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म्यूचुअल फंड उद्योग की एफडी पर टिकी है नजर
नई दिल्ली/कारोबार डेस्क
Updated Mon, 12 Nov 2012 11:38 AM IST
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निवेश में पूंजी की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने वाले निवेशकों में एफडी जिस कदर लोकप्रिय है, उसे देखते हुए म्यूचुअल फंड उद्योग की नजरें इसके जरिये इकट्ठा होने वाली भारी-भरकम नकदी पर लगातार जमी हुई हैं।
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फंड हाउसों को उम्मीद है कि जैसे-जैसे लोगों में वित्तीय साक्षरता बढ़ेगी और देश में म्यूचुअल फंड उद्योग का विस्तार होगा, उससे आने वाले दिनों में बैंक एफडी में जमा होने वाली रकम का 5 से 10 फीसदी हिस्सा म्यूचुअल फंड में आ जाएगा। हाल में सेबी द्वारा म्यूचुअल फंडों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नियमों में किए गए बदलाव और आर्थिक सुधारों पर वित्त मंत्रालय का जोर इसमें फंड हाउसों के लिए खासा मददगार साबित हो सकता है।
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फिलहाल देश में कुल बचत का करीब 56 फीसदी हिस्सा बैंकों की सावधि जमा योजनाओं में जाता है। इस पर निवेशकों को एफडी की अवधि के हिसाब से अलग-अलग ब्याज दरों के हिसाब से रिटर्न मिलता है। भारतीय म्युचुअल फंड उद्योग का एयूएम (असेट अंडर मैनेजमेंट) इस समय करीब 7 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर है और 2020 तक इसके 20 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। एमएफ उद्योग को उम्मीद है कि सेबी द्वारा हाल में दी गई राहतों के बाद, देश के टियर -2 और टियर -3 श्रेणी के शहरों में एफडी की लोकप्रियता में कुछ न कुछ सेंध लगाने का मौका जरूर मिल जाएगा।
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एफडी दिलाता है आसानी से लोन
फिक्स्ड डिपॉजिट की लोकप्रियता सुरक्षित और बेहतर रिटर्न दिलाने वाले निवेश विकल्प के रूप में तो है ही, इसके साथ ही यह आपको वित्तीय सुरक्षा का अहसास भी दिलाता है। अगर आपको पैसों की जरूरत पड़ती है, तो अधिकांश बैंक आपको आपके फिक्स्ड डिपॉजिट के आधार पर लोन दे देंगे।
एफडी पर लोन मिलना आसान इसलिए होता है, क्योंकि बैंक इसे सेक्योर्ड लोन की श्रेणी में मानते हैं। लोन लेने वाला व्यक्ति अगर कर्ज की अदायगी की स्थिति में नहीं रहता, तो भी बैंक एफडी में जमा रकम के जरिये अपने लोन की रिकवरी कर सकता है। हालांकि इसमें ध्यान देने वाली बात यह है कि पैसे की जरूरत अगर छोटी अवधि की हो, तभी एफडी पर लोन लेना समझदारी भरा रहता है। अन्यथा अपनी जरूरत को पूरा करने के लिए एफडी को तुड़वा कर काम निकालने में ही समझदारी है।