होम लोन: क्या बेहतर, फ्लोटिंग या फिक्स रेट?
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मकान खरीदना जितना जरूरी होता है, उतना ही मुश्किल भी। एक अच्छा मकान तलाशने के बाद सबसे बड़ी चुनौती किफायती होम लोन लेना है। इस दौरान आपके पास फ्लोटिंग और फिक्स रेट पर लोन लेने का मौका रहता है। दोनों दरों में क्या अंतर है और किस परिस्थिति में कौन सी दर का चुनाव बेहतर होगा, पूरी पड़ताल करती प्रमोद तिवारी की रिपोर्ट-
पूरी अवधि में देनी होगी एकसमान ईएमआई
बैंकिंग मामलों के जानकार अश्विनी राणा कहते हैं कि फिक्स्ड रेट होम लोन में बैंक शुरुआत में ही ब्याज दर निश्चित कर देते हैं, जो पूरे लोन की अवधि में लागू रहती है। फिक्स्ड रेट होम लोन में आपको निश्चितता का एहसास होता है, क्योंकि आपको लोन लेते समय ही पता होता है कि आपके रीपेमेंट क्या होंगे।
इससे आपको सही बजट बनाने और अपनी वित्तीय योजना बनाने में आसानी होगी। फिक्स्ड रेट लोन की कीमत आमतौर पर फ्लोटिंग रेट लोन से थोड़ी अधिक होती है। अगर अंतर काफी बड़ा है तो आप फ्लोटिंग रेट लोन पर विचार कर सकते हैं। अंतर कम है तो फिक्स्ड रेट सबसे बेहतर होगा।
बैंक के फैसले से बदल जाएगी लोन की अवधि
इसे एडजस्टेबल रेट होम लोन के रूप में भी जाना जाता है। ये लोन बैंक की बेंचमार्क दर से जुड़े होते हैं, जो बाजार की ब्याज दर के साथ घटती-बढ़ती है। अगर बेंचमार्क रेट में बदलाव होता है तो लोन पर ब्याज दर भी आनुपातिक रूप से बदल जाती है और आपकी ईएमआई पर भी असर पड़ेगा।
ऐसे लोन पर ब्याज दर निर्धारित अंतराल पर रीसेट की जाती है। यह वित्तवर्ष की प्रत्येक तिमाही या छमाही हो सकती है अथवा यह प्रत्येक ग्राहक के लिए अलग हो सकती है, जो उसके वित्तीय जोखिम या कमाई पर निर्भर करती है।
अगर दर बढ़ती है तो आपकी बची लोन अवधि बढ़ जाएगी और घटने पर कम हो जाएगी। ऐसा ईएमआई की राशि में बदलाव न करने के लिए किया जाता है। आप चाहें तो बैंक से लोन अवधि के बजाय अपनी ईएमआई संशोधित करने के लिए कह सकते हैं।
कब चुनें फिक्स्ड रेट
- अगर आपकी ईएमआई मासिक वेतन की 25-30 फीसदी तक सीमित है।
- भविष्य में ब्याज दरें बढ़ने का अनुमान हो और होम लोन को मौजूदा दर पर लॉक करना चाहते हों।
- हाल में ब्याज दरें घटी हों और आप मौजूदा स्तर को लेकर सहज हों। उदाहरण के लिए अभी एसबीआई की होम लोन दर 7-7.5 फीसदी है।
कब लगाएं फ्लोटिंग पर दांव
- अगर आप समय के साथ ब्याज दरों के गिरने की उम्मीद कर रहे हों तो फ्लोटिंग रेट लोन का चुनाव भविष्य में लोन की लागत कम कर सकता है।
- अगर ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव का आप पर कोई असर नहीं पड़ता है तो फ्लोटिंग रेट का चुनाव बेहतर होगा।
- अगर आप निकटतम अवधि में अपनी ब्याज लागत पर कुछ बचत करना चाहते हों तो फ्लोटिंग रेट चुनें, जो फिक्स्ड रेट से कम होता है।
जब चाहें शुल्क देकर बदल लें विकल्प
निवेश सलाहकार बलवंत जैन का कहना है कि 'ग्राहक जब चाहें बैंक को शुल्क देकर दोनों विकल्पों में बदलाव कर सकते हैं। इसके अलावा, कॉम्बिनेशन लोन भी चुन सकते हैं, जो निश्चित समय बाद फिक्स्ड या फ्लोटिंग रेट में बदल जाता है। वैसे ये कहना मुश्किल है कि कौन सा लोन बेहतर होगा, लेकिन अभी रेपो रेट और बैंकों की ब्याज दरें कम हैं तो फिक्स्ड लोन पर दांव लगा सकते हैं।'