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उधार के धनुष से पैरालंपिक में निशाना लगाएंगे सतेंद्र, आर्थिक तंगी के कारण नहीं खरीद सके उपकरण

Thu, 12 May 2016 01:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Thu, 12 May 2016 01:21 AM IST
सार

  • आर्थिक तंगी के कारण नहीं खरीद पाए हैं खेल उपकरण
  •  दोस्तों के उपकरण लेकर करते हैं प्रेक्टिस

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satendra will aim in para olympic with bow of borrow
सतेंद्र अत्री - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से ताल्लुक रखने वाले दिव्यांग सतेंद्र अत्री उधार के धनुष से पैरा नेशनल तीरंदाजी में निशाना लगाते नजर आएंगे। इस प्रतियोगिता के लिए हरियाणा से सिर्फ चार ही खिलाड़ियों का चयन हुआ है, जिनमें रोहतक के राजेश,भिवानी के कुलदीप, हिसार के सोनू और फरीदाबाद के सतेंद्र अत्री शामिल हैं।

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प्रतियोगिता रोहतक में 12 से 15 मई तक आयोजित होगी। बुधवार को सतेंद्र प्रतियोगिता के लिए रवाना हो गए। उनका लक्ष्य पैरानेशनल में स्वर्ण पदक प्राप्त करना है। मोहना गांव के 31 वर्षीय सतेंद्र के पिता बेरोजगार हैं। वह कभी-कभी पट्टे पर जमीन लेकर खेतीबाड़ी करते हैं। उनकी माता गृहणी हैं। सतेंद्र बचपन में ही पोलियोग्रस्त हो गए थे।
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वह 2013 से तीरंदाजी का प्रशिक्षण ले रहे है। इसके अलावा 2013-14 में एशियन गेम्स के लिए उन्होंने ट्रायल दिया। उन्होंने 2014 मुंबई में हुए मयूर कप नेशनल तीरंदाजी में कांस्य पदक प्राप्त किया था। 2015 में कानपुर में हुए राजीव गांधी खेल में उन्होंने सामान्य तीरंदाजों को मात देकर रजत पदक प्राप्त किया था।
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सेक्टर-12 खेल परिसर में खुले आसमान के नीचे अभ्यास करने वाले सतेंद्र के पास न प्रशिक्षण की फीस देने और न ही लाखों की कीमत वाले खेल उपकरणों को खरीदने की क्षमता है। उनके पास जो कुछ है, वह तीरंदाजी के प्रति उनका जोश, जुनून व जज्बा है। उनके इस जज्बे को उनके दोस्तों ने सराहा है।


खेल परिसर में निशक्त सतेंद्र के कुछ ऐसे दोस्त हैं, जोकि उन्हें रोजाना एक घंटे के लिए अपना धनुष उधार पर देते हैं। सतेंद्र बताते है कि उन्होंने आर्थिक मदद के लिए कई बार एमएलए, विधायक, खेल अधिकारी से संपर्क किया, लेकिन कहीं से कोई मदद नहीं मिली। ऐसे वक्त में दोस्तों ने साथ दिया। उन्होंने बताया कि जब भी कोई दोस्त प्रशिक्षण के बीच में 10 से 15 मिनट के लिए आराम करता है, उस दौरान वह उनके धनुष से अभ्यास करते हैं।

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