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बीस हजार फर्जी शिक्षकों के सहारे चल रहे एकेटीयू के कॉलेज, मान्यता हो सकती है रद्द

Fri, 13 May 2016 09:55 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा Updated Fri, 13 May 2016 09:55 AM IST
सार

  • कॉलेजों में तैनात हैं 20 हजार फर्जी शिक्षक
  • 16 मई तक कॉलेजों से मांग गया जवाब, 

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Twenty thousand bogus teachers in colleges of aktu

विस्तार

एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) से संबद्ध कॉलेजों में बड़े पैमाने पर फर्जी शिक्षकों की तैनाती की गई है। मामले के सामने आने के बाद विवि के कुलपति ने 16 मई तक कॉलेजों से जवाब मांगा है। जवाब आने के बाद ही संस्थानों पर कार्रवाई की जाएगी।

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कुलपति ने कहा कि मामले में दोषी पाए जाने पर फर्जी काम करने वाले संस्थानों की मान्यता भी रद्द की जा सकती है। मालूम हो कि एकेटीयू कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कॉलेजों से कोर्स से जुड़ी तमाम सूचना मांगी थीं। इसमें हर शिक्षक के नाम, निवास का पता, पैन नंबर, मोबाइल नंबर, ई-मेल समेत अन्य जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराने को कहा गया था।
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जांच के बाद करीब 20 हजार शिक्षकों को जारी किए गए पैन नंबर फर्जी गए। साथ ही अन्य जानकारियां भी अधूरी पाई गईं हैं। यानी साफ है कि  कॉलेजों ने मानकों को कागज में पूरा करने के लिए फर्जी शिक्षकों की तैनाती कर रखी है। बताया जाता है कि कॉलेजों ने फर्जी शिक्षकों की तैनाती दिखाकर मोटी तनख्वाह में हेराफेरी भी की है। संभावना जताई जा रही है कि कॉलेजों में मानक पूरे करने के लिए सिर्फ नाम शामिल करके प्रोफेसर नियुक्त किए हैं।

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प्रोफेसरों ने कागज देकर दिखाई नियुक्ति पर नहीं जाते पढ़ाने

Twenty thousand bogus teachers in colleges of aktu

इसमें कुछ प्रोफेसरों ने नाम और कागज देकर कॉलेज में अपनी नियुक्ति दिखा दी। मगर वे वहां पर पढ़ाने नहीं जाते हैं। बताया जाता है कि कॉलेजों में सिर्फ नाम शामिल करने के लिए प्रोफेसर उनसे हर माह करार के तहत पैसा भी उठा रहे हैं।

कॉलेज की तरफ से प्रोफेसर को मोटी रकम वेतन के रूप में दिखाई जाती है, लेकिन मिलता थोड़ा सा ही है। वहीं कॉलेज कम पैसे खर्च करके अन्य शिक्षकों को नियुक्त करके छात्रों की पढ़ाई पूरी कराते हैं।  

विवि ने संस्थानों की मान्यता को लेकर कोर्स और उनकी जानकारी (डेफिसियंसी रिपोर्ट) मांगी थी। जिससे कॉलेजों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाई जा सके। संस्थानों से जुड़ी जानकारी अब विवि की वेबसाइट पर पब्लिक डोमेन में उपलब्ध हैं।

16 मई तक फर्जी पैन नंबरों के संबंध में कॉलेजों से जवाब मांगा है। जवाब आने के बाद ही संस्थानों पर कार्रवाई की जाएगी। - प्रो. विनय पाठक, कुलपति, एकेटीयू 

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