पेपर गोल्ड भी निवेश का बेहतर विकल्प

हिमांशु व्यापक (रिलायंस कैपिटल एसेट मैनेजमेंट) Updated Mon, 22 Oct 2012 08:24 PM IST
Paper Gold as an investment option festive season
दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले भारत में सोने के प्रति लोगों का लगाव काफी गहरा है। देश में सुरक्षित निवेश के रूप में सोने को सबसे ज्यादा तरजीह दी जाती है। इसके साथ ही सोने को संपन्नता से जोड़कर भी देखा जाता है। सोने के फिजिकल (जूलरी, सिक्का, बार, पिंड आदि) रूप में निवेश करने के साथ-साथ अब देश में पेपर गोल्ड (गोल्ड सेविंग फंड और गोल्ड ईटीएफ) के प्रति भी लोगों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है।

ऐसे में त्योहारी सीजन के दौरान छोटे या बड़े सभी तरह के निवेशकों के लिए पेपर गोल्ड सोने में निवेश का एक बेहतर विकल्प है। सोने में निवेश को लेकर लोगों में एक बड़ी हिचकिचाहट उसकी खरीद-बिक्री, सोने की शुद्धता परखने और खरीद के बाद उसकी सुरक्षा से जुड़ी जद्दोजहद को लेकर रहती है। सिक्का, बार या गहना किस रूप में खरीदारी की जाए यह सवाल भी निवेशकों के सामने काफी अहम होता है। हालांकि, हॉलमार्किंग ने इन परेशानियों को कुछ हद तक कम किया है, पर इसका दायरा अभी भी काफी सीमित है। ऐसे में पेपर गोल्ड में निवेश निवेशकों को इन तमाम दिक्कतों से छुटकारा दिलाता है।

इन दिनों, सोने के भाव 32 हजार रुपये प्रति दस ग्राम के आसपास देखे जा रहे हैं। हालांकि, इस त्योहारी सीजन इसमें थोड़ी बहुत नरमी की उम्मीद है। बाजार में गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड फंड की बात की जाए, तो इन दिनों पेपर फार्म में गोल्ड खरीदने के प्रति लोगों में अच्छा खास रुझान देखा जा रहा है। एएमएफआई के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 18 महीनों के दौरान इंडस्ट्री में 7,000 करोड़ से अधिक गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड फंड की खरीद की जा चुकी है। ग्लोबल स्तर पर भी गोल्ड ईटीएफ में निवेश को सबसे अधिक तरजीह दी जा रही है। दुनियाभर में करीब 1,800 टन गोल्ड ईटीएफ की बिक्री हुई है। इसमें से भारत में महज 25 टन ही गोल्ड ईटीएफ की बिक्री हुई है।

त्योहारी सीजन आने के साथ-साथ ईटीएफ का वॉल्यूम भी बढ़ रहा है। गोल्ड ईटीएफ के जरिए निवेश अब तक के शीर्ष 11,198 करोड़ रुपये के शीर्ष पर पहुंच चुका है। सामान्यत: देशभर में गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड फंड ऑफ फंड की कीमतों में पारदर्शिता है। फिजिकल गोल्ड के मुकाबले पेपर गोल्ड में कुछ ऐसी खासियतें है, जिनके चलते उसमें लोगों का आकर्षण बढ़ रहा है।

कीमत: निवेशकों के लिए कीमत सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। गोल्ड ईटीएफ में निवेश को यूनिट के रूप में सोने का आवंटन किया जाता है और एक यूनिट एक ग्राम सोने की कीमत से संबद्ध होती है। इसमें किसी तरह का मेकिंग चार्ज या प्रीमियम नहीं होता है। जबकि, बैंक या ज्वैलर्स के यहां से सोना खरीदने पर एक बड़ी राशि मार्क अप या मेकिंग चार्ज के रूप में देनी होती है। बैंक 15 फीसदी तक मार्क अप चार्ज वसूलते हैं।

शुद्धता: सोने में निवेश का दूसरा अहम पहलू उसकी शुद्धता को लेकर है। जब भी गोल्ड ईटीएफ में निवेश किया जाता है, उसके प्रत्येक यूनिट के समतुल्य सोने की शुद्धता 99.5 फीसदी होती है। यानी, गोल्ड ईटीएफ में निवेश 99.5 फीसदी शुद्ध सोने में होता है। बैंकों द्वारा बेचा जाने वाला सोना भी समान शुद्धता का होता है, लेकिन उसकी कीमत अधिक होती है। जबकि, ज्वैलर्स के यहां से सोना खरीदने पर उसकी शुद्धता को लेकर जोखिम बना रहता है।

सुरक्षा: सोना खरीदना ही बड़ी बात नहीं है, बल्कि उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना भी जरूरी है। जब भी पेपर गोल्ड में निवेश किया जाता है, उसकी सुरक्षा का कोई मसला नहीं होता है। प्रत्येक यूनिट फिजिकल सोने से जुड़ी है और कस्टोडियन (संरक्षक) के पास सुरक्षित होती है।

खरीद सामर्थ्य: सोने के भाव जिस कदर बढ़ रहे हैं, उस लिहाज से वह आम आदमी की खरीद सामर्थ्य से बाहर होता जा रहा है। लेकिन, पेपर गोल्ड के जरिए खुदरा निवेशक को छोटी रकम से भी सोने में निवेश करने का विकल्प मिलता है। सामान्यत: पेपर गोल्ड में निवेश न्यूनतम 1 यूनिट, जो एक ग्राम सोने के बराबर होती है, से किया जा सकता है। कुछ गोल्ड सेविंग फंड ऐसे हैं, जिनमें सिस्टमेटिक इनवेस्टमेंट प्लान (सिप) के जरिए महज 100 रुपये से भी सोने में निवेश की शुरुआत की जा सकती है।

कर लाभ: गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड फंड ऑफ फंड में निवेश करने पर वेल्थ टैक्स की कोई देनदारी नहीं होती है।

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