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सोशल मीडिया के जरिए इनकम टैक्स चोरी रोकेगा आयकर विभाग

Mon, 01 Apr 2019 07:40 PM IST
shubham बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: shubham Updated Mon, 01 Apr 2019 07:40 PM IST
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Income tax department to prevent tax evasion through social media
आयकर विभाग की सोशल मीडिया पर नजर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स--रोहित झा
आयकर विभाग का प्रोजेक्ट इनसाइट पहली अप्रैल से पूरे देश में लागू हो गया है। इस प्रोजेक्ट के जरिए अब विभाग कर चोरों पर पैन नंबर व बैंक खाते के अलावा सोशल मीडिया से भी नजर रखेगा। मतलब ये कि अगर आपके खर्चों और कमाई का तालमेल नहीं बैठता तो आयकर विभाग आपसे सवाल कर सकता है।
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फेसबुक, इंस्टाग्राम पर पोस्ट करना होगा भारी

सोशल मीडिया पर लोग अक्सर अपने महंगे स्थानों पर घूमने-फिरने, देश-विदेश के किसी पांच सितारा होटल में रुकने, महंगी गाड़ी-बाइक खरीदने पर पोस्ट करते हैं। अब यह पोस्ट करना उन लोगों के लिए काफी महंगा साबित होगा, जिनकी कमाई तो नहीं है, लेकिन वो ऐसा लोगों को दिखाने के लिए करते हैं। 
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ऐसे समझे इसको

मान लीजिए आपकी सालाना कमाई तीन लाख रुपये है और आपने तीन लाख रुपये की बाइक या फिर पांच लाख रुपये की कार खरीद ली है अथवा विदेश यात्रा पर अमेरिका या यूरोप गए हैं और इसका अपडेट पोस्ट के जरिए लोगों को दे रहे हैं। तब विभाग आपकी इन पोस्ट के जरिए आपको नोटिस भेजकर सवाल-जवाब कर सकता है। 
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Income tax department to prevent tax evasion through social media
social media

360 डिग्री रखी जाएगी नजर

इस प्रोजेक्ट के जरिए लोगों पर 360 डिग्री नजर रखी जाएगी। अभी तक विभाग किसी भी व्यक्ति के पैन कार्ड, बैंक खाते और लोन से आय पर नजर रखता था। लेकिन इसके बावजूद टैक्स भरने वाले लोगों और विदेश घूमने वाले या फिर नई गाड़ी खरीदने वाले लोगों की संख्या में काफी बढ़ा अंतर है। हर साल टैक्सपेयर्स के अनुपात में इतनी वृद्धि नहीं हो रही है, जितनी गाड़ी खरीदने वाले या फिर देश-विदेश घूमने वालों की संख्या है। 

एक हजार करोड़ का खर्च

इस प्रोजेक्ट पर विभाग ने एक हजार करोड़ रुपये खर्च किए हैं। ये प्रोजेक्ट पिछले सात सालों से तैयार हो रहा था। सरकार का मकसद इस प्रोजेक्ट के जरिए विश्व का सबसे बड़ा बॉयोमेट्रिक डाटाबेस तैयार करने का है।

विभाग ने इसके लिए एलएंडटी कंपनी से मदद ली है।  प्रोजेक्ट के तहत एक ऐसा वर्चुअल हाउस बनाया गया है जिसके जरिए लोगों की खर्च करने की सीमा को बैंक खातों के साथ-साथ सोशल मीडिया जैसे कि फेसबुक, इंस्टाग्राम से मैच किया जाएगा। इस डाटाबेस से ईडी, बैंक, एनआईए को भी टैक्स चोरों को पकड़ने व चोरी  रोकने में मदद मिलेगी। 

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