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नोटबंदी-GST के नकारात्मक प्रभाव से उबरा देश, विश्व बैंक ने 7.3 फीसदी GDP का लगाया अनुमान
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 17 Apr 2018 10:17 AM IST
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नोटबंदी और जीएसटी के बाद बने नकारात्मक माहौल से देश पूरी तरह से उबर गया है और वित्त वर्ष 2018-19 में जीडीपी 7.3 फीसदी रहेगी। वहीं 2019 और 2020 में इसके 7.5 फीसदी रहने की संभावना विश्व बैंक ने सोमवार को जारी अपनी एक रिपोर्ट में व्यक्त की है।
2017 में थी 6.7 फीसदी जीडीपी
विश्व बैंक ने अपने साउथ एशिया इकोनॉमिक फोकस में भारत के लिए कहा है कि 2017 में जीडीपी 6.7 फीसदी थी, जो कि 2018 में 7.3 फीसदी के आंकड़े को पार कर लेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि निजी निवेश और उपभोग काफी बढ़ेगा।
बढ़ानी होगी नौकरियों की संख्या
भारत को अपनी रोजगार दर बरकरार रखने के लिए हर साल 8.1 मिलियन नौकरियां सृजित करनी होंगी।साथ ही सुझाव दिया है कि नई दिल्ली को निवेश और निर्यात बढ़ाना चाहिए ताकि ग्लोबाल ग्रोथ का फायदा उठाया जा सके।
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रिपोर्ट में कहा है, “हर महीने वर्किंग एज 1.3 मिलियन लोगों की दर से बढ़ जाती है और भारत को अपनी रोजगार दर बरकरार रखने के लिए 8.1 मिलियन नौकरियां प्रति साल सृजित करनी होगी। जो कि वर्ष 2005 से 2015 तक लगातार गिर रही है। इसका मुख्य कारण महिलाओं की ओर से जॉब मार्केट छोड़ना है।”
विश्व बैंक के दक्षिण एशिया क्षेत्र के प्रमुख अर्थशास्त्री मार्टिन रामा ने कहा, '2025 तक हर महीने 18 लाख से अधिक लोग कामकाज करने की उम्र में पहुंचेंगे और अच्छी खबर यह है कि आर्थिक वृद्धि नयी नौकरियां पैदा कर रही हैं।
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2017 में थी 6.7 फीसदी जीडीपी
विश्व बैंक ने अपने साउथ एशिया इकोनॉमिक फोकस में भारत के लिए कहा है कि 2017 में जीडीपी 6.7 फीसदी थी, जो कि 2018 में 7.3 फीसदी के आंकड़े को पार कर लेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि निजी निवेश और उपभोग काफी बढ़ेगा।
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बढ़ानी होगी नौकरियों की संख्या
भारत को अपनी रोजगार दर बरकरार रखने के लिए हर साल 8.1 मिलियन नौकरियां सृजित करनी होंगी।साथ ही सुझाव दिया है कि नई दिल्ली को निवेश और निर्यात बढ़ाना चाहिए ताकि ग्लोबाल ग्रोथ का फायदा उठाया जा सके।
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रिपोर्ट में कहा है, “हर महीने वर्किंग एज 1.3 मिलियन लोगों की दर से बढ़ जाती है और भारत को अपनी रोजगार दर बरकरार रखने के लिए 8.1 मिलियन नौकरियां प्रति साल सृजित करनी होगी। जो कि वर्ष 2005 से 2015 तक लगातार गिर रही है। इसका मुख्य कारण महिलाओं की ओर से जॉब मार्केट छोड़ना है।”
विश्व बैंक के दक्षिण एशिया क्षेत्र के प्रमुख अर्थशास्त्री मार्टिन रामा ने कहा, '2025 तक हर महीने 18 लाख से अधिक लोग कामकाज करने की उम्र में पहुंचेंगे और अच्छी खबर यह है कि आर्थिक वृद्धि नयी नौकरियां पैदा कर रही हैं।