क्लासेज भी लगाई जा रही हैं। रिवीजन में दिक्कत न आए, इसके लिए पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन भी तैयार की गई है। विद्यार्थी देखकर उसे रिवाइज कर सकते हैं। 

छोटे विद्यार्थियों के लिए अलग योजना तैयार की गई है। इसमें पहली से पांचवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को एक दिन में सिर्फ 40 मिनट का लेक्चर दिया जाता है। पैरेंट्स को बच्चों के साथ बैठना अनिवार्य है, जबकि 6-12वीं क्लास के विद्यार्थियों को प्रतिदिन क्लासरूम की तरह सात लेक्चर लिए जाते हैं। इस दौरान विद्यार्थियों को लंच ब्रेक भी दिया जाता है।
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विद्यार्थियों का फीडबैक भी ले रहे हैं

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