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2019 की पहली तिमाही तक खत्म हो सकती है बैंकों में NPA की समस्या
एजेंसी/ नई दिल्ली
Updated Sun, 16 Jul 2017 10:20 PM IST
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भारतीय रिजर्व बैंक
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बैकिंग नियम (संशोधन) अध्यादेश से मिली ताकत के बाद आरबीआई बैंकों के आठ लाख करोड़ रुपये के फंसे हुए कर्ज की समस्या मार्च 2019 तक खत्म करने का कदम उठा सकता है। इससे भारतीय बैंकों की वित्तीय स्थिति काफी हद तक सुधर जाएगी।
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एसोचैम के एक अध्ययन में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही में एनपीए की समस्या सुलझा ली जाएगी। दरअसल आर्थिक चक्र में बदलाव और सरकार की ओर से कुछ अच्छे फैसले आरबीआई की ओर से फंसे हुए कर्जे की समस्या के समाधान के संबंध में उठाए गए कदम में मददगार साबित होंगे। इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्शी कोड मैकेनिज्म के तहत एनपीए की समस्या सुलझाई जा सकती है। लेकिन यह देखना होगा कि बैंकों के भारी-भरकम फंसे हुए कर्ज कितनी जल्दी इसकी बैलेंसशीट से गायब होते हैं।
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इस वक्त बैंकों के फंसे हुए कर्ज की समस्या बेहद गंभीर है। इसमें कोई शक नहीं है कि एनपीए की समस्या बैंकों खास कर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की वित्तीय सेहत पर बेहद भारी पड़ रही है। मसलन वर्ष 2016-17 में सार्वजनिक क्षेत्र के 27 बैंकों का परिचालन लाभ 1.5 लाख करोड़ रुपये था। लेकिन एनपीए कम करने के लिए गए गए प्रावधान के कारण यह लाभ घट कर 574 करोड़ रुपये का रह गया।
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बैंकों की बैलेंसशीट देखने पर पता चलता है कि उनके पास कंपनियों का नया कर्ज देने की क्षमता नहीं है। प्राइवेट सेक्टर में निवेश की कमी को रफ्तार देने के लिए कॉरपोरेट सेक्टर के लिए नया कर्ज जरूरी है।