आम बजट 2020: आयातित चिकित्सा उपकरणों पर सेस, महंगा होगा इलाज
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सरकार के बजट में चिकित्सा उपकरणों पर सेस लगाने के प्रस्ताव से देश में इलाज कराना महंगा हो सकता है। मेडिकल टेक्नोलॉजी एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने आशंका जताई है कि इससे उपकरणों का आयात महंगा होगा और लोगों के लिए चिकित्सा सुविधाएं पाना मुश्किल हो जाएगा। एसोसिएशन ने इसे प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की भावना के भी खिलाफ बताया, जिसमें सरकार सभी को सस्ती चिकित्सा मुहैया करवाने का प्रयास कर रही है।
शोध आधारित चिकित्सा तकनीक पर काम कर रही कंपनियों की इस एसोसिएशन के निदेशक संजय भूटानी ने कहा कि उपकरणों की कीमतें बढ़ने पर अंतत: मरीजों पर भार बढ़ेगा। उन्हाेंने यह भी कहा कि इस समय वैश्विक कंपनियां गहन चिकित्सा के 80 प्रतिशत उपकरण मुहैया करवा रही हैं। इन महंगे उपकरणों के तस्करी के जरिए मरीजों तक पहुंचने का खतरा बढ़ेगा।
भूटानी ने कहा कि पड़ोसी देशों में इन पर शुल्क कम हैं, लेकिन गुणवत्ता की कोई गारंटी नहीं होगी। सरकार इन उपकरणों का घरेलू उत्पादन बढ़ाना चाहती है, लेकिन कई प्रकार के उपकरण भारत में बन ही नहीं सकते। वित्तमंत्री ने शनिवार को बजट भाषण में चिकित्सा उपकरणों के आयात शुल्क पर मामूली स्वास्थ्य सेस लगाने का प्रस्ताव रखा था। उम्मीद जताई थी कि इससे भारतीय घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और स्वास्थ्य सेवाएं भी बेहतर होंगी।
वृद्धि मामूली, लेकिन निराशाजनक
दूसरी ओर भारतीय चिकित्सा उपकरण उद्योग संगठन के समन्वयक राजीव नाथ ने भी निराशा जताई और कहा कि अगर किसी उपकरण पर पांच प्रतिशत आयात शुल्क है, तो उस पर पांच प्रतिशत सेस लगने से शुल्क 5.25 प्रतिशत हो जाएगा। भारतीय घरेलू उत्पादकों को संरक्षण देने के लिए यह 0.25 प्रतिशत वृद्धि बहुत मामूली है।
सालाना 38,837 करोड़ रुपये के चिकित्सा उपकरण आयात पर खर्च हो रहे हैं, 80 से 90 प्रतिशत उपकरण आयातित हैं, ऐसे में उम्मीदें कहीं अधिक थीं।