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डीमैट नहीं हैं तो इस स्कीम से करें बाजार में निवेश
नई दिल्ली/कारोबार डेस्क
Updated Tue, 22 Jan 2013 06:10 PM IST
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घरेलू शेयर मार्केट में छोटे निवेशकों का रुझान बढ़ाने के लिए सरकार ने राजीव गांधी इक्विटी सेविंग्स स्कीम (आरजीईएसएस) लांच की है। सेबी के सर्कुलर के मुताबिक इस स्कीम का मकसद वित्तीय उत्पादों में निवेश प्रोत्साहित करना और घरेलू शेयर मार्केट का दायरा बढ़ाना है।
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यह स्कीम केवल उन लोगों के लिए है, जो कि पहली बार शेयर बाजार में निवेश कर रहे हैं। जिनके पास अभी तक डीमैट खाता नहीं था या जिन्होंने इस स्कीम की अधिसूचना के आने तक शेयरों में कोई निवेश नहीं किया है। इस स्कीम की घोषणा वित्त वर्ष 2012-13 के बजट में की गई और इसकी अधिसूचना 23 नवंबर 2012 को आई है।
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राजीव गांधी इक्विटी स्कीम के तहत सालाना 10 लाख रुपये से कम आमदनी वाला व्यक्ति 50,000 रुपये तक का निवेश ब्लू चिप, सरकारी कंपनियों के शेयरों में सीधे या म्यूचुअल फंड के जरिये कर सकता है। निवेशक को इस निवेश पर 50 फीसदी कर छूट का लाभ मिलेगा।
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आयकर अधिनियम 1961 की धारा 80 सीसीजी के तहत कर छूट का लाभ निवेशकों को दिया गया है। यह कर छूट आयकर कानून की धारा 80 सी के तहत दी गई 1 लाख रुपये के निवेश पर मिलने वाली कर रियायत के अलावा है।
स्कीम में निवेश करने के लिए निवेशक के पास इनकम टैक्स पैन कार्ड और डिपॉजिटरी अकाउंट होना चाहिए। आनंद राठी सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट (इक्विटी) एके प्रभाकर का कहना है भारत में शेयरों में किया जाने वाला निवेश बहुत सीमित है। इस स्कीम से निवेश बढ़ाने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि 25,000 रुपये तक अतिरिक्त कर छूट का लाभ आकर्षक दिखाई देता है, लेकिन कर बचत पर इसका ज्यादा असर देखने को नहीं मिलेगा। चूंकि यह स्कीम सालाना 10 लाख रुपये से कम इनकम वाले व्यक्तियों के लिए है, ऐसे में 30 फीसदी के कर दायरे में आने वाले करदाता इसमें निवेश नहीं कर पाएंगे।
स्कीम का सबसे ज्यादा फायदा 20 फीसदी के टैक्स स्लैब में आने वाले करदाताओं को होगा, जिन्हें 5,000 रुपये की बचत होगी, जबकि 10 फीसदी के टैक्स स्लैब में आने वाले करदाता 2,500 रुपये बचा सकेंगे।
टॉप-100 लिस्टेड शेयरों (बीएसई 100) और सीएनएक्स 100 और सरकारी कंपनियों (नवरत्न, महारत्न और मिनीरत्न में किया गया निवेश स्कीम के दायरे में आएगा। इन शेयरों में निवेश करने वाले ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) और म्यूचुअल फंड भी राजीव गांधी इक्विटी सेविंग्स स्कीम्स के दायरे में आएंगे।
स्कीम में निवेश करने वाले इनवेस्टर्स की पहचान पैन नंबर के आधार पर की जाएगी। दूसरी कर बचत स्कीमों की तरह ही आरजीईएसएस के जरिए किए जाने वाले निवेश में तीन साल का लॉकइन अवधि होगी। हालांकि, निवेशकों को पहले साल के बाद शेयरों में ट्रेड करने की इजाजत होगी।
स्कीम के तहत निवेशक जितनी राशि पर कर छूट का दावा करेंगे, उतना इनवेस्टमेंट लेवल उन्हें दो साल तक बनाए रखना पड़ेगा। अगर कोई निवेशक स्कीम की शर्तों का पालन करने में नाकाम रहता है तो टैक्स छूट का लाभ वापस ले लिया जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि फर्स्ट टाइम इनवेस्टर्स को सीधे शेयर खरीदने से बचना चाहिए, भले ही वह ब्लू चिप या पीएसयू स्टॉक क्यों न हों। जिन निवेशकों ने अभी तक शेयर बाजार से दूरी बनाए रखी है, केवल मामूली टैक्स बचत के लिए उनका पुख्ता जानकारी बिना सीधे शेयर बाजार में उतर आना जोखिम भरा हो सकता है। अगर वे बाजार में उतरना ही चाहते हैं तो ईएलएसएस फंड्स और ईटीएफ उनके लिए अच्छा विकल्प हो सकते हैं।
निवेश सलाहकारों के मुताबिक, यह स्कीम घरेलू शेयर बाजार के लिए तो लाभकारी होगी, लेकिन बाजार में पहली बार निवेश करने वालों के लिहाज यह काफी जटिल है। हालांकि, फंड हाउसों ने ऐसी स्कीमें लांच करना शुरू कर दी है, जो कि आरजीईएसएस को ध्यान में रखकर तैयार की गई हैं।