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नए शिक्षा सत्र को एक माह बीता, बिना किताब कैसे पढ़ेंगे नौनिहाल

Tue, 10 May 2016 09:31 AM IST
मुकेश शर्मा/अमर उजाला, फरीदाबाद
मुकेश शर्मा/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Tue, 10 May 2016 09:31 AM IST
सार

  • बिना किताबों के कैसे होंगे मासिक टेस्ट
  • शिक्षा विभाग ने जारी किया कैलेंडर
  • 25 मई से होंगे टेस्ट 

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with out book how to read the children

विस्तार

नया शिक्षा सत्र शुरू हुए एक महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है। लेकिन राजकीय प्राथमिक स्कूलों में अभी तक पढ़ाई शुरू नहीं हो पाई है। स्कूलों में नई किताबें भी नहीं आई हैं। वहीं शिक्षा विभाग ने 25 मई से मासिक टेस्ट की तारीख भी घोषित कर दी है।

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टेस्ट की तारीख से स्कूलों में असमंजस की स्थिति है। अब सवाल यह उठता है कि जब बच्चों ने कुछ पढ़ा ही नहीं तो बच्चे परीक्षा कैसे देंगे। वहीं अधिकारी 15 मई तक नई किताबें आने का दावा कर रहे हैं। जिले में 300 से ज्यादा प्राइमरी स्कूल हैं जिनमें डेढ़ लाख से अधिक बच्चे पढ़ रहे हैं।
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राज्य सरकार को अबकी बार प्राथमिक स्कूलों के पाठ्यक्रम को बदलकर स्कूलों में नई किताबें भेजनी थीं, लेकिन अभी तक स्कूलों में किताबें नहीं पहुंच पाई हैं। प्राथमिक विद्यालयों में किताबें न होने के कारण शिक्षक और बच्चे दोनों परेशान हैं।

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शिक्षा विभाग ने 25 से 31 मई तक मासिक टेस्ट लेने की घोषणा कर दी

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अध्यापकों के आगे समस्या यह है कि शिक्षा विभाग ने 25 से 31 मई तक मासिक टेस्ट लेने की घोषणा कर दी है। जबकि विभागीय अधिकारियों को पता है कि किताबें नहीं है और करीब दस दिन तक आएंगी भी नहीं।

इसके बावजूद शिक्षा कैलेंडर में कोई बदलाव नहीं किया गया। सात मासिक टेस्ट के नंबर भी बच्चों की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट में गिने जाते हैं। ऐसे में सवाल यह है कि बिना किताबों के अध्यापक बच्चों को कैसे और कहां से पढ़ाएंगे।

स्टेशनरी का नहीं आया फंड
स्कूलों में पहली से पांचवी कक्षा तक के प्रत्येक छात्र को 100 रुपये स्टेशनरी के लिए दिए जाते हैं। वहीं, छठी से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए 150 रुपये आते हैं। लेकिन अब तक यह राशि विभाग को नहीं भेजी है। इस वजह से बच्चों को खुद के पास से  कॉपियां और अन्य स्टेशनरी खरीदकर लानी पड़ रही है।

राजकीय स्कूलों में पहली से तीसरी कक्षा में कहीं-कहीं कुछ किताबों के सेट आए हैं। उनसे ही दो-तीन विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। लेकिन जिसके पास किताबें नहीं हैं। वो होमवर्क नहीं कर पाते। चौथी व पांचवी कक्षा में तो अधिकतर स्कूलों में एक भी किताब नहीं आई है। 

किताबें नहीं आने से स्कूल में पढ़ाई नहीं हो पा रही

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किताबें नहीं आने से स्कूल में पढ़ाई नहीं हो पा रही है। अध्यापक कहते हैं कि किताबें बदल गई हैं। जब किताबें आएगी, तब होमवर्क दिया जाएगा।-अंकुर, छात्र, कक्षा तीन, राजकीय प्राथमिक स्कूल बल्लभगढ़।

 

मैंने पुरानी किताबें दोस्त से खरीदी थीं। लेकिन किताबें बदल जाने के कारण वो भी बेकार पड़ी हैं। अध्यापकों का कहना है कि जल्द ही किताबें आ जाएंगी।-रीना, छात्रा कक्षा, राजकीय प्राथमि स्कूल अजरौंदा।

 

पहले किताबें लेट होती थी तो पुरानी किताबें मंगवा कर कुछ दिन काम चला लेते थे। लेकिन इस बार सिलेबस में बदलाव किया जा रहा है। इस वजह से पुरानी किताबों से भी सिलेबस आगे नहीं बढ़ा सकते। बच्चे खाली बैठे हैं। इसलिए पुराने विद्यार्थियों से उनकी किताबें मंगवाकर काम चलाया जा रहा है।-चतर सिंह, प्रधान, राजकीय प्राथमिक अध्यापक संघ।

 

11 मई को पंचकुला में एससीईआरटी के तहत प्रकाशित की गई नई पुस्तकों का विमोचन किया जाना है। 15 मई तक सभी किताबें स्कूलों में पहुंच जाएंगी।- रामकुमार फलसवाल, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।

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