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बिना आधार दिए नहीं जारी होगा छोटी राशि का भी ड्रॉफ्ट, अब छपेगा बनवाने वाले का नाम भी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
Updated Thu, 12 Jul 2018 07:56 PM IST
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काले धन को सफेद बनाने के लिए डिमांड ड्राफ्ट या बैंकर्स चेक का रास्ता भी अब बंद हो गया है। रिजर्व बैंक ने सभी बैंकों से कहा है कि आगामी 15 सितंबर से डिमांड ड्राफ्ट पर अब बनवाने वाले का नाम भी लिखें। इसके साथ ही एक रुपये से लेकर के 50 हजार रुपये तक का ड्राफ्ट बनवाने पर भी आधार नंबर देना होगा।
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Incorporation of Name of the Purchaser on the Face of the Demand Drafthttps://t.co/vJ9fLYcMZ8
— ReserveBankOfIndia (@RBI) July 12, 2018
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बृहस्पतिवार को रिजर्व बैंक की तरफ से सभी बैंकों के प्रमुखों को लिखे पत्र में कहा गया है कि डिमांड ड्राफ्ट के सहारे भी काले धन को सफेद बनाया जा सकता है। इस संभावित मार्ग को भी अब बंद करने का फैसला किया गया है। अगले 15 सितंबर से सभी ड्राफ्ट, पेआर्डर, बैंकर्स चेक आदि पर बनवाने वाले का नाम भी अंकित किया जाए। रिजर्व बैंक इससे पहले भी ड्राफ्ट के जरिये काले धन को सफेद बनाने से रोकने के लिए 50 हजार रुपये से ज्यादा रकम के ड्राफ्ट को नकदी से नहीं बल्कि खाते से बनवाना अनिवार्य कर दिया है।
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देना होगा आधार
काले धन पर शिकंजा कसने के लिए बैंकों में ड्रॉफ्ट के लिए भी आधार नंबर की अनिवार्यता सख्ती से लागू कर दी गई है। अब ग्राहक चाहे कितनी छोटी धनराशि का ड्रॉफ्ट बनवाए, उसे बैंक को अपनी यूनिक आईडी देनी होगी। एसबीआई मेन ब्रांच के अफसरों का कहना है कि इसे पूरी कड़ाई के साथ से लागू कर दिया गया है।
50 हजार से कम के लिए देना होगा आधार
पहले 50 हजार से कम धनराशि के ड्राफ्ट बनाने में आधार की जरूरत नहीं होती थी। इसी कारण ड्राफ्ट काले धन के खेल का हिस्सा बन गए। बैंक अफसर कहते हैं कि चेक का भुगतान तो अकाउंट से होता था लेकिन अगर कोई छोटी धनराशि के कई ड्राफ्ट बनवाकर कहीं भुगतान कर देता था तो बैंकों के लिए यह जानना मुश्किल होता था कि किसी व्यक्ति ने कितने ड्राफ्ट बनवाकर कितना पैसा ट्रांसफर किया है।
इस पर शिकंजा कसने के लिए बैंकों ने ड्रॉफ्ट को भी आधार से जोड़ दिया है। अब यह जानना आसान होगा कि एक व्यक्ति ने कितनी धनराशि के कितने ड्राफ्ट बनवाए हैं। यह नियम लागू होने के बाद बैंकों में स्टाफ और ग्राहकों के बीच तनातनी भी हो रही है।
50 हजार से कम के लिए देना होगा आधार
पहले 50 हजार से कम धनराशि के ड्राफ्ट बनाने में आधार की जरूरत नहीं होती थी। इसी कारण ड्राफ्ट काले धन के खेल का हिस्सा बन गए। बैंक अफसर कहते हैं कि चेक का भुगतान तो अकाउंट से होता था लेकिन अगर कोई छोटी धनराशि के कई ड्राफ्ट बनवाकर कहीं भुगतान कर देता था तो बैंकों के लिए यह जानना मुश्किल होता था कि किसी व्यक्ति ने कितने ड्राफ्ट बनवाकर कितना पैसा ट्रांसफर किया है।
इस पर शिकंजा कसने के लिए बैंकों ने ड्रॉफ्ट को भी आधार से जोड़ दिया है। अब यह जानना आसान होगा कि एक व्यक्ति ने कितनी धनराशि के कितने ड्राफ्ट बनवाए हैं। यह नियम लागू होने के बाद बैंकों में स्टाफ और ग्राहकों के बीच तनातनी भी हो रही है।