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सरकारी स्कूलों के शिक्षक करेंगे ‘ईशान' की पहचान

Tue, 12 Apr 2016 12:42 PM IST
मुकेश शर्मा/अमर उजाला, फरीदाबाद
मुकेश शर्मा/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Tue, 12 Apr 2016 12:42 PM IST
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government school teachers will identifie ishan in school

सरकारी स्कूलों में शिक्षक अब तारे जमीन पर फिल्म के निकुंभ सर की भूमिका में नजर आएंगे। बच्चों की स्क्रीनिंग कर उनमें छिपी प्रतिभा को तरह-तरह के प्रयोगों से उजागर करेंगे। साथ ही मुख्य धारा की पढ़ाई में आने वाली उनकी परेशानियों को दूर करेंगे।

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दरअसल फिल्म तारे जमीं पर में आठ साल का ईशान (दर्शील सफारी) डिस्लेक्सिया नामक बीमारी से पीड़ित दिखाया गया था। जिसकी वजह से स्कूल में उसके प्रदर्शन को लेकर सहपाठी उसका मजाक उड़ाते हैं, लेकिन स्कूल में निकुंभ सर(आमिर खान) उसकी बीमारी को पहचान लेते हैं और उसकी सहायता करते हैं। अब कुछ ऐसा ही प्रदेश भर के सरकारी स्कूलों में भी होगा। शिक्षा विभाग द्वारा चलाए जा रहे क्लास रेडिनेस प्रोग्राम अर्थात कक्षा तत्परता कार्यक्रम में शिक्षक ऐसे बच्चों की तलाश करेंगे।
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सोमवार को शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित कार्यशाला में शिक्षकों ने अपने अनुभव साझा किए और बदलाव का आह्वान किया। महेंद्रगढ़ के गुढ़ा स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल के उपप्रधानाचार्य नरेश कौशिक, मंददौला(रेवाड़ी) से डॉ. अजय मानव और प्रमोद कुमार ने शिक्षकों को बदलाव के लिए प्रेरित किया।
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रेश के प्रयासों से जहां स्कूल से दो बच्चे साहिल और अजय आईआईटी जैसी प्रतिष्ठित संस्थानों में दाखिला ले चुके हैं। वहीं, डॉ. अजय मानव नंगे पैर यात्रा कर स्कूल में बच्चों की संख्या बढ़ा रहे हैं।

सी तरह आरटीई के स्टेट हेड प्रमोद कुमार ने बच्चों को पढ़ाने के लिए तरह-तरह के विधियां बताई। प्रमोद का कहना है कि 19वीं सदी के शिक्षक, 20वीं सदी के स्कूलों में 21वीं सदी के बच्चों को नहीं पढ़ा सकते। इसके लिए उन्हें खुद में बदलाव करने की जरूरत है। 

संयुक्त निदेशक ने की कार्यशाला की शुरुआत 
शिक्षा विभाग द्वारा सेक्टर-14 स्थित डीएवी स्कूल के हंसराज सभागार में आयोजित कक्षा तत्परता कार्यक्रम से संबंधित मंडल स्तरीय कार्यशाला की विधिवत शुरुआत शिक्षा विभाग की संयुक्त निदेशक मीनाक्षी गोयल ने की। उन्होंने कहा कि नए सत्र में विद्यालय शिक्षा विभाग द्वारा क्लास रेडिनेस प्रोग्राम जैसी महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत की गई है।


जिसके अंतर्गत विद्यार्थियों के नामांकन पर विशेष बल दिया गया और यह सुनिश्चित किया गया कि बच्चे स्कूल में जाएं। कार्यशाला में फरीदाबाद, पलवल, मेवात, गुड़गांव, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी जिलों के जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी, स्कूल प्रिंसिपल सहित 850 शिक्षकों ने हिस्सा लिया।

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