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छोटी बचत करना चाहते हैं तो अपनाएं ये उपाय
निर्मल रेवरिया (एडलवाइस फाइनेंशियल प्लानिंग)
Updated Mon, 01 Apr 2013 03:28 PM IST
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जब भी हम डाकघर की छोटी बचत योजनाओं में निवेश शुरू करते हैं या उसके बारे में सोचते हैं, तो यह सवाल साथ-साथ उठता है कि क्या हमारी यह छोटी बचत योजनाएं भविष्य में हमारे लिए फायदेमंद और सुरक्षित साबित होंगी।
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आमतौर पर प्रत्येक बजट या छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में संशोधन की घोषणा के बाद भी निवेशक के मन में यह सवाल उठता है कि क्या डाक घर की छोटी बचत योजनाएं हमारे पैसे की मेरिट को बनाए रखने में सक्षम हैं।
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छोटी बचत योजनाओं को लेकर उठ रहे सवालों के बावजूद इनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह ब्याज दरों में बदलाव की परवाह किए बगैर निवेशकों को टैक्स बेनिफिट के साथ सुनिश्चित रिटर्न देती हैं और इसी खासियत के जरिए निवेशक को निवेश बनाए रखने के लिए आकर्षित करती हैं।
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लेकिन यहां एक सवाल यह भी है कि क्या सिर्फ इसी एक फायदे के लिए यह छोटी बचत योजनाएं निवेशकों के लिए हितकारी हैं।
दरअसल, देखा जाए तो इन योजनाओं में कर लाभ व सुनिश्चित रिटर्न जैसा दोहरे लाभ के विकल्प की अनदेखी नहीं की जा सकती है। इसलिए, उन्हें इनमें निवेश के अवसरों को कम महत्व नहीं दिया जाना चाहिए।
हालांकि, नए वित्त वर्ष यानी 1 अप्रैल से डाकघर की छोटी बचत योजनाओं के लिए अच्छी खबर नहीं है। सरकार ने 1 अप्रैल 2013 से अधिकांश योजनाओं पर ब्याज दरों में 0.1 फीसदी कटौती कर दी है।
संशोधन के बाद अब अगले 12 माह के लिए पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी पीपीएफ पर निवेशकों को 8.7 फीसदी की दर से ब्याज मिलेगा। पहले यह 8.8 फीसदी थी।
पांच साल की सावधि जमा पर भी ब्याज दरें 8.5 फीसदी से घटाकर 5.4 फीसदी कर दी गई हैं। इसके अलावा, पांच साल की रेकरिंग डिपाजिट सहित कुछ अन्य योजनाओं पर भी ब्याज दरों में कमी की गई है।
दरों में इस बदलाव के बाद निवेशक इस बात को लेकर अधिक सतर्कता बरतते हैं कि क्या छोटी बचत योजनाएं अभी भी निवेश के लिए मुफीद हैं। हमारा मानना है कि पीपीएफ और एनएससी जैसी योजनाओं का निवेशकों के टैक्स प्लानिंग पोर्टफोलियो के लिए काफी महत्व है।
कम जोखिम की क्षमता वाले निवेशक अपने टैक्स सेविंग पोर्टफोलियो में इन योजनाओं को अधिक तरजीह दी दे सकते हैं। दूसरी ओर यदि निवेशक में जोखिम लेने की क्षमता अधिक है तो वह इन योजनाओं में अपने टैक्स सेविंग पोर्टफोलियो का हिस्सा कम रख कर अन्य विकल्प अपना सकते हैं।
टैक्स प्लानिंग निवेशक के लिए एक सबसे अहम बात होती है। यह जान लें कि टैक्स प्लानिंग के लिए निवेश करना नियमित निवेश करने से अलग नहीं हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर होते हैं रिस्क प्रोफाइल, इनवेस्टमेंट का उद्देश्य और एसेट एलोकेशन। हम यहां दो बचत योजनाओं में निवेश और टैक्स सेविंग के नजरिए से निवेश के अवसर को समझ सकते हैं।
पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ)
पीपीएफ में निवेश की अवधि 15 साल की होती है। टैक्स बेनिफिट के लिए इसमें न्यूनतम 500 रुपये का निवेश अनिवार्य है और इसमें अधिकतम 1,00,000 रुपये सालाना निवेश किया जा सकता है।
पीपीएफ में लिक्विडिटी का स्कोर अच्छा नहीं कहा जा सकता है। क्योंकि, इसमें सात वित्तीय वर्ष में निवेश के बाद ही पैसे वापस निकालने की अनुमति होती है। वहीं, टैक्स बेनिफिट के नजरिए से पीपीएफ कुछ दुर्लभतम निवेश विकल्पों में से एक है।
इसमें निवेश पर धारा 80सी के तहत कर कटौती का लाभ मिलता है। पीपीएफ पर मिलने वाला ब्याज भी करमुक्त है। साथ ही पीपीएफ से मिलने वाला रिटर्न भी पूरी तरह टैक्स फ्री होता है।
राष्ट्रीय बचत पत्र (एनएससी)
एनएससी में कुल छह साल के लिए निवेश करना होता है। निवेश के लिए न्यूनतम राशि 100 रुपये है और अधिकतम राशि की कोई सीमा नहीं है। इस पर मिलने वाले रिटर्न की दर में समय-समय पर संशोधन होता रहता है। इसमें ब्याज की गणना छमाही आधार पर की जाती है।
एनएससी में भी लिक्विडिटी का स्कोर बहुत अधिक अच्छा नहीं है। निवेश की परिपक्वता पर ही ब्याज मिलता है। इसमें कुछ परिस्थितियों जैसे कि निवेशक की मृत्यु, जब्ती की कार्रवाई होने या कोर्ट के आदेश के तहत ही समय से पहले निकासी की अनुमति है।
टैक्स बेनिफिट में एनएससी का रिकॉर्ड पीपीएफ जैसा नहीं है। एनएससी में निवेश पर ब्याज से होने वाली आमदनी करयोग्य होती है। हालांकि सालाना अर्जित ब्याज को फिर से निवेश के लिए माना जाता है इसलिए इसपर धारा 80सी के तहत कर में कटौती का लाभ मिलता है।
इस तरह, देखा जाए तो छोटी-छोटी बचत योजनाओं के अपने-अपने फायदे हैं। यह हमारी जरूरत, उद्देश्य और जोखिम उठाने की क्षमता पर निर्भर करता है कि हमें किस योजना के साथ जाना चाहिए। साथ ही छोटी बचत योजनाएं अभी भी निवेश के लिए उचित विकल्प हैं, इस सवाल का जवाब भी इसी आधार पर मिल सकता है।
लघु जमा योजनाओं पर ब्याज दरें (1 अप्रैल से प्रभावी दर)
0.1% ब्याज दर की कमी हुई इन जमा योजनाओं में
पीपीएफ---8.7%
5 साल का एनएससी---8.5%
10 साल का एनएससी---8.8%
5 साल का एमआईएस---8.4%
5 साल का एससीएसएस---9.2%
2 साल की सावधि जमा---8.2%
3 साल की सावधि जमा---8.3%
5 साल की सावधि जमा---8.4%
5 साल की आवर्ती जमा---8.3%
इनमें ब्याज दर यथावत
बचत खाता जमा---4.0%
1 साल की सावधि जमा---8.2%