निवेश के मंत्र 47: जान लें क्लबिंग ऑफ इनकम के प्रावधान, वरना देना पड़ सकता है टैक्स
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करदाता टैक्स बचाने के लिए कोई ना कोई उपाय सोचते रहते हैं। वैसे तो करदाताओं को अपनी इनकम पर टैक्स देना ही होता है, लेकिन कई बार वे इसे कम करने के लिए अपनी इनकम का कुछ हिस्सा या कोई संपत्ति जिससे इनकम होती है, अपने जीवनसाथी या नाबालिक बच्चों के नाम ट्रांसफर कर देते हैं। ऐसी स्थितियों के लिए इनकम टैक्स एक्ट में क्लबिंग ऑफ इनकम का प्रावधान लागू किया गया है। ऐसा करने पर आयकर विभाग आपके खिलाफ टैक्स चोरी की कार्यवाही कर सकता है। आइए जानते हैं कैसे-
उदाहरण से समझें
अगर आप कम टैक्स का भुगतान करने के लिए अपनी संपत्ति पत्नी या नाबालिक बच्चों के नाम ट्रांसफर कर देते हैं, तो भी यह आय आपकी कुल आय में शामिल की जा सकती है। करदाता उस आय पर भी टैक्स देने के लिए उत्तरदायी होते हैं क्योंकि इसपर क्लबिंग के प्रावधान लागू होंगे। अगर किसी संपत्ति का खंडन करने योग्य ट्रांसफर किया जाता है, तो उससे होने वाली आय करदाता की कुल आय में शामिल की जाती है।
आगे जानते हैं क्लबिंग से बचने का उपाय और विभिन्न प्रावधानों के बारे में।
क्लबिंग से बचने का उपाय
अगर पत्नी के नाम पर ऐसी संपत्ति है जिससे आय नहीं होती है और पति के नाम पर ऐसी संपत्ति है जिससे करदाता को आय होती है और दोनों का मूल्य समान है, तो दोनों आपस में इसे बदल सकते हैं। ऐसे में क्लबिंग नहीं होगी।
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टैक्स बचाने की यह योजना गलत है। आइए जानते हैं क्लबिंग के प्रावधान-
- अगर किसी संस्थान से पत्नी को वेतन या फीस मिली हो जिसमें करदाता का हित हो, तो वह करदाता की आय में शामिल होगा। ऐसी स्थिति में भी क्लबिंग का प्रावधान शामिल होगा। लेकिन अगर पत्नी के पास योग्यता है, तो क्लाबिंग नहीं होगी।
- इसके अतिरिक्त अगर कोई व्यक्ति पत्नी को संपत्ति गिफ्ट में दें और पत्नी उस गिफ्ट से निवेश करती है, तो ऐसे निवेश से होने वाली आय भी करदाता की आय में शामिल होगी।
- इसके अतिरिक्त अगर आप पत्नी को उधार देते हैं और उस उधार रकम से संपत्ति खरीदी जाती है, तो ऐसी स्थिति में भी क्लबिंग नहीं होगी।
- अगर किसी संपत्ति को बिना पर्याप्त प्रतिफल के दी गई है, तो उसकी आय क्लबिंग पति के हाथ में होगी। लेकिन उस आय को अगर फिर से निवेश कर लेते हैं, तो आमदनी पर क्लबिंग नहीं होगी।
- अगर करदाता संपत्ति को एचयूएफ के नाम कर देते हैं, तो आयकर एक्ट के सेक्शन 64(2) के तहत क्लबिंग ऑफ इनकम लागू होगा।