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रीयल्टी में लौटेगी रौनक
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 30 Jan 2013 12:28 AM IST
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रेपो रेट और सीआरआर में कमी का फैसला रीयल्टी क्षेत्र के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। रेपो रेट घटने से होम लोन की ईएमआई का बोझ कम हो सकता है, जिससे मकानों की बिक्री को बल मिलेगा। वहीं, सीआरआर में भी इतनी ही कटौती से बाजार में नकदी बढ़ेगी और बैंक आसानी से कर्ज दे सकेंगे।
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रेपो रेट में कमी के बाद होम लोन के करीब 0.25 फीसदी सस्ता होने का रास्ता साफ हो गया है। इससे होम लोन की ईएमआई के बोझ से थोड़ी राहत मिल सकती है। अगर किसी व्यक्ति ने 9.75 फीसदी की फ्लोटिंग ब्याज दर पर 20 साल के 25 लाख रुपये का होम लोन लिया है, तो ब्याज दर में .25 की कमी से ईएमआई को बोझ 408 रुपये कम हो जाएगा।
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यह मामूली राहत रीयल्टी क्षेत्र को बड़ा बूस्ट दे सकती है। रीयल एस्टेट डेवलपर्स के संगठन क्रेडाई के अध्यक्ष ललित कुमार जैन का कहना है कि आरबीआई के फैसले से बाजार का माहौल सुधरेगा, लेकिन रेपो रेट में सिर्फ 0.25 फीसदी की कमी काफी नहीं है। उन्होंने होम लोन की सीमा बढ़ाकर मकान की कीमत का 90 फीसदी करने और हाउसिंग प्रोजेक्ट पर रिस्क फैक्टर 1.25 से घटाकर 1 फीसदी करने की मांग की है।
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रहेजा डेवलपर्स के निदेशक मनोज गोयल ने उम्मीद जताई है कि बैंक दरों में कमी का फायदा ग्राहकों तक भी पहुंचाएंगे। ऊंची ब्याज दरों और आर्थिक सुस्ती की शंकाओं के बीच गत एक वर्ष में मकानों की बिक्री विभिन्न महानगरों में 10 से 25 फीसदी तक गिरी है। इस वजह से डेवलपर्स पर मकानों की कीमतों में कमी का दबाव बढ़ा है।