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छोटी सी शुरुआत से पूरे होंगे आपके बच्चों के सपने

Mon, 28 Oct 2013 04:04 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
अमर उजाला, दिल्ली Updated Mon, 28 Oct 2013 04:04 PM IST
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small investment planning will full fill children dreams

हम भारतीयों के लिए बच्चों के भविष्य की प्लानिंग करना हमेशा से एक अत्यधिक भावनात्मक पहलू रहा है। अपने बच्चे का भविष्य अच्छे से अच्छा बनाने के लिए हमारे यहां मां-बाप अपनी हर खुशियों से समझौता करने को तैयार रहते हैं।

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पर, अब हमें बदलती जरूरतों और जीवनशैली के साथ अपने बच्चे के भविष्य की योजना बनाते समय भावनात्मक होने की बजाय अधिक व्यावहारिक रवैया अपनाना चाहिए।

अमूमन, बच्चों के लिए फाइनेंशियल प्लानिंग में हम लंबी अवधि की जरूरतों, मसलन बच्चे के शिक्षा, शादी आदि पर अधिक ध्यान देते हैं, लेकिन हमें लघु अवधि में और बार-बार होने वाले खर्चों के बारे में भी जरूर ध्यान देना चाहिए।
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शादी के साथ ही चाइल्ड फ्यूचर प्लानिंग
एक सबसे उपयोगी सलाह है कि हमें शादी के साथ ही अपने बच्चे के संभावित खर्चों के लिए प्लानिंग शुरू कर देनी चाहिए।

इसकी शुरुआत बैंक रेकरिंग डिपाजिट या लिक्विड म्यूचुअल फंड में निवेश के साथ की जा सकती है। इससे प्रत्येक माह बच्चे के टीकाकरण, दवाइयां, बेबी फूड आदि पर होने वाले खर्चों का प्रबंधन आसानी से किया जा सकता है।
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यदि आप तत्काल फैमिली बढ़ाना नहीं चाहते हैं, तो बैंक रेकरिंग डिपॉजिट या लिक्विड फंड में जमा की गई छोटी राशि भविष्य में जब भी आप इस पहलू पर विचार करें, आपकी नकदी की जरूरतों को पूरा करने में सहायक होगी।

खोलें बच्चों के बैंक व पीपीएफ अकाउंट
बच्चे के नाम पर एक बैंक अकाउंट जरूर खोलें और संबंधियों, दादा-दादी या अन्य किसी परिचित से ‘शगुन’ के तौर पर मिलने वाले नकदी उपहार को उसमें जमा करें। इस पैसे का इस्तेमाल कभी भी अपने व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए न करें।

यदि आप अपने बजट से अधिक खर्च करते हैं, तो बेहतर यही होगा कि अपने बढ़ते खर्चों पर लगाम लगाएं और उसे कम करें।

अपने बच्चे के नाम पर एक पीपीएफ अकाउंट जरूर खोलें और उसमें बच्चे के बैंक डिपाजिट का एक बड़ा हिस्सा नियमित तौर पर निवेश करें।

यह पीपीएफ अकाउंट लंबी अवधि में आपके बच्चे की जरूरत के समय मददगार होगा। पीपीएफ अकाउंट की मैच्योरिटी पर मिलने वाली राशि करमुक्त होती है।

कर्ज से लेकर बचत खाते तक के विकल्प
परिवार के बदलते खर्चों, लघु अवधि की जरूरतों और बच्चे की लंबी अवधि की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आप अपने जीवन और स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी की समीक्षा करें और जीवन बीमा कवर की सम एश्योर्ड राशि में बढ़ोतरी कराएं।

इस बारे में अपने वित्तीय सलाहकार से चर्चा करें और अपने लिए उचित जीवन बीमा कवर की राशि जान लें।

यदि किसी व्यक्ति के पास पर्याप्त बीमा है और वह नियमित तौर पर अनुशासित रूप से निवेश करता है, तो वह कम से कम खर्चे पर अपने लक्ष्य को हासिल कर सकता है।

जीवन बीमा पॉलिसी की समीक्षा करने के साथ-साथ बच्चे का नाम भी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में शामिल और उसका कवर भी निश्चित रूप से बढ़वा लेना चाहिए।

वेतनभोगी कर्मचारी को केवल नियोक्ता द्वारा उपलब्ध कराई गई पॉलिसी पर ही निर्भर नहीं रहना चाहिए, उन्हें अलग से अपना पर्याप्त मेडीक्लेम कवर जरूर लेना चाहिए।

जोखिम और निवेश अवधि का रखें ध्यान
चाइल्ड फ्यूचर प्लानिंग के लिए भी कमोबेश उन्हीं निवेश विकल्पों का इस्तेमाल किया जाता है, जिनका उपयोग अन्य दूसरे लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए होता है।

इसलिए, आपको निवेश पर मिलने वाले रिटर्न, उन पर करदेयता, निवेश की अवधि और जोखिम उठाने की क्षमता का आकलन करके ही उचित निवेश प्रोडक्ट का चयन करना चाहिए।

तमाम अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि लंबी अवधि की बचत के लिए इक्विटी में निवेश सबसे बेहतर विकल्प है लेकिन यदि आप उसमें निवेश करने के बाद अपनी मानसिक शांति गंवा देते हैं, तो यह आपके लिए उपयुक्त नहीं है।

अपने वित्तीय सलाहकार से जोखिम उठाने की क्षमता का उचित आकलन कर उसकी सलाह से वाजिब एसेट क्लास में निवेश शुरू कर सकते हैं।

महंगाई के दौर में जब स्कूल फीस भी जेब पर भारी पड़ रही है, ऐसे में आपके पास पर्सनल लोन लेने का भी विकल्प मौजूद है।

इसके अलावा बच्चों में बचत को प्रोत्साहित करने के लिए खासतौर से निजी बैंक 18 साल से कम आयु के बच्चों के लिए बचत खाते का विकल्प दे रहे हैं।

ऐसे में आप इनके जरिए एक बेहतर फाइनेंशियल प्लानिंग कर सकते हैं। नर्सरी से लेकर सेकेंड्री स्कूल तक की पढ़ाई के लिए बैंक ऑफ बड़ौदा पर्सनल लोन के तहत कर्ज दे रहा है। बड़ौदा विद्या स्कीम के तहत माता-पिता अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए चार लाख रुपये तक का कर्ज ले सकते हैं।

यह नर्सरी से लेकर 12 वीं कक्षा तक के विद्यार्थी की पढ़ाई आदि के खर्च के लिए लिया जा सकता है। इसके लिए माता-पिता को कोई प्रोसेसिंग फीस और मार्जिन नहीं देना पड़ता है। साथ ही उस पर कोई सिक्योरिटी भी नहीं देनी होती है। बैंक यह कर्ज एक साल के लिए देता है।

बैंकों में बचत खाता खुलवाने की सुविधा
निजी क्षेत्र का बैंक एचडीएफसी ‘किड्स एडवांटेज अकाउंट ’ के तहत सात साल से 18 साल तक के बच्चों को खाता खोलता है। खाते पर बच्चे को एटीएम कम डेबिट कार्ड की सुविधा मिलती है।


बैंक खाते पर बच्चे को एक लाख रुपये तक का एजुकेशन बीमा मुफ्त में देता है। इसके अलावा फिक्स्ड डिपॉजिट आदि की भी सुविधा मिलती है।

खाते में 5000 रुपये का औसत मासिक बैलेंस रखना अनिवार्य है। इसी तरह आईसीआईसीआई बैंक एक दिन से लेकर 18 साल के बच्चों का बचत खाता खोलता है।

इसमें न्यूनतम औसत राशि 2,500 रुपये होना अनिवार्य है। बैंक बच्चों के लिए स्पेशल रेकरिंग डिपॉजिट की सुविधा और आग्रह पर एटीएम कार्ड भी जारी करता है। सभी सरकारी बैंक भी बच्चों के लिए विशेष खाते खोलते हैं।

मणिकरण सिंघल
सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर गुड मनीइंग

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