मोरेटोरियम का हो रहा गलत इस्तेमाल, इसकी अवधि और न बढ़ाएं :दीपक पारेख
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एचडीएफसी बैंक के चेयरमैन दीपक पारेख ने सोमवार को आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास से कर्ज भुगतान में मोरेटोरियम की अवधि और नहीं बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि इसका गलत इस्तेमाल हो रहा है। अगर ऐसा आगे हुआ तो बैंकों, गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) समेत पूरे उद्योग को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
सीआईआई द्वारा सोमवार को आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास के साथ एक सत्र के दौरान पारेख ने कहा कि कृपया मोरेटोरियम की अवधि अब न बढ़ाएं। इसका गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। कुछ व्यक्ति और बड़ी कंपनियां कर्ज चुकाने में सक्षम होने के बावजूद इस योजना का लाभ उठा रहे हैं।
इससे बैंकों और एनबीएपसी की वित्तीय सेहत पर गंभीर असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि हमें सुनने में आया है कि मोरेटोरियम बढ़ाने पर विचार हो रहा है। आपसे निवेदन है ऐसा न करें। अगर अगर ऐसा हुआ तो यह बैंकिंग उद्योग के लिए बेहद नुकसानदेह होगा।
दो बार दी जा चुकी राहत
आरबीआई ने कर्ज भुगतान में राहत देते हुए सबसे पहले 27 फरवरी को तीन महीने का मोरेटोरियम देने का एलान किया। इसके तहत 1 मार्च से 31 मई तक कर्ज की किश्त नहीं चुकाने वालों को डिफाल्टर लिस्ट में नहीं डाला जाना था। उसके बाद 22 मई को महामारी संकट के मद्देनजर सरकार ने इसे तीन महीने के लिए बढ़ाकर 31 अगस्त तक के लिए लागू कर दिया।
अभी कुछ कह नहीं सकते
‘आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने पारेख के इस सुझाव पर कोई बड़ी प्रतिक्रिया नहीं देते हुए बस इतना कहा, पारेख की बात को नोट कर लिया है। आगे की योजना पर हम अभी कुछ कह नहीं सकते। इसको लेकर विचार जारी है।’ - शक्तिकांत दास, आरबीआई गवर्नर
केंद्रीय बैंकों को खरीदने चाहिए निजी बैंकों के बॉन्ड
पारेख ने साथ ही यह सुझाव भी दिया कि जैसे दुनिया भर में हो रहा है भारत में भी केंद्रीय बैंकों को निजी क्षेत्र की वित्तीय संस्थाओं के बॉन्ड खरीदने चाहिए। क्योंकि आप ने खुद यह स्टैंड लिया है कि आप बैंकों को फंड देंगे और बैंक उन सभी उपकरणों को खरीदेंगे जिनमें माइक्रोफाइनेंस या हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां शामिल हैं।
इस पर शक्तिकांत दास ने कहा, भारत का कानून इसकी अनुमति नहीं देता। लेकिन फिर भी हम पूरी तरह सजग हैं और मैं आश्वासन देता हूं कि जब कभी भी जरूरत होगी हमारी ओर से हर जरूरी कदम उठाया जाएगा। जैसे म्यूचुअल फंड सेक्टर में हमने किया।
मित्तल बोले, बढ़ना चाहिए मोरटोरियम
वहीं भारती इंटरप्राइजेज के उपाध्यक्ष और सीआईआई के पूर्व अध्यक्ष राकेश भारती मित्तल ने कहा, कॉरपोरेट और अर्थव्यवस्था पर तनाव को कम करने के लिए मोरेटोरियम बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, मेरा मानना है कि एनपीए की सूची में शामिल होने वाली कंपनियों की संख्या और बढ़ेगी। ऐसे में मोरेटोरियम को बढ़ाने का फैसला गंभीर चिंतन और विचार विमर्श के साथ किया जाए।
अगले साल 12.15 फीसदी तक जा सकता है एनपीए
आरबीआई ने अपनी छमाही वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में खुद कहा है कि मोरेटोरियम का असर बैंकों पर पड़ेगा। कोरोना काल में डगमगाई वित्तीय गतिविधियों के चलते बैंकों का कुल एनपीए इस साल मार्च के 8.5 फीसदी से बढ़कर अगले साल मार्च में 12.5 फीसदी तक पहुंच सकता है।