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सत्र के पहले दिन बच्चों से स्कूल गुलजार, दाखिले जारी
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Sat, 02 Apr 2016 09:31 AM IST
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नया शिक्षा सत्र शुक्रवार से शुरू हो गया। सत्र के पहले दिन विद्यार्थियों में नई कक्षा में जाने का जुनून और खुशी साफ दिखाई दी। छुट्टियों के चलते वीरान पड़े अधिकांश स्कूलों में नए सत्र में छात्रों के लौटने से रौनक दिखाई दी।
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पहले दिन विद्यार्थी पढ़ाई में नहीं, बल्कि मस्ती की पाठशाला लगाने में लगे रहे। कुछ स्कूलों में नए सत्र की शुरुआत सोमवार से होगी। वहीं, शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार सभी राजकीय स्कूलों में एक अप्रैल को प्रवेश उत्सव के रूप में मनाया गया।
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स्कूलों में पुराने छात्रों के लिए भी नया शिक्षा सत्र खास रहता है। गृह परीक्षाएं खत्म होने के बाद छात्रों में रिजल्ट को लेकर तनाव बना रहता है। रिजल्ट घोषित होने के बाद छात्रों को तनाव से मुक्ति मिलती है।
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शुक्रवार को स्कूलों में पढ़ाई का माहौल कम, बल्कि मस्ती का माहौल ज्यादा दिखाई दिया। कुल मिलाकर विद्यार्थियों का पहला दिन मस्ती के साथ गुजरा। किसी ने ग्रुप के साथ बैठकर छुट्टियों में हुई मौज-मस्ती के किस्से सुनाए।
खासकर नन्हे-मुन्नों के लिए स्कूल का पहला दिन काफी मायने रखता है। प्री-नर्सरी के बच्चों ने अपने अभिभावकों की उंगली पकड़ स्कूल में कदम रखा। इस दौरान कई बच्चों में पहली बार स्कूल जाने का डर दिखाई दिया तो कई बच्चे स्कूल में प्रवेश करने के लिए उत्साहित दिखाई दिए। सरकारी स्कूलों में कहीं रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच बच्चों को अगली कक्षा में पहुंचने पर शुभकामनाएं दी गईं तो कहीं मेधावी बच्चों को सम्मानित कर हौसलाअफजाई की गई।
अभिभावकों को बताए स्कूलों के नियम-कायदे
प्रवेश उत्सव में स्कूल के बच्चों के अभिभावकों, एसएमसी, पीटीए, स्कूल के मुखिया शामिल रहे। इस दौरान मुखिया ने अभिभावकों को स्कूल के नियम-कायदे के बारे में बताया गया। इसके अलावा कैसे अभिभावक व शिक्षक मिलकर बच्चों का विकास करें, इसको लेकर चर्चा की गई। मौके पर अधिकांश वक्ताओं ने शिक्षकों को सलाह दी कि वह बच्चों को प्यार व उसकी रुचि अनुसार पढ़ाएं। वहीं अभिभावक भी बच्चे की पढ़ाई को लेकर गंभीर रहे।
दसवीं के विद्यार्थियों को प्रोविजनल दाखिला
प्रवेश उत्सव के दिन 10वीं की परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों को उसी स्कूल में प्रोविजनल दाखिला दिया गया। इसमें 11वीं कक्षा की पढ़ाई शुक्रवार से शुरू कर दी गई। इनमें उन्हीं बच्चों ने दाखिला लिया जिन्हें बोर्ड परीक्षा में 70 प्रतिशत से अधिक अंक आने की पूरी उम्मीद है।