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बजट 2018: स्टैण्डर्ड डिडक्शन, सेस लगाने से बड़े टैक्सपेयर्स की टेक होम सैलरी पर ऐसे पड़ेगा असर

Mon, 05 Feb 2018 03:08 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 05 Feb 2018 03:08 PM IST
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 standard deduction and cess will have implication on big taxpayers not on small one
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बजट भाषण में स्टैण्डर्ड डिडक्शन की छूट और सेस लगाने मीडिल क्लास को जहां एक तरफ खुशी मिली है, वहीं दूसरी तरफ गम भी मिला है। हालांकि यह गम केवल उन लोगों के हिस्से में आया है जो कि सबसे ज्यादा टैक्स वर्तमान स्लैब्स के अनुसार दे रहे हैं। 

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प्रत्येक को मिलेगी 40 हजार की छूट
नए टैक्स प्रस्तावों के अनुसार प्रत्येक टैक्सपेयर को इस बार रिटर्न फाइल करते वक्त 40 हजार रुपये की छूट मिलेगी। हालांकि इसका सबसे ज्यादा फायदा कम टैक्स देने वालों को मिलेगा। इससे प्रत्येक व्यक्ति की टैक्सेबल इनकम में कम से कम 5800 रुपये की बचत होगी। 
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अब नहीं देना होगा मेडिकल, ट्रांसपोर्ट अलाउंस का प्रूफ
नए नियमों के हिसाब से अब किसी भी टैक्सपेयर को मेडिकल और ट्रांसपोर्ट अलाउंस का बिल सबमिट नहीं करना पड़ेगा। इससे हेल्थ इन्श्योरेंस अथवा टैक्सी का बिल आदि वित्त वर्ष के आखिर में संभाल के नहीं रखना पड़ेगा। इससे काफी करदाताओं को राहत मिली है। 

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क्या है स्टैंडर्ड डिडक्शन ?

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स्टैंडर्ड डिडक्शन का मतलब उस कटौती से है, जो आपकी इनकम के अनुसार आपके खर्च और निवेश पर व्यक्तिगत तौर पर लगती है। इसका फायदा यह है कि आपको किसी निवेश या खर्च का बिल पेश नहीं करना पड़ेगा और आपको टैक्स में छूट मिल सकेगी। 

इस बात को और आसानी से समझना हो तो इसे ऐसे समझ सकते हैं। कि आपकी सैलेरी से आपकी कंपनी, आपकी पोजीशन के हिसाब से एक निश्चित राशि काट लेती है। जिसके बाद आपकी कर योग्य सैलरी कम हो जाती है। ऐसे में टैक्स लगने वाली राशि कम हो जाती है। इसका क्लेम सैलेरी और पेंशन पाने वाला दोनों कर सकता है।    

सेस का झटका
व्यक्तिगत एवं कॉरपोरेट टैक्स पर शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेस को 3 से बढ़ाकर चार फीसदी कर दिया गया है। जबकि 50 लाख रुपये से ज्यादा की आय पर 10 फीसदी और एक करोड़ रुपये से ज्यादा की आय पर 15 फीसदी का सरचार्ज जारी रहेगा।

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