आयकर विभाग में फंसा आपका 16 लाख, पढ़ें काम की खबर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आपने इनकम टैक्स रिफंड पाने के लिए ऑनलाइन रिटर्न दायर कर दिया है और अभी तक रिफंड आपके खाते में नहीं पहुंचा है तो एक बार लॉग इन करके देख लें कि आपने घर का पता या खाता नंबर तो ठीक ठीक तो भरा है।
क्योंकि इस समय इनकम टैक्स विभाग के पास 16 लाख से भी ज्यादा रिफंड ऐसे पड़े हैं जिनमें या तो खाता संख्या गलत है या पता सही नहीं है। इन्होंने जो ईमेल आईडी दिया हैए उस पर भी मेल नहीं जा पा रहा है।
इनकम टैक्स विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ऐसे तो लोग रिफंड पाने के लिए ऐसे तो लोग एड़ी चोटी का जोर लगा देते हैं लेकिन आनलाइन रिटर्न भरने में थोड़ी सी सावधानी बरतें तो उनका रिफंड नहीं अटकेगा।
उन्होंने बताया कि सीपीसी में 16 लाख रिफंड को प्रोसेस किया जा चुका है और इसके लिए रिफंड आर्डर भी जारी हो चुका है लेकिन वह आज तक सही व्यक्ति के घर तक या उनके खातों तक नहीं पहुंच पाया है।
इनमें ऐसे व्यक्ति शामिल हैं जो अपने फॉर्म में सही बैंक खाता संख्या नहीं दी है और इनके घर का भी पता गलत है। विभाग चाहता है कि इन रिफंड क्लेम का निस्तारण हो जाए लेकिन सही पते के अभाव में उनके घर चिट्ठी भी नहीं भेजी जा रही है।
खाता संख्या या पते में भारी गड़बड़ी
आयकर विभाग के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि सिर्फ सीपीसी में ही 16 लाख से ज्यादा मामले ऐसे हैं जिनमें खाता संख्या या पते में गड़बड़ी है। यदि इसमें देश भर के अन्य आईटीओ का मामला जोड़ दिया जाए तो यह संख्या और भी बढ़ सकती है।
गड़बड़ी की जानकारी कैसे मिली इस सवाल पर उनका कहना है कि सबसे पहले तो इन क्लेम में रिफंड बैंकर स्कीम के तहत पैसा ट्रांसफर करने की कोशिश की गई लेकिन स्टेट बैंक की तरफ से बताया गया कि इन फार्म में उपलब्ध करायी गई खाता संख्या गलत है।
उसके बाद उन्हें ईमेल से सूचना भेजी गई, लेकिन ईमेल डिलीवर नहीं हुआ। इसके बाद ऐसे करदाता के घर पर स्पीड पोस्ट से चिट्ठी भेजी गई लेकिन वह भी वापस आ गई।
हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि इन 16 लाख रिफंड में कितनी राशि फंसी है। उनके मुताबिक यह राशि करोड़ों में है, लेकिन सही सही गणना नहीं की गई है।
अधिकारी के मुताबिक इन्हीं सब झंझटों से बचने के लिए करदाताओं से सही पता और खाता संख्या भरने की गुजारिश तो की ही जाती है। सही ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर भी देने को कहा जाता है ताकि उन्हें फोन करने अवगत कराया जा सके।