भारतीय अर्थव्यवस्था पर कोरोनावायरस के प्रभाव पर गौर करेगा रिजर्व बैंक
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रिजर्व बैंक अप्रैल में होने वाली नए वित्त वर्ष की पहली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) बैठक में रेपो रेट पर कोई भी फैसला करने से पहले कोरोना वायरस के भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभावों का आकलन करेगा। सिंगापुर के निवेश बैंक डीबीएस ने मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में यह अनुमान जताया है।
‘भारत : वृद्धि एवं महंगाई लक्ष्य की समीक्षा’ नाम से जारी रिपोर्ट में डीबीएस की अर्थशास्त्री राधिका राव ने कहा कि भारत पर कोरोना वायरस का दोतरफा असर दिखा है। एक तरफ तो चीन से आपूर्ति शृंखला प्रभावित हुई है, तो दूसरी ओर घरेलू उद्योगों पर असर हुआ जो आयात के लिए चीन पर निर्भर थे। अगर यह सिरदर्द अप्रैल-जून तक जारी रहता है तो उत्पादकों पर संकट बढ़ेगा जिससे उत्पाद की कीमतों में भी उछाल आ सकता है। ऐसे में एमपीसी कोई भी फैसला करने से पहले कोरोना संकट के खिलाफ उठाए गए कदमों की भी समीक्षा करेगा।
रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में विकास की गति सुस्त रहने के संकेत मिल रहे हैं और यह अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 4.4 फीसदी तक जा सकती है। हालांकि, इसके बाद विकास दर के रफ्तार पकड़ने की उम्मीद है। लगातार घटती इस रफ्तार का असर नीति निर्माताओं के फैसले पर दिखेगा।
महंगाई का भी रहेगा दबाव
रिपोर्ट में कहा गया है कि खुदरा महंगाई में इजाफे की वजह से भी रिजर्व बैंक पर दबाव रहेगा और अगर इसका आंकड़ा तय लक्ष्य से नीचे नहीं आता तो किसी बदलाव की उम्मीद कम ही है। यही कारण रहा है कि पिछली दो एमपीसी बैठक में केंद्रीय बैंक ने आधार दरों में कोई बदलाव नहीं किया और पूर्व में की गई कटौती के असर को ही आगे बढ़ाने पर जोर दिया। इससे पहले रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने भी कहा था कि एमपीसी कोई भी फैसला करने से पहले खुदरा महंगाई के मौजूदा हालात की समीक्षा करेगी।