चंडीगढ़: ऑनलाइन एजुकेशन को स्कूल तो हुए तैयार, मगर माता-पिता और बच्चे अभी नहीं
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ऑनलाइन एजुकेशन के लिए न तो स्कूल पूरी तरह से तैयार हैं और न ही अभिभावक व विद्यार्थी। विद्यार्थी क्लास अटेंड करने पर फोकस तो कर रहे हैं, मगर उनके सामने भी कई चुनौतियां हैं। जिन पर काबू पाने में अभी समय लगेगा। महामारी के दौर में कोई विकल्प न होने की वजह से ऑनलाइन एजुकेशन स्कूल प्रशासन व अभिभावकों की मजबूरी बन गई है। दोनों का मानना है कि विद्यार्थियों की पढ़ाई जारी रहे, ताकि साल बर्बाद न हो और जब भी क्लासरूम शुरू किए जाएं तो पढ़ाई का बोझ न पड़े।
स्कूलों की ओर से पूरी कोशिश की गई कि ऑनलाइन पढ़ाई के प्रति विद्यार्थी अभ्यस्त हो जाएं। इसके लिए सॉफ्टवेयर, एप और ट्रेनिंग की मदद ली गई है। किसी तरह से विद्यार्थियों को विषय समझ में आ जाएं, इसके लिए अध्यापक दोगुनी मेहनत कर रहे हैं। पढ़ाने के लिए बाद विद्यार्थियों का फीडबैक लिया जाता है, ताकि पता चल सके कि ऑनलाइन पढ़ाई कितनी कारगर साबित हो रही है।
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ
विशेषज्ञों का मानना है कि यह तो अभी शुरुआत है। यह भी तय है कि इतनी जल्दी स्कूल और विद्यार्थी ऑनलाइन एजुकेशन के आदी नहीं हो पाएंगे। हर नए काम में चुनौतियां सामने आती हैं। समय लगेगा, मगर इस समय को बर्बाद नहीं करना है। कुछ नया सीखना है। सीखने की कोशिश करेंगे तो बहुत कुछ पाएंगे।
विद्यार्थी तनाव में न आएं, इसलिए आर्ट एंड क्राफ्ट की भी क्लासेज लग रही
सेक्टर-26 स्थित सेंट जोंस हाईस्कूल की प्रिंसिपल कविता दास ने बताया कि ऑनलाइन एजुकेशन शुरू करने से पहले अपने शिक्षकों को प्रशिक्षण दिलाया। ई-लर्निंग के लिए शिक्षकों को तीन दिन की ट्रेनिंग क्लास दी गई। शिक्षक घर से जूम एप व गूगल क्लासरूम की मदद से स्टूडेंट्स को लाइव लेक्चर देते हैं।
विद्यार्थियों की प्रैक्टिस के लिए गूगल फॉर्म की मदद से वर्कशीट दी जा रही है। महामारी में विद्यार्थी पर तनाव न आए इसके लिए आर्ट एंड क्राफ्ट की क्लासेज भी लगाई जा रही हैं। रिवीजन में दिक्कत न आए, इसके लिए पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन भी तैयार की गई है। विद्यार्थी देखकर उसे रिवाइज कर सकते हैं।
छोटे विद्यार्थियों के लिए अलग योजना तैयार की गई है। इसमें पहली से पांचवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को एक दिन में सिर्फ 40 मिनट का लेक्चर दिया जाता है। पैरेंट्स को बच्चों के साथ बैठना अनिवार्य है, जबकि 6-12वीं क्लास के विद्यार्थियों को प्रतिदिन क्लासरूम की तरह सात लेक्चर लिए जाते हैं। इस दौरान विद्यार्थियों को लंच ब्रेक भी दिया जाता है।
विद्यार्थियों का फीडबैक भी ले रहे हैं
सेक्टर-38 स्थित श्री गुरु हरकिशन पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल हरप्रीत कौर ने बताया कि उन्होंने ई-लर्निंग के लिए अलग से एक एप तैयार करवाया है। इसमें टीचर लाइव लेक्चर के माध्यम से विद्यार्थियों को पढ़ा रहे हैं। स्कूल ने स्टूडेंट्स और पैरेंट्स की मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है। गूगल मीट के माध्यम से पैरेंट्स के साथ वर्चुअल सेशन भी आयोजित किए जा रहे हैं ताकि स्टूडेंट्स की परेशानियों को समझा जा सके।
स्टूडेंट्स को रिवीजन के लिए ई-मेल के माध्यम से वर्कशीट भेजी जाती है। जिन पैरेंट्स को प्रिंट करवाने में समस्या आती है, उन्हें ऑफलाइन वर्कशीट भी उपलब्ध करवाई जा रही है, जिससे स्टूडेंट्स की लर्निंग का फीडबैक मिल सके। स्कूल में कुछ स्टूडेंट्स दिव्यांग भी हैं। ऐसे विद्यार्थियों के लिए स्पेशल टीचर हायर किए गए हैं। उन्हें अलग से ट्रेनिंग दी गई है।
सरकारी स्कूल में व्हाट्सएप के जरिए पढ़ाई
जिला शिक्षा अधिकारी अल्का मेहता ने बताया कि शहर के सरकारी स्कूलों में भी पिछले एक महीने से शिक्षक ज्यादा से ज्यादा स्टूडेंट्स को ऑनलाइन लर्निंग से जोड़ने के प्रयास में लगे हैं। शिक्षा विभाग ने इसके लिए स्पेशल मीटिंग कर शिक्षकों को विभिन्न ग्रुप में विभाजित किया था। हर विषय के लिए विशेष टीम तैयार की गई है, जो विषय के सभी टॉपिक पर आसान भाषा में ऑडियो/वीडियो लेक्चर तैयार करते हैं। इसके बाद ये क्लिप्स व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए सभी स्कूलों के शिक्षकों को भेजी जाती हैं।
शिक्षक व्हाट्सएप के जरिए इन्हें स्टूडेंट्स को भेजते हैं। व्हाट्सएप के जरिए होमवर्क दिए जा रहे हैं और उन्हें पढ़ाए गए टॉपिक पर सवाल हल करने के लिए दिए जाते हैं। डीईओ ने बताया कि कक्षा 3 से 12वीं तक के 85 से 90 प्रतिशत स्टूडेंट्स आसानी से ऑनलाइन क्लास के साथ जुड़े हैं। विभाग की ओर से रोजाना ऑनलाइन क्लासेज की मॉनीटरिंग की जा रही है और क्लासेज नहीं लगा पाने वाले स्टूडेंट्स का भी डाटा इकट्ठा किया जा रहा है ताकि उनके साथ अन्य माध्यमों से जुड़कर उन्हें स्टडी मैटेरियल उपलब्ध करवाया जाए।
क्या कहते हैं पैरेंट्स
बेटी का सात से आठ घंटे कंप्यूटर के सामने बैठना मुश्किल
अभिभावक कौशल सिंह ने बताया कि मेरी बेटी 12वीं क्लास में है। ऑनलाइन क्लास में विद्यार्थी को सात से आठ घंटे कंप्यूटर के आगे बैठना पड़ता है। उसके बाद कोचिंग क्लासेज भी ऑनलाइन है। इससे पढ़ाई का तनाव बढ़ रहा है। सेल्फ स्टडी के लिए समय निकाल पाना मुश्किल होता है लेकिन हमारे सामने कोई विकल्प भी नहीं है।
प्राइमरी बच्चों की ऑनलाइन क्लासेज नहीं लगनी चाहिए
अभिभावक प्रवीण ने बताया कि मेरे दो बच्चे हैं। जो पहली क्लास में हैं। उन्हें ऑनलाइन के जरिए पढ़ाई करना मुश्किल है। अगले हफ्ते से बच्चों के टेस्ट भी होने हैं। पिछले टेस्ट में भी बच्चों की परफार्मेंस ठीक नहीं थी। प्राइमरी के बच्चों की ऑनलाइन क्लास के लिए हम लोग तैयार नहीं हैं। उन्हें ऑफलाइन पढ़ाना ही ठीक रहेगा।
जटिल विषय को समझाने के लिए नया प्रयोग करना होगा
अभिभावक विनोद इंदौरी ने बताया कि उनके दो बच्चे हैं। दोनों ही सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं। उन्हें व्हाट्सएप के माध्यम से पढ़ाया जा रहा है, मगर परस्पर बातचीत नहीं होने के कारण बच्चों को समझ में नहीं आता। सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को भी लाइव लेक्चर के साथ स्टूडेंट्स को जटिल विषयों को समझाने के लिए नए प्रयोग करने चाहिए।
ऑनलाइन एजुकेशन में टीचरों का काम दोगुना बढ़ा
शिक्षकों ने बताया कि ऑनलाइन एजुकेशन की वजह से उनका काम दोगुना बढ़ गया है। क्लासरूम में तो सीधे आकर विद्यार्थी को पढ़ा देते और उनसे बातचीत कर सीधे फीडबैक ले लिया जाता था। लेकिन अब काम ज्यादा बढ़ गया है। विद्यार्थियों के लिए पहले लेक्चर तैयार करना पड़ता है। रिवीजन या विषय को दोहराने में दिक्कत न आए, इसलिए लेक्चर की पीडीएफ व पावर प्वाइंट प्रजेंटशेन तैयार करनी पड़ती है। विद्यार्थियों की फीडबैक लेने के लिए गूगल फार्म में रोजाना सवालों का बैंक तैयार करना पड़ता है।