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आरबीआई: 5000 करोड़ रुपये से ज्यादा पूंजी की हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों में भी आंतरिक ऑडिट जरूरी

Sat, 12 Jun 2021 07:14 AM IST
Kuldeep Singh बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Sat, 12 Jun 2021 07:14 AM IST
सार

  • रिकॉर्ड: विदेशी मुद्रा भंडार पहली बार 600 अरब डॉलर के पार
  • 30 जून 2022 से लागू होगा नया नियम 
  • लॉकडाउन से लोन वसूली में 15 फीसदी आई गिरावट

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RBI says internal audit necessary even in housing finance companies with a capital of more than 5000 crore rupees
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विस्तार

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को जोखिम आधारित आंतरिक ऑडिट (आरबीआईए) व्यवस्था का दायरा बढ़ाते हुए इसमें कुछ आवास वित्त कंपनियों को भी शामिल कर दिया। इसका मकसद उनकी आंतरिक ऑडिट व्यवस्था की गुणवत्ता तथा प्रभाविता को और बेहतर बनाना है।

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उल्लेखनीय है कि आरबीआई ने इस साल फरवरी में परिपत्र जारी कर चुनिंदा गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और शहरी सहकारी बैंकों के लिये 31 मई, 2022 से आरबीआईए रूपरेखा को अनिवार्य किया था। अब केंद्रीय बैंक ने शुक्रवार को एक और परिपत्र जारी कर एनबीएफसी के प्रावधानों को आवास वित्त कंपनियों पर भी लागू कर दिया है।

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30 जून 2022 से लागू होगा नया नियम 

आरबीआई ने कहा कि प्रावधान उन सभी आवास वित्त कंपनियों (एचएफसी) पर लागू होंगे, जो जमा स्वीकार करती हैं। भले ही उनका आकार कुछ भी हो। जबकि जमा स्वीकार नहीं करने वाली वही एचएफसी इसके दायरे में आएंगी, जिनकी संपत्ति 5,000 करोड़ रुपये और उससे अधिक है। ऐसे एचएफसी से आरबीआईए रूपरेखा 30 जून, 2022 तक तैयार करने को कहा गया है।

आरबीआईए एक प्रभावी ऑडिट पद्धति है जो एक संगठन के समग्र जोखिम प्रबंधन ढांचे को जोड़ती है। यह संगठन के आंतरिक नियंत्रण, जोखिम प्रबंधन तथा संचालन व्यवस्था से संबंधित प्रणालियों एवं प्रक्रियाओं की गुणवत्ता और प्रभावशीलता पर निदेशक मंडल तथा वरिष्ठ प्रबंधन को भरोसा प्रदान करती है।

आरबीआई के फरवरी में जारी परिपत्र के अनुसार आंतरिक ऑडिट कार्य को व्यवस्थित और अनुशासित दृष्टिकोण का उपयोग करके संगठन के संचालन, जोखिम प्रबंधन तथा नियंत्रण प्रक्रियाओं के समग्र सुधार को लेकर व्यापक रूप से मूल्यांकन और योगदान करना चाहिए। इसमें कहा गया था कि यह मजबूत कंपनी संचालन व्यवस्था का एक अभिन्न हिस्सा है और इसे रक्षा की तीसरी लाइन माना जाता है।

रिकॉर्ड : विदेशी मुद्रा भंडार पहली बार 600 अरब डॉलर के पार

रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को बताया कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार पहली बार 600 अरब डॉलर के पहुंचा है। 4 जून को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 6.84 अरब डॉलर बढ़ा और कुल पूंजी 605.008 अरब डॉलर पहुंच गई। सबसे ज्यादा इजाफा डॉलर, यूरो जैसी विदेशी मुद्रा में हुआ है, जो 7.36 अरब डॉलर बढ़कर 560.89 अरब डॉलर हो गई। हालांकि, इस दौरान सोने के भंडार में कमी आई। सोना 50.2 करोड़ डॉलर गिरकर 37.60 अरब डॉलर पर आ गया।

इससे पहले 28 मई को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 5.27 अरब डॉलर बढ़कर 598 अरब डॉलर के पार पहुंचा था। हालांकि, विदेशी मुद्रा भंडार में इजाफे के बावजूद अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भारत के विशेष निकासी अधिकार को 10 लाख डॉलर घटाकर 1.51 अरब डॉलर कर दिया है। इसके अलावा आईएमएफ में भारत के रिजर्व पूंजी को भी 1.6 करोड़ डॉलर घटाकर 5 अरब डॉलर कर दिया गया है। 

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विदेशी मुद्रा भंडार के मायने

  • मजबूत अर्थव्यवस्था के लिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार बेहद जरूरी होता है, जिसका उपयोग जरूरत पर देनदारियां चुकाने में किया जा सकता है। 
  • आर्थिक संकट के समय आयात को समर्थन दिया जा सकता है, मौजूदा पूंजी से करीब 18 महीने के आयात का भुगतान किया जा सकेगा। 
  • विदेशी मुद्रा का बड़ा भंडार निवेशकों को भी आकर्षित करता है, क्योंकि उनकी पूंजी डूबने का जोखिम कम हो जाता है और वैश्विक निवेश में तेजी आती है। 
  • मुद्रा बाजार को स्थिर रखने में इसकी प्रभावी भूमिका होती है। आरबीआई डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती लाने के लिए भी विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ा रहा है।

जमा और कर्ज बांटने में बैंक ऑफ महाराष्ट्र की वृद्धि सबसे तेज

महामारी से प्रभावित पिछले वित्तवर्ष में कर्ज बांटने और जमा लेने में बैंक ऑफ महाराष्ट्र (बीओएम) की वृद्धि दर सबसे तेजी रही। 2020-21 में बीओएम की कर्ज बांटने की वृद्धि दर 13.45 फीसदी बढ़कर 1.07 लाख करोड़ पहुंच गई। इसके बाद पंजाब एंड सिंध बैंक की कर्ज वृद्धि दर 8.39 फीसदी और कुल लोन बुक 67,811 करोड़ हो गई। अगर जमा की बात करें, तो बीओएम में 16 फीसदी तेजी आई। इस दौरान एसबीआई की जमा वृद्धि दर 13.56 फीसदी रही।

हालांकि, एसबीआई का कुल जमा बीओएम के मुकाबले 21 गुना ज्यादा है। बीओएम का कुल जमा जहां 1.74 लाख करोड़ है, वहीं एसबीआई के पास 36.81 लाख करोड़ की जमा पूंजी है। बीओएम में सिर्फ चालू और बचत खाते की जमाओं में ही 24.47 फीसदी वृद्धि हुई, जो सरकारी बैंकों में सबसे ज्यादा है। इस मामले में सेंट्रल बैंक दूसरे स्थान पर है, जहां चालू-बचत खाते में कुल जमा 11.46 फीसदी बढ़कर 1.61 लाख करोड़ हो गया है।

बीओएम का कुल कारोबार भी 14.98 फीसदी बढ़कर 2.81 लाख करोड़ पहुंच गया है। 2020-21 में बैंक का शुद्ध मुनाफा 42 फीसदी बढ़कर 550.25 करोड़ हो गया। गौरतलब है कि सरकार बैंक ऑफ महाराष्ट्र, सेंट्रल बैंक और पंजाब एंड सिंध बैंक में हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में है। 

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