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इनकम टैक्स बचाने के लिए अपनाएं ये 13 उपाय
नई दिल्ली/कारोबार डेस्क
Updated Mon, 22 Apr 2013 08:36 AM IST
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वित्तीय वर्ष 2013-14 की शुरुआत अप्रैल से हो चुकी है। यानी, आपकी आय पर आयकर की सालाना गणना की शुरुआत भी हो चुकी है।
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बहुत संभव है कि टैक्स प्लानिंग के लिए अधिकांश लोगों की तरह आप भी अगले मार्च के नजदीक आने का इंतजार कर रहे हों। अगर ऐसा है तो संभल जाइए। जितनी जल्दी टैक्स की प्लानिंग कर लें उतना ही अच्छा और लाभकारी रहेगा।
मार्च का महीना जैसे-जैसे करीब आने लगता है, लोग इनकम टैक्स बचाने के लिए निवेश के विकल्पों के पीछे पड़ते हैं। नतीजा यह होता है कि महज टैक्स बचाने के लिए कई बार वैसे बीमा या अन्य उत्पाद खरीद लिए जाते हैं, जिसका अधिकतम फायदा नहीं मिल पाता और एजेंट कमीशन कमा जाते हैं।
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अधिकांश मामलों में अंतिम घड़ी में टैक्स बचाने के लिए किए गए निवेश व्यक्ति की ओवरऑल फाइनेंशियल प्लानिंग से मेल नहीं खाती, जिससे उसे निवेश का अधिकतम लाभ नहीं मिल पाता।
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इसके अलावा, अंतिम क्षणों में टैक्स बचाने के लिए निवेश के लिए बड़ी रकम का इंतजाम भी अकसर भारी पड़ जाता है। ऐसे में बेहतर है कि वित्तीय वर्ष की शुरुआत में ही अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग के अनुसार साल की टैक्स प्लानिंग करें और शुरू से ही उसके अनुसार निवेश शुरू कर दें।
इससे न सिर्फ लंबी अवधि की फाइनेंशियल प्लानिंग का तयशुदा लक्ष्य पा सकेंगे, बल्कि टैक्स बचाने के लिए निवेश का भार भी एकबारगी नहीं पड़ेगा। टैक्स प्लानिंग को लेकर आपके लिए हम यहां कुछ अहम जानकारी पेश कर रहे हैं, जिनका लाभ टैक्स प्लानिंग में मिलेगा।
धारा 80सी में खूब बचता है आयकर
आयकर अधिनियम की धारा 80सी, 80सीसीसी और 80सीसीडी के अंतर्गत प्रत्येक व्यक्तिगत करदाता और हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) अपनी आमदनी से अधिकतम 1 लाख रुपये तक कर में कटौती हासिल कर सकता है।
इस कटौती का लाभ पिछले वित्त वर्ष के दौरान करदाता द्वारा जमा या भुगतान की गई रकम के लिए ही प्राप्त हो सकता है। अधिकतम 1 लाख रुपये तक की कर कटौती का लाभ जिन योजनाओं के प्राप्त किया जा सकता है, यहां उनका विवरण दिया जा रहा है।
बीमा: सुरक्षा के साथ बचत भी
जीवन बीमा योजनाएं: धारा 80सी के तहत करदाता द्वारा जीवन बीमा कवर के अंतर्गत स्वयं, पत्नी या बच्चों के लिए भुगतान किए गए प्रीमियम पर 1 रुपये तक कर में कटौती प्राप्त की जा सकती है।
यूनिट लिंक्ड बीमा योजनाएं(यूलिप): यूलिप एक ऐसा उत्पाद है, जिसके अंतर्गत व्यक्ति को लाइफ कवर के साथ-साथ इक्विटी में निवेश और कर बचाने का विकल्प मिलता है। हालांकि, यूपिल में निवेश की गई राशि के लिए कर छूट का दावा तभी किया जा सकता है, जब योजना में निवेश 3 साल का लॉक इन पीरियड पूरा कर ले।
पेंशन: बुढ़ापे के लिए फंड
रिटायरमेंट के लिए अच्छा फंड तैयार करने के लिए पेंशन प्लान बेहतर विकल्प हैं। धारा 80सी के तहत पेंशन प्लान में 1 लाख रुपये तक योगदान पर कर कटौती का लाभ मिलता है।
एलआईसी या अन्य बीमा कंपनियों के पेंशन फंडों में निवेश कर छूट का यह लाभ प्राप्त किया जा सकता है। पहले यह कटौती धारा 80सीसीसी के अंतर्गत मिलती थी।
वहीं, केंद्र सरकार या नियोक्ता द्वारा पेंशन योजनाओं में निवेश पर कर्मचारी को कर में कटौती का लाभ इस 1 लाख रुपये की छूट के अतिरिक्त मिलता है।
न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस)
आयकर अधिनियम की धारा 80सीसीडी (2) के अंतर्गत, कर्मचारी को उसके मूल वेतन का 10 फीसदी तक एनपीएस में निवेश पर करछूट का लाभ मिलता है।
जैसे, यदि किसी व्यक्ति का सालाना मूल वेतन 5 लाख रुपये है तो वह एनपीएस में निवेश पर 50 हजार रुपये तक कर छूट का दावा कर सकता है। इसके लिए नियोक्ता द्वारा एनपीएस में निवेश किया जाता है।
पीएफ: पूरी तरह करमुक्त निवेश
भविष्य निधि में योगदान पूरी तरह करमुक्त है। इसमें निवेश पर कर छूट के लाभ के साथ रिटर्न से हुई आमदनी पर भी कोई कर नहीं देना पड़ता है। इस फंड का संचालन भविष्य निधि अधिनियम 1925 के अंतर्गत होता है।
पीपीएफ
पीपीएफ अकाउंट बैंकों व डाक घरों में खुलवाया जा सकता है। इसमें चालू वित्तवर्ष के लिए सालाना अधिकतम 1 लाख रुपये तक के निवेश पर कर में कटौती का दावा किया जा सकता है। इसमें 15 साल का लॉक इन पीरियड है।
हालांकि, निवेशक को सात साल के बाद धन निकालने की अनुमति है। तीसरे वित्त वर्ष के बाद इस अकाउंट पर लोन भी लिय जा सकता है। परिपक्वता पर मिलने वाला रिटर्न पूरी तरह करमुक्त होता है।
एनएससी: बिना जोखिम निवेश
राष्ट्रीय बचत पत्र (एनएससी) एक सबसे सुरक्षित निवेश है। पांच साल की परिपक्वता वाले एनएससी (8वां इश्यू) और 10 साल की परिपक्वता वाले एनएससी (9वां इश्यू) की खरीद पर धारा 80सी के तहत कर में कटौती का लाभ मिलता है।
इसमें ब्याज की गणना सालाना आधार पर होती है, लेकिन इस ब्याज का फिर से निवेश कर दिया जाता है और इस पर भी करछूट का लाभ मिलता है।
एफडीः कम जोखिम का निवेश
कम जोखिम के साथ कर बचाने के लिए बैंकों और डाक घरों में सावधि जमा (एफडी) एक बेहतर विकल्प है। एफडी पर ब्याज दरें बाजार की मौजूदा स्थिति से तय होती हैं। न्यूनतम पांच साल के लॉक इन पीरियड की एफडी पर कर में छूट का लाभ हासिल होता है।
ट्यूशन फीस: पढ़ाई संग सेविंग
देश में किसी भी स्कूल, यूनिवर्सिटी, कॉलेज में बच्चों की पूर्णकालीक शिक्षा के लिए प्रवेश के समय और उसके बाद ट्यूशन फीस के रूप में किए जाने वाले भुगतान पर धारा 80सी के तहत कर में कटौती का दावा किया जा सकता है। यह दावा अधिकतम दो बच्चों की ट्यूशन फीस पर ही हो सकता है।
हालांकि, अभिभावकों द्वारा स्कूल को डेवलपमेंट फीस या अन्य दूसरे तरह के शुल्कों के भुगतान पर कर कटौती का दावा नहीं किया जा सकता है।
ईएलएसएस : इक्विटी से बचाएं कर
इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम मुख्य रूप से म्यूचुअल फंड स्कीम होती है। इसमें न्यूनतम 500 रुपये से निवेश शुरू किया जा सकता है और तीन साल की लॉक इन अवधि होती है। इसमें 100 फीसदी निवेश इक्विटी में होता है इसलिए इसमें जोखिम भी अधिक रहता है। ईएलएसएस में सालाना 1 लाख रुपये तक के निवेश पर कर छूट का दावा किया जा सकता है।
आरजीईएसएस: छोटे निवेशकों को बड़ा फायदा
शेयर बाजार में छोटे निवेशकों को आकर्षित करने के लिए शुरू की गई राजीव गांधी इक्विटी सेविंग स्कीम (आरजीईएसएस) को 2013-14 के लिए सरकार ने और आकर्षक बनाया है। इसके तहत सालाना 12 लाख रुपये तक की आय वाला व्यक्ति इक्विटी में 50 हजार रुपये तक निवेश कर सकता है और वह निवेश की गई रकम पर 50 फीसदी कर छूट का लाभ ले सकता है। योजना के तहत निवेशक तीन साल तक कर छूट का दावा कर सकता है।
एससीएसएस: बुजुर्गों की बचत
सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम (एससीएसएस) में साठ साल या इससे ऊपर के व्यक्ति या 55 साल के व्यक्ति जिन्होंने वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) ले रखा है, निवेश कर सकते हैं। इस योजना की लॉक इन अवधि पांच साल है और इसमें 9 फीसदी का रिटर्न है। इस स्कीम के तहत निवेश पर धारा 80सी के तहत कर में कटौती का दावा किया जा सकता है।
होम लोन पर अच्छी खासी राहत
आयकर कानून की धारा 80 सी के तहत लोन की मूल राशि (प्रिंसिपल अमाउंट) के भुगतान पर एक लाख रुपये तक की छूट का प्रावधान है। इसके अलावा धारा 24 के तहत होम लोन के ब्याज की अदायगी पर 1.5 लाख रुपये तक की करछूट मिलती है।
इस साल के आम बजट में 1 अप्रैल 2013 से 31 मार्च 2014 तक किसी व्यक्ति द्वारा 25 लाख रुपये तक का पहला मकान लिए जाने पर होम लोन के ब्याज के भुगतान पर एक लाख रुपये तक अतिरिक्त छूट दिए जाने का प्रावधान किया गया है। दूसरे मकान के लिए नेट एनुअल वैल्यू के 30 फीसदी तक करछूट का प्रावधान धारा 24 में पहले से मौजूद है।