इन चार तरीकों से आप कर सकते हैं अपने बेहतर भविष्य के लिए बढ़िया सेविंग
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मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए सेविंग करना आसान नहीं है। कब उनकी सारी सैलरी खर्च हो जाती है पता ही नहीं चलता। कम पैसे खर्च करने की पूरी कोशिश के बावजूद मध्यमवर्गीय परिवार पैसा नहीं बचा पाते। लेकिन अगर सही फाइनेंशियल प्लानिंग की जाए तो आप अपने भविष्य के लिए पैसे जमा कर सकते हैं। इसलिए आज हम आपको ऐसे तरीके बताने जा रहे हैं जिनकी मदद से आप सेविंग कर सकेंगे।
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मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए सेविंग करना आसान नहीं है। कब उनकी सारी सैलरी खर्च हो जाती है पता ही नहीं चलता। कम पैसे खर्च करने की पूरी कोशिश के बावजूद मध्यमवर्गीय परिवार पैसा नहीं बचा पाते। लेकिन अगर सही फाइनेंशियल प्लानिंग की जाए तो आप अपने भविष्य के लिए पैसे जमा कर सकते हैं। इसलिए आज हम आपको ऐसे तरीके बताने जा रहे हैं जिनकी मदद से आप सेविंग कर सकेंगे।
सैलरी का 80 फीसदी ही करें खर्च
फाइनेंशियल प्लानर्स की मानें तो किसी भी व्यक्ति को अपनी सैलरी का 80 फीसदी ही खर्च करना चाहिए। फेस्टिव सीजन के दौरान अगर किसी ने ज्यादा शॉपिंग की है और घर का बजट गड़बड़ा गया है तो घबराने की बात नहीं हैं। जो पैसा आपने सेविंग के लिए जमा किया हुआ है, उसको आप एक लिमिट में निकालकर अपने खर्च को बिगड़ने से बचा सकते हैं।
पैसों की कमी होने पर करें आरडी का इस्तेमाल
अगर आपके पास फंड की कमी हो गई है और आप उधार नहीं लेना चाहते हैं, तो इसको आप अपने पुराने किए हुए निवेश से भी पूरा कर सकते हैं। इसके लिए रिकरिंग डिपॉजिट (आरडी) सबसे अच्छा विकल्प साबित हो सकता है। वहीं अगर आपका ऐसा कोई खाता नहीं है और आप क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं, तो आप इससे भी पैसा निकाल सकते हैं। लेकिन आपको इससे पैसा निकालने पर बहुत ज्यादा ब्याज देना पड़ेगा। हो सके तो क्रेडिट कार्ड से निकाले गए पैसे का जल्द से जल्द भुगतान भी कर दें।
आरडी में निवेश कर आपको साधारण बचत खातों से ज्यादा ब्याज मिल सकता है। बचत खातों में आमतौर पर 3.5 से चार फीसदी रिटर्न मिलता है। वहीं आरडी में आपको सात से आठ फीसदी सालाना रिटर्न मिल सकता है। खास बाद यह है कि आरडी के जरिए आपका पैसा सुरक्षित रहता है।
एसआईपी से होगा मोटा मुनाफा
ऐसे काम करता है एसआईपी
कई कंपनियों में होता है निवेश
कंपनी डिपॉजिट में भी कर सकते हैं बचत
बता दें कि डिपॉजिट के जरिए पैसे जुटाकर कंपनियां अपना कारोबार बढ़ाती हैं। कंपनियों के लिए यह एक तरह का अनसिक्योर्ड लोन होता है। यानी डिफॉल्ट की स्थिति में निवेशकों को कोई गारंटी नहीं मिलती हैं। कंपनी डिपॉजिट पर भारतीय रिजर्व बैंक के नियम लागू होते हैं।
कंपनी डिपॉजिट में एफडी की तुलना में ज्यादा जोखिम होता है। लेकिन ज्यादा ब्याज से ये ज्यादा ग्राहकों को आकर्षित करने में सफल हो जाता है। ये उन लोगों के लिए है जिन्हें नियमित आय चाहिए। बता दें कि एफडी और कंपनी डिपॉजिट दोनों ही 10 वर्षों तक के लिए कराई जा सकती है।