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आयकर का नोटिस मिलने पर क्या करें
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Tue, 04 Jun 2013 02:04 AM IST
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आयकर विभाग की ओर से किसी भी तरह का नोटिस मिलने पर करदाताओं को यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि वह नोटिस का पालन करे और उसमें मांगे गए दस्तावेज निर्धारित समय पर जमा कराएं।
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करदाता को नोटिस में उठाए गए तकनीकी मामलों को समझने के लिए कर विशेषज्ञ या चार्टर्ड अकाउंटेंट की सलाह भी लेनी चाहिए।
सही तरीके से भरें रिटर्न
आयकर विभाग की चिट्ठी से बचने का सबसे सरल उपाय है वित्तीय नियमों का पालन और सही तरीके से अपना रिटर्न भरना।
अगर हर कोई चाहे वह नौकरीशुदा हो या कारोबारी, सही तरीके से अपना रिटर्न भरे, तो चिट्ठी पाने की नौबत नहीं आएगी।
अधिकांश लोग सिर्फ कम्प्लायंस के लिए रिटर्न भरते हैं और उसमें अपने लेन-देन की पूरी जानकारी नहीं देते। आयकर से चिट्ठी आने का यही सबसे बड़ा कारण है।
पैन से पहुंचती है जानकारी
बीते करीब तीन दशक से सरकार आयकर वसूली को सशक्त बनाने के लिए लगातार कोशिश कर रही है। आयकर विभाग ने कई सालों की मेहनत के बाद एक बड़ा डाटा बेस तैयार किया है।
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इस डाटा के मूल में हैं पैन कार्ड। सभी करदाताओं के पास उनके पैन कार्ड हैं और उन कार्ड के खास नंबर हैं। हर व्यक्ति का पैन अपने आप में अलग है।
यह पैन करदाताओं के अलावा अन्य नागरिकों के पास भी है। अगर व्यक्ति नौकरीशुदा है, तो उसके लिए टीडीएस काटे जाने की व्यवस्था है।
यानी, नियोक्ता कर्मचारी के कर स्लैब के हिसाब से कर काट कर आयकर विभाग के पास जमा करा देता है। यह आयकर सरकार के खाते में जाने के साथ ही उस कर्मचारी के पैन नंबर से जुड़े डाटा बेस में चला जाता है।
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सभी ब्यौरा पैन के डाटा बेस में दर्ज
अगर वह व्यक्ति नौकरी के अलावा कोई अन्य बड़े वित्तीय लेन-देन करता है, तो उसमें भी उसे अपने पैन नंबर का उल्लेख करना होगा। सभी लेन-देन के ब्यौरा पैन कार्ड के डाटा बेस में दर्ज हो जाता है।
मसलन, अगर किसी ने कोई जायदाद खरीदी है, तो उसमें उसे अपने पैन नंबर का उल्लेख करना होगा और ऑटोमेटिक रूट से यह आंकड़ा पैन के डाटा में दर्ज हो जाता है।
यह उम्मीद की जाती है कि व्यक्ति अपनी सकल कमाई का रिटर्न फाइल करे। अगर वह ऐसा नहीं करता है, तो आयकर विभाग से उसे चिट्ठी मिल सकती है।
केवाईसी के तहत पैन देना जरूरी
इसी तरह, बैंक खातों में केवाईसी के तहत पैन देना जरूरी है। पैन के जरिए एक खास रकम से अधिक की रिपोर्टिंग आयकर विभाग के पास पहुंचती है।
अगर वह रकम रिटर्न में नहीं दिखती, तो आयकर विभाग खाता धारक के पास चिट्ठी भेज सकता है। इस तरह से पैन वह माध्यम है, जिसके जरिए सरकार के पास सभी बड़े वित्तीय लेन-देन की जानकारी पहुंचती है।
इसके लिए डाटा-बेस तैयार करने, सुपर कंप्यूटर लगाने और सॉफ्टवेयर तैयार करने पर बीते तीन दशकों से लगातार काम चल रहा है।