फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Personal Finance ›   purest form of insurance term insurance

बीमे का शुद्धतम रूप टर्म इंश्योरेंस

Tue, 29 Jan 2013 06:39 PM IST
नई दिल्ली/कारोबार डेस्क
नई दिल्ली/कारोबार डेस्क Updated Tue, 29 Jan 2013 06:39 PM IST
विज्ञापन
purest form of insurance term insurance

बीमा कराते वक्त अपने लिए सही इंश्योरेंस पॉलिसी चुनना बहुत महत्वपूर्ण होता है, पर बाजार में मौजूद दर्जनों बीमा कंपनियों के सैकड़ों बीमा उत्पादों के बीच अपने लिए मुफीद पॉलिसी ढूंढ निकालना काफी दुरूह जान पड़ता है। अपनी पॉलिसी के बारे में बीमा कंपनियों द्वारा किए जाने वाले बड़े-बड़े दावे कई बार इस चुनाव को और भी मुश्किल बना देते हैं। ऐसे में आपको सबसे महत्वपूर्ण बात यह समझ लेनी चाहिए कि सिर्फ एजेंट, मित्र या परिवार के लोगों के कहने पर पॉलिसी न खरीदें।

विज्ञापन


इसके अलावा रिटर्न या आमदनी को बीमा पॉलिसी के चुनाव का आधार न बनाएं, बल्कि बीमे को जीवन जोखिमों से जोड़ देखते हुए परिवार को ज्यादा से ज्यादा आर्थिक सुरक्षा मुहैया कराने के मूल लक्ष्य पर ध्यान दें।
विज्ञापन


सुरक्षा में सबसे बेहतर
सुरक्षा के नजरिये से टर्म बीमा पॉलिसी सबसे उपयुक्त ठहरती है क्योंकि वास्तविक अर्थों में इसे ही शुद्ध रूप से बीमा या इंश्योरेंस कहा जा सकता है। टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी का एकमात्र प्रयोजन यह होता है कि बीमाधारक की मृत्यु होने या उसके कमाने की स्थिति में न रहने पर परिवार वालों को जीवन निर्वाह के लिए एक अच्छी आय मिलती रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसमें अन्य योजनाओं की अपेक्षा काफी कम प्रीमियम पर एक बड़ा रिस्क कवर हासिल किया जा सकता है। दूसरी ओर बची हुई राशि को आप किसी अच्छे रिटर्न वाले निवेश में लगाकर बेहतर मुनाफा भी कमा सकते हैं। साधारणत: टर्म बीमा पॉलिसी 10,15,20,25 और 30 सालों के लिए ली जाती है। इससे जुडे़ कुछ अन्य अहम पहलुओं को जान लेना उपयोगी होगा।

डेथ बेनेफिटः  अगर पॉलिसी की अवधि के दौरान पॉलिसीधारक की मृत्यु हो जाती है तो कवर की पूरी राशि नॉमिनी को दे दी जाती है।

मैच्योरिटी बेनेफिटः अगर पॉलिसीधारक टर्म प्लान की पूरी अवधि तक जीवित रहता है तो मैच्योरिटी के समय उसे कोई रकम नहीं मिलती है।

टैक्स बेनेफिटः टर्म प्लान के तहत चुकाए गए प्रीमियम पर आयकर की धारा 80 सी के तहत कर छूट मिलती है।

बड़े काम के राइडर
टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत कुछ अतिरिक्त प्रीमियम चुका कर ग्राहक कई ऐसे जोखिमों पर कवर हासिल कर सकता है, जो साधारण टर्म प्लान में शामिल नहीं होते। इस सुविधा को राइडर कहते हैं। जोखिम व उसपर मिलने वाले रिस्क कवर के लिहाज से देखा जाए, तो छोटी सी अतिरिक्त राशि देकर राइडर की सुरक्षा हासिल करना कई मायनों में फायदे का सौदा साबित हो सकता है। टर्म बीमे के साथ मिलने वाले मुख्य राइडर इस प्रकार हैं-

एक्सीडेंटल डेथ बेनेफिट राइडरः इस तरह के राइडर में अगर पॉलिसी धारक की दुर्घटना (एक्सीडेंट) में मौत हो जाती है, तो उसके परिवार को बढ़े हुए सम एश्योर्ड के रूप में इसका फायदा मिलता है। हालांकि अगर व्यक्ति की मौत किसी और कारण से होती है तो एक्सीडेंटल बेनेफिट के तहत मिलने वाला अतिरिक्त सम एश्योर्ड नहीं मिलता है।

प्रीमियम का रिटर्नः इस तरह के राइडर में अगर पॉलिसी धारक पॉलिसी टर्म पूरा होने तक जीवित रहता है तो चुकाए गए प्रीमियम वापस कर दिए जाते हैं। इस तरह के राइडर वाली पॉलिसी का प्रीमियम साधारणत: आम टर्म प्लान से अच्छा खासा ज्यादा होता है।

प्रीमियम की समाप्तिः इस तरह के राइडर में अगर पॉलिसी होल्डर किसी वजह से पूरी तरह असमर्थ हो जाता है तो उसे आगे के प्रीमियम देने की जरूरत नहीं होती है। भविष्य के सभी प्रीमियम माफ कर दिए जाते हैं। इश्योरेंस कंपनियां इस राइडर के लिए मामूली फीस लेती हैं। ये राइडर शायद आपके इंश्योरेंस का खर्च थोड़ा बढ़ा दे, लेकिन अगर किसी वजह से आप असमर्थ हो जाते हैं, तो इसकी बदौलत आप बिना पॉलिसी कवर के नहीं रहेंगे।

क्रिटिकल इलनेसः इस तरह के राइडर में अगर पॉलिसी धारक को कोई गंभीर बीमारी (क्रिटिकल इलनेस) हो जाती है, जो इंश्योरेंस पॉलिसी में कवर हो, तो सम एश्योर्ड के बराबर राशि ग्राहक को दी जाती है। इसमें याद रखने वाली बात ये है कि क्रिटिकल इलनेस होने की सूरत में आपको पूरा पैसा मिल जाता है बाद में कोई पैसा नहीं मिलेगा।


इस राइडर को मेडिक्लेम पॉलिसी की तरह नहीं लेना चाहिए, जिसमें अस्पताल का खर्च इंश्योरेंस कंपनी द्वारा दिया जाता है। ज्यादातर क्रिटिकल इलनेस राइडर में आपके पॉलिसी खरीदने के बाद 90-180 दिन का वेटिंग पीरियड शामिल होता है। इस वेटिंग पीरियड में क्रिटिकल इलनेस के लिए कोई क्लेम नहीं दिया जाता है। आगे चलकर क्रिटिकल इलनेस सामने आने पर भी पॉलिसी होल्डर को कम से कम 30 दिन जीवित रहना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Budget 2022 से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed