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SVB Bankruptcy: अमेरिकन बैंक के बंद होने से एक लाख लोगों के रोजगार पर संकट, 10 हजार स्टार्टअप्स भी मुसीबत में
Sun, 12 Mar 2023 03:14 PM IST
हिमांशु मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Sun, 12 Mar 2023 03:14 PM IST
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सिलिकॉन वैली बैंक (SVB) के दिवालिया होने से रोजगार जाने का संकट।
- फोटो :
सोशल मीडिया
विस्तार
टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स में निवेश करने वाले अमेरिकन कंपनी वाई कॉम्बिनेटर के मुखिया गैरी टैन ने सिलिकॉन वैली बैंक (SVB) के दिवालिया होने पर बड़ा दावा किया है। उन्होंने अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी जेनेट येलेन और अन्य प्रशासकों को एक चिट्ठी लिखकर अनुमान लगाया है कि बैंक के दिवालिया होने के चलते करीब एक लाख लोगों के रोजगार पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। मतलब एक लाख लोगों की नौकरी कभी भी जा सकती है। इसके अलावा दस हजार से ज्यादा स्टार्टअप्स पर इसका बड़ा असर पड़ेगा। बता दें कि वाई कॉम्बिनेटर ने भारत के करीब 200 से ज्यादा स्टार्टटप्स में निवेश किया है।
लोगों की नौकरी और स्टार्टटप्स बचाने के लिए गुहार
गैरी टैन ने चिट्ठी के जरिए कर्मचारियों की नौकरी और स्टार्टअप्स को इस संकट के समय बचाने के लिए सरकार से गुहार लगाई है। गैरी टैन की इस चिट्ठी को अब तक 1200 से ज्यादा कंपनियों के सीईओ और 56 हजार से ज्यादा कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संस्थापकों का समर्थन भी मिल चुका है। इस चिट्ठी में लिखा गया है, 'हम छोटे व्यवसायों, स्टार्टअप्स और बैंक में जमाकर्ताओं के कर्मचारियों पर तत्काल महत्वपूर्ण प्रभाव पर राहत और ध्यान देने के लिए कहते हैं।'
गैरी टैन ने चिट्ठी के जरिए कर्मचारियों की नौकरी और स्टार्टअप्स को इस संकट के समय बचाने के लिए सरकार से गुहार लगाई है। गैरी टैन की इस चिट्ठी को अब तक 1200 से ज्यादा कंपनियों के सीईओ और 56 हजार से ज्यादा कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संस्थापकों का समर्थन भी मिल चुका है। इस चिट्ठी में लिखा गया है, 'हम छोटे व्यवसायों, स्टार्टअप्स और बैंक में जमाकर्ताओं के कर्मचारियों पर तत्काल महत्वपूर्ण प्रभाव पर राहत और ध्यान देने के लिए कहते हैं।'
37 हजार से ज्यादा छोटे व्यवसायों के बैंक खाते में
नेशनल वेंचर कैपिटल एसोसिएशन (NVCA) के आंकड़ों के अनुसार, सिलिकॉन वैली बैंक में 37,000 से अधिक छोटे व्यवसायियों के खाते हैं। जिनमें 250,000 डॉलर से अधिक रकम जमा है। बैंक के दिवालिया होने के बाद ये शेष राशि अब उनके लिए उपलब्ध नहीं है। इसके चलते कंपनियों और छोटे व्यवसायिकों को काफी नुकसान उठाना पड़ेगा।
गैरी के अनुसार, ज्यादातर स्टार्टअप कंपनियां सिलिकॉन वैली बैंक में ही अपना खाता रखते थे। अब चूंकि बैंकों में जमा राशि नहीं मिल पाएगी। ऐसे में अगले 30 दिनों में पेरोल चलाने के लिए स्टार्टअप्स के पास कैश नहीं होगा। कर्मचारियों सैलरी देने का भी संकट उभरकर सामने आ गया है। 10 हजार से ज्यादा स्टार्टअप्स पर इसका सीधा असर पड़ेगा। इसलिए अगर एक छोटा स्टार्टअप्स 10 लोगों को भी रोजगार देता है तो 10 हजार के हिसाब से सीधे-सीधे एक लाख लोगों के रोजगार पर संकट है। कंपनियां बंद हो जाएंगी और लोगों की नौकरी चली जाएगी।
नेशनल वेंचर कैपिटल एसोसिएशन (NVCA) के आंकड़ों के अनुसार, सिलिकॉन वैली बैंक में 37,000 से अधिक छोटे व्यवसायियों के खाते हैं। जिनमें 250,000 डॉलर से अधिक रकम जमा है। बैंक के दिवालिया होने के बाद ये शेष राशि अब उनके लिए उपलब्ध नहीं है। इसके चलते कंपनियों और छोटे व्यवसायिकों को काफी नुकसान उठाना पड़ेगा।
गैरी के अनुसार, ज्यादातर स्टार्टअप कंपनियां सिलिकॉन वैली बैंक में ही अपना खाता रखते थे। अब चूंकि बैंकों में जमा राशि नहीं मिल पाएगी। ऐसे में अगले 30 दिनों में पेरोल चलाने के लिए स्टार्टअप्स के पास कैश नहीं होगा। कर्मचारियों सैलरी देने का भी संकट उभरकर सामने आ गया है। 10 हजार से ज्यादा स्टार्टअप्स पर इसका सीधा असर पड़ेगा। इसलिए अगर एक छोटा स्टार्टअप्स 10 लोगों को भी रोजगार देता है तो 10 हजार के हिसाब से सीधे-सीधे एक लाख लोगों के रोजगार पर संकट है। कंपनियां बंद हो जाएंगी और लोगों की नौकरी चली जाएगी।
जानिए क्या है पूरा मामला?
अमेरिकी नियामकों ने शुक्रवार को SVB को बंद करने की घोषणा कर दी। कैलफोर्निया में बैंकिंग नियामकों ने बैंको बंद करने के बाद फेडरल डिपॉजिट इन्श्योरेंश कॉरपोरेशन (FDIC) को बैंक के असेट रिसिवर के तौर पर नियुक्त किया है। इस खबर को पूरी दुनिया के बाजार में ग्लोबल मंदी की आहट के रूप में देखा जा रहा है।
दरअसल, सेंटा क्लारा स्थित एसवीबी की परेशानी तब शुरू हुई जब उसकी मूल कंपनी एसवीबी फाइनेंशियल ग्रुप ने अपने पोर्टफोलियो से 21 अरब डॉलर की प्रतिभूतियों को बेचने की घोषणा की। कंपनी ने कहा कि उसकी वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए 2.25 अरब डॉलर के शेयरों की बिक्री की जा रही है। विश्लेषकों का कहना है कि स्टार्टअप उद्योग में व्यापक मंदी के कारण बैंक में उच्च जमा निकासी की स्थिति बनी जिसके परिणामस्वरूप यह कदम उठाया गया। फेड की ओर से ब्याज दरों में बढ़ोतरी के बाद एसवीबी ने ब्याज से होने वाली आमदनी में बड़ी गिरावट की आशंका जताई थी। दूसरी ओर फेड की ओर से ब्याज दरें बढ़ने से भी एसवीबी बैंक का गणित गड़बड़ हो गया। आखिरकार SVB के बंद होने का सबसे बड़ा कारण उसके निवेशकों की ओर से एक साथ ही बैंक से पैसा निकालना रहा। माना जा रहा है कि निवेशकों ने बैंक के डूबने के डर से एक साथ ही बड़ी बिकवाली कर दी थी।
SVB के पास 2021 में 189 अरब डॉलर का डिपॉजिट था। बैंक ने इस पैसे से पिछले 2 वर्षों के दौरान अरबों डॉलर के बॉन्ड खरीदे थे लेकिन इस निवेश पर उसे कम ब्याज दरों के कारण पर्याप्त रिटर्न नहीं मिला। इसी बीच फेडरल रिजर्व बैंक ने टेक कंपनियों के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर दी। इससे बैंक का संकट और बढ़ गया। सिलिकॉन वैली बैंक (एसवीबी) एक हफ्ते पहले दो अरब डॉलर से अधिक की पूंजी जुटाने में असफल रहा था। उसके बाद वह 2008 के वित्तीय संकट के बाद धराशाई होने वाला अमेरिका का सबसे बड़ा बैंक बन गया। संकट के बीच कंपनी के प्रमुख ग्रेग बेकर ने शुक्रवार को कर्मचारियों को एक वीडियो संदेश में "अविश्वसनीय रूप से कठिन" बीते 48 घंटों के बारे में बात की और कर्मचारियों को कंपनी के वर्तमान हालात के बारे में बताया। सिलिकॉन वैली बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बेकर तीन दशक पहले कंपनी में ऋण अधिकारी के रूप में शामिल हुए थे। उन्होंने 2008 के वित्तीय संकट के बाद बैक को चलाने में अहम भूमिका निभाई थी। उन्हें 2011 में एसवीबी फाइनेंशियल ग्रुप के अध्यक्ष और सीईओ नियुक्त किया गया।
अमेरिकी नियामकों ने शुक्रवार को SVB को बंद करने की घोषणा कर दी। कैलफोर्निया में बैंकिंग नियामकों ने बैंको बंद करने के बाद फेडरल डिपॉजिट इन्श्योरेंश कॉरपोरेशन (FDIC) को बैंक के असेट रिसिवर के तौर पर नियुक्त किया है। इस खबर को पूरी दुनिया के बाजार में ग्लोबल मंदी की आहट के रूप में देखा जा रहा है।
दरअसल, सेंटा क्लारा स्थित एसवीबी की परेशानी तब शुरू हुई जब उसकी मूल कंपनी एसवीबी फाइनेंशियल ग्रुप ने अपने पोर्टफोलियो से 21 अरब डॉलर की प्रतिभूतियों को बेचने की घोषणा की। कंपनी ने कहा कि उसकी वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए 2.25 अरब डॉलर के शेयरों की बिक्री की जा रही है। विश्लेषकों का कहना है कि स्टार्टअप उद्योग में व्यापक मंदी के कारण बैंक में उच्च जमा निकासी की स्थिति बनी जिसके परिणामस्वरूप यह कदम उठाया गया। फेड की ओर से ब्याज दरों में बढ़ोतरी के बाद एसवीबी ने ब्याज से होने वाली आमदनी में बड़ी गिरावट की आशंका जताई थी। दूसरी ओर फेड की ओर से ब्याज दरें बढ़ने से भी एसवीबी बैंक का गणित गड़बड़ हो गया। आखिरकार SVB के बंद होने का सबसे बड़ा कारण उसके निवेशकों की ओर से एक साथ ही बैंक से पैसा निकालना रहा। माना जा रहा है कि निवेशकों ने बैंक के डूबने के डर से एक साथ ही बड़ी बिकवाली कर दी थी।
SVB के पास 2021 में 189 अरब डॉलर का डिपॉजिट था। बैंक ने इस पैसे से पिछले 2 वर्षों के दौरान अरबों डॉलर के बॉन्ड खरीदे थे लेकिन इस निवेश पर उसे कम ब्याज दरों के कारण पर्याप्त रिटर्न नहीं मिला। इसी बीच फेडरल रिजर्व बैंक ने टेक कंपनियों के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर दी। इससे बैंक का संकट और बढ़ गया। सिलिकॉन वैली बैंक (एसवीबी) एक हफ्ते पहले दो अरब डॉलर से अधिक की पूंजी जुटाने में असफल रहा था। उसके बाद वह 2008 के वित्तीय संकट के बाद धराशाई होने वाला अमेरिका का सबसे बड़ा बैंक बन गया। संकट के बीच कंपनी के प्रमुख ग्रेग बेकर ने शुक्रवार को कर्मचारियों को एक वीडियो संदेश में "अविश्वसनीय रूप से कठिन" बीते 48 घंटों के बारे में बात की और कर्मचारियों को कंपनी के वर्तमान हालात के बारे में बताया। सिलिकॉन वैली बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बेकर तीन दशक पहले कंपनी में ऋण अधिकारी के रूप में शामिल हुए थे। उन्होंने 2008 के वित्तीय संकट के बाद बैक को चलाने में अहम भूमिका निभाई थी। उन्हें 2011 में एसवीबी फाइनेंशियल ग्रुप के अध्यक्ष और सीईओ नियुक्त किया गया।