{"_id":"5dd1e7318ebc3e54a75cb7c1","slug":"telecom-sector-can-be-on-the-path-of-consolidation-again","type":"story","status":"publish","title_hn":"ब्रोकरेज हाउसों की आशंका, दूरसंचार क्षेत्र में घट सकती है कंपनियों की संख्या","category":{"title":"Business","title_hn":"कारोबार","slug":"business"}}
ब्रोकरेज हाउसों की आशंका, दूरसंचार क्षेत्र में घट सकती है कंपनियों की संख्या
Mon, 18 Nov 2019 07:13 AM IST
संजीव कुमार झा
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Mon, 18 Nov 2019 07:13 AM IST
विज्ञापन
telecom
समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) देनदारी से जूझ रही दूरसंचार कंपनियों को यदि राहत नहीं मिली तो इस क्षेत्र में एक बार फिर समेकन देखने को मिलेगा। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने रविवार को अपनी एक रिपोर्ट में यह बात कही।
विज्ञापन
वहीं कुछ अन्य ब्रोकरेज हाउस ने कहा कि यदि सरकार दूरसंचार कंपनियों को राहत देती है तो उसका सुप्रीम कोर्ट से कोई टकराव नहीं होगा। इससे पहले वर्ष 2016 में रिलायंस जियो के आगाज के बाद वोडाफोन और आइडिया का विलय देखने को मिला था। इसके अलावा कई कंपनियां बंद हो गई थीं।
विज्ञापन
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने कहा कि यदि कोई खास राहत नहीं मिलती है तो उद्योग के स्वरूप मेें बदलाव देखने को मिलेगा। ब्रोकरेज हाउस ने कहा, ‘यदि नियामकीय लेवी, स्पेक्ट्रम भुगतान और फ्लोर प्राइसिंग जैसी राहत नहीं मिलती हैं तो भारतीय दूरसंचार उद्योग में एक बार फिर से समेकन देखने को मिल सकता है।’
विज्ञापन
उधर आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज ने कहा, ‘भले ही राहत के लिए सरकार से बातचीत चल रही है, लेकिन देखना होगा कि सरकार सेक्टर में सुधार और विशेषकर वोडाफोन आइडिया को कितनी राहत देती है।’
एसबीआई कैप सिक्योरिटीज ने कहा, ‘किसी भी स्थिति में वोडाफोन आइडिया को परिचालन जारी रखने के लिए बड़ी मात्रा में पूंजी लगानी होगी। हालांकि कंपनी कह चुकी है अब वह काफी हद तक सरकारी राहत पर निर्भर है।’ कंपनी को जुलाई-सितंबर तिमाही में 50,921 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था।